ब्लॉगविज्ञान प्रोद्योगिकी

जिस प्याज के छिलके को समझते हैं कचरा, उससे बनी रोशनी पर चलने वाली रोबोटिक तकनीक

Scientists have developed s

Scientists have developed soft robotic actuators using porous carbon nanoparticles made from waste onion peels. These actuators can convert low-power near-infrared (NIR) light into heat and then into mechanical movement. Tests showed that a film made from these nanoparticles and PDMS could produce movement of several millimetres in less than a second. The porous structure helps trap heat, improving the actuator’s performance. Adding an ultra-thin layer of gold increased its movement further and enabled controlled motion in two directions. The technology could have future applications in soft robotics, medical devices, artificial limbs, wearable equipment, drug delivery systems and other biomedical applications.

 

By- Jyoti Rawat-

प्याज के बेकार छिलकों से प्राप्त पोरस कार्बन नैनो-पार्टिकल्स का उपयोग करते हुए वैज्ञानिकों की एक टीम ने उन्नत फोटो-मैकेनिकल क्षमता वाले सॉफ्ट रोबोटिक एक्ट्यूएटर विकसित किए हैं। ये एक्ट्यूएटर कम शक्ति वाली नियर-इन्फ्रारेड (एनआईआर) रोशनी को प्रभावी ढंग से अवशोषित कर उसे यांत्रिक गति में बदल सकते हैं। इस तकनीक की खासियत यह है कि प्रकाश से उत्पन्न ऊर्जा को नियंत्रित गति में परिवर्तित किया जा सकता है। इसके संभावित उपयोग दवा आपूर्ति प्रणालियों, पहनने योग्य और सहायक उपकरणों, सर्जरी तथा कृत्रिम अंगों जैसे बायोइंजीनियरिंग अनुप्रयोगों में हो सकते हैं।

सॉफ्ट रोबोटिक्स के क्षेत्र में ऐसे एक्ट्यूएटर महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, क्योंकि ये कठोर धातु आधारित रोबोटिक प्रणालियों के विपरीत नरम, लचीली और आसानी से अनुकूलित होने वाली सामग्री से बनाए जा सकते हैं। इनमें सामान्यतः रबर जैसे पॉलिमर के साथ नैनोमैटेरियल्स का इस्तेमाल किया जाता है। नैनोमैटेरियल्स ऊर्जा के किसी स्रोत को यांत्रिक गति में बदलने का काम करते हैं। इस कारण सॉफ्ट रोबोट और एक्ट्यूएटर जैव-चिकित्सा, सैन्य क्षेत्र और दूरस्थ अंतरिक्ष अभियानों समेत कई क्षेत्रों में संभावनाएं पैदा कर रहे हैं।

इन प्रणालियों में लचीलापन, मजबूती, अनुकूलन क्षमता और पूर्वनिर्धारित गति उत्पन्न करने की क्षमता प्रमुख विशेषताएं हैं। यही कारण है कि वैज्ञानिकों की रुचि ऐसे सॉफ्ट रोबोटिक सिस्टम विकसित करने में लगातार बढ़ रही है, जिन्हें विभिन्न परिस्थितियों और जरूरतों के अनुरूप ढाला जा सके।

प्याज के छिलके बने उपयोगी नैनोमैटेरियल

इस दिशा में सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (सीईएनएस), बेंगलुरु में प्रो. एस. कृष्ण प्रसाद के नेतृत्व वाली वैज्ञानिकों की टीम ने महत्वपूर्ण प्रयोग किया। टीम ने प्याज के बेकार छिलकों से तैयार पोरस कार्बन नैनो-पार्टिकल्स (पीसीएन) का इस्तेमाल सॉफ्ट एक्ट्यूएटर विकसित करने में किया। इस शोध से कृषि एवं घरेलू कचरे के रूप में सामान्यतः फेंक दिए जाने वाले प्याज के छिलकों के उच्च तकनीकी उपयोग की संभावना भी सामने आई है।

‘जर्नल ऑफ नैनोस्ट्रक्चर इन केमिस्ट्री’ में प्रकाशित शोध के अनुसार, बीएमएस इंजीनियरिंग कॉलेज, बेंगलुरु के डॉ. गुरुमूर्ति हेगड़े ने प्याज के बेकार छिलकों से पोरस नैनो-कार्बन (पीसीएन) तैयार किए। इन नैनो-कार्बन में मौजूद अत्यधिक सरंध्रता और बड़ी विशिष्ट सतह ने उन्हें कम शक्ति वाली नियर-इन्फ्रारेड (एनआईआर) रोशनी के लिए प्रभावी ट्रैप के रूप में काम करने योग्य बनाया।

सामान्य कार्बन नैनोस्ट्रक्चर की तुलना में इन पोरस कार्बन नैनो-पार्टिकल्स की संरचना प्रकाश से उत्पन्न ऊर्जा को अधिक प्रभावी ढंग से पकड़ने में मदद करती है। जब एनआईआर प्रकाश इन नैनो-कणों पर पड़ता है, तो प्रकाश ऊर्जा ऊष्मा में परिवर्तित होती है। यह ऊष्मा एक्ट्यूएटर में मौजूद सामग्री के व्यवहार को प्रभावित करती है और अंततः उसे यांत्रिक गति में बदल देती है।

कम शक्ति की रोशनी से तेज और बड़ी गति

पीसीएन और पीडीएमएस से बनी फिल्म ने परीक्षणों के दौरान कई मिलीमीटर तक की एक्ट्यूएशन यानी गति उत्पन्न की। खास बात यह रही कि यह प्रतिक्रिया एक सेकंड से भी कम समय में प्राप्त हुई। वैज्ञानिकों के अनुसार, इतनी तेज प्रतिक्रिया और इतनी अधिक गति को अन्य कार्बन नैनोस्ट्रक्चर से बनी सिंगल-लेयर फिल्मों में एक साथ हासिल करना अपेक्षाकृत कठिन रहा है।

पीडीएमएस यानी पॉलीडाइमिथाइलसिलोक्सेन एक लचीला पॉलिमर है, जिसका उपयोग सॉफ्ट रोबोटिक्स और माइक्रोफ्लूडिक्स जैसे क्षेत्रों में व्यापक रूप से किया जाता है। इसमें नैनोमैटेरियल्स को शामिल करके ऐसी फिल्म तैयार की जा सकती है, जो प्रकाश के संपर्क में आने पर नियंत्रित तरीके से मुड़ने या अन्य प्रकार की यांत्रिक गति करने लगे।

इस प्रयोग में पीसीएन की उच्च सरंध्रता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसकी संरचना ने एनआईआर प्रकाश से उत्पन्न ऊष्मा को कुछ समय तक प्रभावी ढंग से रोककर रखने में मदद की। इस तरह ऊष्मा का तत्काल बाहर निकलना कम हुआ और एक्ट्यूएटर को अधिक प्रभावी फोटो-मैकेनिकल प्रतिक्रिया मिली।

गर्मी को रोकने की क्षमता बनी अहम कड़ी

शोधकर्ताओं ने पीसीएन की इस हीट-ट्रैपिंग क्षमता को इन्हें तैयार करने की विशेष प्रक्रिया से जोड़ा। टीम की वरिष्ठ शोधार्थी सुश्री प्रज्ञा सत्पथी ने बताया कि किए गए विस्तृत मापों से पता चला कि फोटोथर्मल रूपांतरण दक्षता और ऊष्मा को रोककर रखने की क्षमता के बीच मजबूत संबंध है। यह संबंध पीसीएन तैयार करने के लिए इस्तेमाल किए गए पायरोलिसिस तापमान से भी जुड़ा पाया गया।

पायरोलिसिस ऐसी तापीय प्रक्रिया है, जिसमें किसी कार्बनिक पदार्थ को सीमित या नियंत्रित ऑक्सीजन की स्थिति में उच्च तापमान पर गर्म करके उसके कार्बन-समृद्ध अवशेष प्राप्त किए जाते हैं। प्याज के छिलकों से पीसीएन तैयार करने में इस प्रक्रिया के दौरान इस्तेमाल किया गया तापमान नैनो-कणों की संरचना और उनके गुणों को प्रभावित करता है।

शोध से संकेत मिला कि पायरोलिसिस तापमान को नियंत्रित करके पीसीएन की फोटोथर्मल क्षमता और ऊष्मा को रोककर रखने की क्षमता को भी नियंत्रित किया जा सकता है। वैज्ञानिकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष है, क्योंकि इससे एक्ट्यूएटर की कार्यक्षमता को जरूरत के अनुसार बेहतर बनाने के लिए एक प्रभावी नियंत्रण मानदंड उपलब्ध होता है।

दूसरे शब्दों में, केवल किसी नैनोमैटेरियल का इस्तेमाल करना ही पर्याप्त नहीं है। उसकी संरचना, सरंध्रता और निर्माण की परिस्थितियां यह तय कर सकती हैं कि वह प्रकाश को कितनी कुशलता से ऊष्मा में बदलेगा और उस ऊष्मा को कितनी देर तक अपने भीतर बनाए रख पाएगा। यही दोनों कारक एक्ट्यूएटर की अंतिम यांत्रिक गति को प्रभावित करते हैं।

सोने की बेहद पतली परत से क्षमता और बढ़ी

शोध टीम ने इस तकनीक में एक और प्रयोग किया। पीसीएन आधारित फिल्म के साथ लगभग 30 नैनोमीटर मोटी सोने की अल्ट्राथिन परत का इस्तेमाल किया गया। इस अतिरिक्त परत से एक्ट्यूएशन की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। परीक्षणों में एक्ट्यूएशन की मात्रा दोगुने से भी अधिक हो सकती थी।

इसके अलावा, इस संरचना में द्विदिश फोटो-नियंत्रित गति भी हासिल की गई। इसका अर्थ है कि प्रकाश के नियंत्रण के आधार पर एक्ट्यूएटर की गति को दो दिशाओं में नियंत्रित किया जा सकता है। इस तरह की नियंत्रित और प्रतिवर्ती गति सॉफ्ट रोबोटिक्स में विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है, जहां किसी वस्तु को पकड़ने, छोड़ने, मोड़ने या किसी निर्धारित दिशा में ले जाने के लिए लचीली गति की आवश्यकता होती है।

सॉफ्ट एक्ट्यूएटरों की यही विशेषता उन्हें पारंपरिक कठोर रोबोटिक प्रणालियों से अलग बनाती है। शरीर के नरम ऊतकों या नाजुक वस्तुओं के साथ काम करने वाले उपकरणों में बहुत अधिक कठोर या तेज गति नुकसान पहुंचा सकती है। इसके विपरीत, नियंत्रित और लचीली गति वाले एक्ट्यूएटर ऐसे अनुप्रयोगों के लिए अधिक अनुकूल हो सकते हैं।

एनआईआर से चलने वाला बिजली स्विच भी बनाया

इस तकनीक की व्यावहारिक उपयोगिता प्रदर्शित करने के लिए वैज्ञानिकों ने एक नियर-इन्फ्रारेड संचालित बिजली स्विच भी विकसित किया। यह स्विच एनआईआर प्रकाश के संपर्क में आने पर एलईडी सर्किट को सक्रिय कर सकता है।

यह प्रयोग इस बात का उदाहरण है कि प्रकाश आधारित सॉफ्ट एक्ट्यूएशन को केवल रोबोटिक गति तक सीमित नहीं रखना पड़ता। यदि किसी सामग्री को प्रकाश से नियंत्रित तरीके से गति देने या विद्युत सर्किट को सक्रिय करने में सक्षम बनाया जा सके, तो भविष्य में रिमोट कंट्रोल, सेंसर, पहनने योग्य इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य स्मार्ट उपकरणों में इसके उपयोग की संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं।

नियर-इन्फ्रारेड प्रकाश का एक लाभ यह है कि इसे कई परिस्थितियों में दूर से नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए ऐसी प्रणालियां उन अनुप्रयोगों के लिए उपयोगी हो सकती हैं, जहां पारंपरिक विद्युत संपर्क या यांत्रिक नियंत्रण को कम करना वांछित हो।

कचरे से उच्च तकनीक तक

इस शोध का एक दिलचस्प पक्ष यह भी है कि इसमें इस्तेमाल किया गया शुरुआती कच्चा माल प्याज के बेकार छिलके हैं। आमतौर पर भोजन तैयार करने के दौरान निकलने वाले इन छिलकों को जैविक कचरे के रूप में फेंक दिया जाता है। वैज्ञानिकों ने इसी अपशिष्ट पदार्थ को संसाधित कर ऐसे नैनोमैटेरियल में बदला, जिसका उपयोग उन्नत रोबोटिक प्रणालियों में किया जा सकता है।

इससे एक ओर कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण से निकलने वाले जैविक कचरे के मूल्यवर्धन की संभावना सामने आती है, वहीं दूसरी ओर कम लागत वाले कार्बन स्रोतों से उच्च तकनीकी सामग्री विकसित करने का रास्ता भी खुलता है। हालांकि किसी प्रयोगशाला स्तर की तकनीक को बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उपयोग तक पहुंचाने के लिए लागत, उत्पादन की एकरूपता, दीर्घकालिक स्थिरता, सुरक्षा और बड़े पैमाने पर निर्माण जैसी कई कसौटियों पर आगे परीक्षण आवश्यक होंगे।

फिर भी यह अध्ययन इस दिशा में महत्वपूर्ण संकेत देता है कि प्राकृतिक और अपशिष्ट पदार्थों से तैयार नैनोमैटेरियल भविष्य की सॉफ्ट रोबोटिक्स तकनीकों में उपयोगी भूमिका निभा सकते हैं। विशेष रूप से प्रकाश से नियंत्रित होने वाले एक्ट्यूएटरों में यदि कम ऊर्जा में अधिक और तेज गति हासिल की जा सके, तो इनके अनुप्रयोगों का दायरा बढ़ सकता है।

प्याज के छिलकों से तैयार पोरस कार्बन नैनो-पार्टिकल्स के प्रयोग ने इस संभावना को रेखांकित किया है कि रोजमर्रा के जैविक कचरे में भी उन्नत तकनीकी सामग्री के लिए उपयोगी गुण छिपे हो सकते हैं। वैज्ञानिकों के लिए चुनौती अब इन गुणों को नियंत्रित, दोहराने योग्य और बड़े पैमाने पर उपयोग योग्य तकनीक में बदलने की है। यदि यह संभव होता है, तो कचरे से तैयार नैनोमैटेरियल सॉफ्ट रोबोटिक्स, बायोमेडिकल उपकरणों और स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों के विकास में एक उपयोगी विकल्प बन सकते हैं।

प्रकाशन: https://doi.org/10.1007/s40097-021-00414-9.

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!