हैरानी! 6,800 करोड़ की परियोजना में मजदूर की जान की कीमत सिर्फ पांच लाख?

सात मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की अनुग्रह राशि पर SDC फाउंडेशन के अनूप नौटियाल ने उठाए सवाल, एक करोड़ रुपये सहायता की मांग
देहरादून, 16 अगस्त। चमोली के पीपलकोटी स्थित विष्णुगाड़-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की टेल रेस टनल में हुए हादसे में सात श्रमिकों की मौत के बाद टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड की ओर से घोषित पांच-पांच लाख रुपये की अनुग्रह राशि पर सवाल उठने लगे हैं। एसडीसी फाउंडेशन के संस्थापक-अध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने इसे गंभीर विषय बताते हुए कहा है कि हजारों करोड़ रुपये की परियोजना में जान गंवाने वाले श्रमिक के परिवार को केवल पांच लाख रुपये की अनुग्रह राशि देना पर्याप्त नहीं है।
नौटियाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल और केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया से इस मामले में हस्तक्षेप कर टीएचडीसी को अनुग्रह राशि की समीक्षा करने का आग्रह किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी केंद्र सरकार और टीएचडीसी के समक्ष यह मुद्दा उठाने की अपील की है।
एक मृत श्रमिक के परिवार को कम से कम एक करोड़ की मांग
अनूप नौटियाल ने मांग की है कि हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक श्रमिक के परिवार को कम से कम एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए। इसके साथ ही उन्होंने प्रभावित परिवारों को दीर्घकालिक वित्तीय सहायता, बच्चों की शिक्षा और परिवार के सदस्यों को रोजगार जैसी सहायता उपलब्ध कराने की मांग भी की है।
उनका कहना है कि यह केवल मुआवजे की रकम का सवाल नहीं है, बल्कि उन श्रमिकों के जीवन के मूल्य और उनके परिवारों की भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मानवीय प्रश्न है। खतरनाक परिस्थितियों में देश की बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के निर्माण में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा और उनके परिवारों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
6,800 करोड़ से अधिक की परियोजना
नौटियाल ने अपने बयान में परियोजना की आर्थिक लागत और घोषित अनुग्रह राशि के बीच बड़े अंतर की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है। विष्णुगाड़-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की संशोधित लागत 6,823.72 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। वहीं, टीएचडीसी की ओर से 13 अगस्त के टेल रेस टनल हादसे में मृत प्रत्येक श्रमिक के निकटतम परिजन को पांच लाख रुपये देने की घोषणा की गई है।
उनका तर्क है कि परियोजना का आर्थिक पैमाना बहुत बड़ा है, लेकिन जिन श्रमिकों के श्रम से ऐसी परियोजनाएं आकार लेती हैं, उनकी मृत्यु के बाद उनके परिवारों के लिए घोषित सहायता बेहद सीमित है। हालांकि, परियोजना की लागत और मुआवजे की राशि सीधे तुलनीय आर्थिक मद नहीं हैं, फिर भी नौटियाल ने इसे श्रमिकों के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के नजरिए से देखने की जरूरत बताई है।
ठेकेदार के कर्मचारी होने से जिम्मेदारी खत्म नहीं
हादसे में प्रभावित श्रमिक परियोजना के ठेकेदार के माध्यम से काम कर रहे थे। नौटियाल ने कहा कि श्रमिकों का रोजगार संबंध चाहे जिस संविदात्मक व्यवस्था के तहत हो, परियोजना संचालक अपनी परियोजना में सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी से पूरी तरह अलग नहीं हो सकता। उनका कहना है कि इतने बड़े और जोखिमपूर्ण बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट में श्रमिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
केवल अनुग्रह राशि नहीं, भविष्य की सुरक्षा भी जरूरी
टीएचडीसी ने 15 अगस्त को जारी प्रेस विज्ञप्ति में हादसे में मृत श्रमिकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये तथा घायलों को एक-एक लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की थी। कंपनी ने दुर्घटना में हुई जनहानि पर शोक व्यक्त किया है।
नौटियाल ने इसी घोषणा के संदर्भ में कहा है कि कंपनी को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए इस राशि पर तत्काल पुनर्विचार करना चाहिए। उनके अनुसार मृत श्रमिकों के परिवारों को एकमुश्त सहायता के साथ बच्चों की शिक्षा, दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा और रोजगार जैसी व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
पीपलकोटी टनल हादसे में सात श्रमिकों की मौत और तीन के लापता होने की घटना ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में चल रही बड़ी निर्माण एवं जलविद्युत परियोजनाओं में श्रमिक सुरक्षा के सवाल को सामने ला दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि टीएचडीसी और सरकार घोषित अनुग्रह राशि पर पुनर्विचार करते हैं या नहीं और हादसे की जांच में सुरक्षा मानकों तथा संभावित लापरवाही के पहलुओं को किस तरह सामने लाया जाता है।
