हर जिले के एक विशिष्ट मेले को मिलेगी नई पहचान, स्थानीय उत्पादों के निर्यात पर भी जोर
देहरादून, 25 अगस्त। उत्तराखंड के प्रत्येक जिले के एक विशिष्ट मेले अथवा पर्व को नई पहचान देने के साथ ही स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने मंगलवार को सचिवालय में जिलाधिकारियों के साथ बैठक में प्रत्येक जिले में ‘एक जिला-एक उत्सव’ की अवधारणा पर काम करने और स्थानीय उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रत्येक जिला अपने किसी एक विशिष्ट पर्व या मेले को प्रमुख आयोजन के रूप में विकसित करे। इसके लिए जिलेवार वार्षिक आयोजन कैलेंडर तैयार किया जाए और स्थानीय लोगों तथा संबंधित पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने उत्तराखंड से बाहर रहने वाले प्रवासियों को भी इन आयोजनों से जोड़ने को कहा, ताकि राज्य के स्थानीय उत्पादों, संस्कृति और परंपराओं को देश-दुनिया में व्यापक पहचान मिल सके।
उन्होंने कहा कि मेलों और उत्सवों को नियमित एवं संस्थागत स्वरूप देना जरूरी है, जिससे आने वाले वर्षों में उनकी स्थायी पहचान बन सके। मुख्य सचिव ने चमोली के विश्व धरोहर रम्माण उत्सव को बड़े स्तर पर आयोजित करने और उत्तरकाशी के विशिष्ट बटर फेस्टिवल को व्यापक पहचान दिलाने पर जोर दिया। उन्होंने पौड़ी और चमोली के शरदोत्सव, हरिद्वार महोत्सव, नैनीताल शीतकालीन कार्निवल और मसूरी शीतकालीन कार्निवल को अधिक आकर्षक और सुव्यवस्थित बनाने के निर्देश दिए।
चम्पावत में आयोजित होने वाली अंतरराष्ट्रीय एंगलिंग मीट को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने और उत्तरायणी मेले में साहसिक गतिविधियों का दायरा बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में मुख्य सचिव ने जिलेवार निर्यात की संभावनाओं की समीक्षा करते हुए प्रत्येक जिले का आधारभूत आंकड़ा तैयार करने को कहा। इसी के आधार पर निर्यात संवर्धन की कार्ययोजना बनाई जाएगी। उन्होंने प्रमुख सचिव नियोजन की अध्यक्षता में एक स्थायी समिति गठित करने के निर्देश दिए, जिसमें उद्योग, वन, आयुष सहित संबंधित विभागों और हितधारकों को शामिल किया जाएगा।
मुख्य सचिव ने कहा कि स्थानीय उत्पादों की पहचान के साथ उनके प्रसंस्करण, पैकेजिंग, गुणवत्ता, विशिष्ट पहचान और विपणन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की संभावनाओं का अधिकतम उपयोग किया जाए और प्रत्येक जिले के प्रमुख उत्पादों की अलग पहचान विकसित की जाए।
उन्होंने जिलाधिकारियों को विभिन्न जिलों में किए जा रहे सफल प्रयोगों और अनुभवों को साझा करने के निर्देश भी दिए, ताकि किसी एक जिले की सफल पहल को आवश्यकता के अनुसार दूसरे जिले में अपनाया जा सके। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक आयोजनों को केवल स्थानीय बाजार तक सीमित रखने के बजाय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के लिए विभागों को समन्वित प्रयास करने होंगे।
बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु और आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव शैलेश बगौली, श्रीधर बाबू अद्दांकी, युगल किशोर पंत, डॉ. अहमद इकबाल एवं राजेंद्र कुमार, अपर सचिव अभिषेक रोहिला सहित विभिन्न जिलों के जिलाधिकारी उपस्थित रहे।
