नासा का X-59 एयरप्लेन: बिना कानों को चुभने वाली ‘आवाज’ के सुपरसोनिक उड़ान की नई क्रांति
Before NASA can take the aircraft over communities to demonstrate quiet supersonic flight, engineers and pilots have to answer hundreds of questions. Perhaps most importantly, will it produce the quiet sonic thump that could reopen the skies to commercial supersonic flight?
-A NASA FEATURE-
हवा में आवाज की रफ्तार को पार करते ही आसमान में एक जोरदार धमाका होता है—इतना तेज कि खिड़कियों के शीशे तक चटक जाएं। इसी वजह से लंबे समय से आबादी वाले इलाकों के ऊपर से कमर्शियल सुपरसोनिक उड़ानों पर प्रतिबंध लगा हुआ है। लेकिन अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा अपने प्रयोगात्मक विमान X-59 (QueSST) के जरिए इस इतिहास को बदलने जा रही है। नासा के पॉडकास्ट Small Steps, Giant Leaps के एक विशेष एपिसोड में इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट के मुख्य रिसर्च टेस्ट पायलट जिम लेस (कॉलबैक नाम: ‘क्लू’) ने विमान की पहली सुपरसोनिक उड़ान और इसके भविष्य पर विस्तार से बात की।
पहली बार टूटी ‘साउंड बैरियर’ की दीवार
5 जून 2026 को नासा के X-59 विमान ने पहली बार साउंड बैरियर (ध्वनि की गति) को सफलतापूर्वक पार किया। पायलट जिम लेस ने बताया कि सिम्युलेटर की तुलना में विमान ने उम्मीद से कहीं अधिक तेजी से रफ्तार पकड़ी। पहली सुपरसोनिक टेस्ट फ्लाइट में इसे 1.10 माक (ध्वनि की गति से 1.1 गुना तेज) तक ले जाया गया। इसके बाद की उड़ानों में गति को 1.20 माक और फिर विमान के मूल डिजाइन लक्ष्य 1.40 माक तक पहुंचाया गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि 1.40 माक की स्पीड पर यह विमान बिना किसी भारी धमाके के एक शांत ‘थंप’ (हल्की थपकी जैसी आवाज) पैदा करता है, तो यह तकनीक पूरी तरह सफल साबित होगी।
बिना सामने की खिड़की के डिजिटल डिस्प्ले से उड़ान
X-59 का डिजाइन दुनिया के किसी भी पारंपरिक लड़ाकू या व्यावसायिक विमान से बिल्कुल अलग है, क्योंकि इसके कॉकपिट में आगे देखने के लिए पारंपरिक शीशा (विंडस्क्रीन) है ही नहीं। इसके बजाय विमान में एक बेहद हाई-डेफिनिशन (Ultra HD) कैमरा और डिस्प्ले सिस्टम लगाया गया है, जो पायलट को बाहर का रियल-टाइम विजुअल दिखाता है। सुरक्षा के लिए विमान में दो कैमरे दिए गए हैं—एक ऊपर और एक नीचे। टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान नीचे वाला कैमरा इस्तेमाल होता है और तेज रफ्तार में उड़ते समय वह पेट के अंदर सुरक्षित सिमट जाता है। पायलट जिम लेस के अनुसार, सिम्युलेटर अभ्यास के बाद असली प्लेन में इस डिजिटल डिस्प्ले से देखना बिल्कुल शीशे से बाहर देखने जैसा ही सटीक और साफ महसूस होता है।
धमाका नहीं, सिर्फ हल्की ‘थपकी’ की उम्मीद
विमान की गति और सुरक्षा के परीक्षण के बाद, नासा अब इसके ‘सोनिक थंप’ को मापने के दूसरे चरण में प्रवेश करेगा। इस विमान में शॉक वेव्स को इस तरह मोड़ा गया है कि जमीन पर रहने वाले लोगों को कान फाड़ने वाला धमाका नहीं, बल्कि एक बेहद धीमी आवाज ही सुनाई दे। यदि यह प्रयोग पूरी तरह सफल रहता है, तो कमर्शियल एविएशन के लिए सुपरसोनिक फ्लाइट्स के रास्ते हमेशा के लिए खुल जाएंगे। इससे भविष्य के यात्री आधे से भी कम समय में दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने तक का सफर तय कर सकेंगे।
एक टेस्ट पायलट का प्रेरणादायक सफर
F-15, F-18 और बोइंग 747 समेत 59 तरह के अलग-अलग एयरक्राफ्ट उड़ा चुके जिम लेस की खुद की कहानी बेहद रोचक है। उन्होंने बताया कि हाई स्कूल तक उन्हें यह अंदाजा भी नहीं था कि वे कभी पायलट बन सकते हैं, क्योंकि उनके परिवार ने कभी प्लेन में सफर नहीं किया था। पहली बार उन्होंने एयरफोर्स ROTC के दौरान C-130 कार्गो प्लेन के पिछले हिस्से में बैठकर उड़ान भरी थी और वहीं से कड़ी मेहनत के बल पर एक साधारण छात्र से नासा के शीर्ष रिसर्च टेस्ट पायलट बनने का सफर तय किया। नासा इस पूरे प्रोजेक्ट के आंकड़े और डिजाइन अमेरिकी एविएशन कंपनियों के साथ साझा करेगा ताकि भविष्य में 1.4 से 1.7 माक की स्पीड वाले शांत सुपरसोनिक यात्री विमान बनाए जा सकें।
