पूर्वोत्तर सीमा पर 76 किलो खतरनाक ‘मेथ’ ड्रग्स जब्त, दो तस्कर गिरफ्तार

नई दिल्ली / गुवाहाटी ( PIB). राजस्व आसूचना निदेशालय (DRI) ने पूर्वोत्तर भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ दो बड़े अभियानों में 76 किलोग्राम मेथम्फेटामाइन (Methamphetamine) की गोलियां बरामद कर दो लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार, तस्करों ने वाहनों में गुप्त केबिन बनाकर इस जानलेवा खेप को छिपाया था।
असम-मणिपुर सीमा पर ट्रक से पकड़ा गया 56 किलो नशा
25 अगस्त 2026 को DRI और असम राइफल्स की 38वीं बटालियन ने असम-मणिपुर सीमा पर लालपानी (सिलचर से 40 किमी दूर) में मणिपुर से आ रहे एक 12-पहिया ट्रक को रोका। ट्रक के चालक केबिन के पीछे एक गुप्त गुहा बनाई गई थी, जिसमें से 1-1 किलो के 36 पैकेट और 200-200 ग्राम के 100 छोटे पैकेट मिले। इनमें गुलाबी-नारंगी रंग की गोलियां थीं। टेस्ट किट से जांच करने पर इनमें एम्फेटेमिन की पुष्टि हुई। 56 किलोग्राम प्रतिबंधित पदार्थ और ट्रक जब्त कर चालक को गिरफ्तार कर लिया गया।
मिजोरम में कार के फ्यूल टैंक और फर्श के पास छिपाई गई थी 20 किलो खेप
इससे पहले 18 अगस्त 2026 को मिजोरम के आइजोल-चम्फाई मार्ग (बंग बंगला के पास) में एक कार की तलाशी ली गई। कार के साइड सिल (रॉकर पैनल) और फ्यूल टैंक व फर्श के बीच की गुप्त जगह से 20 किलो गोलियां (64 पैकेट) बरामद की गईं। यह नशा म्यांमार से जोखावथर-चम्फाई रास्ते से भारत लाया गया था। कार और नशीला पदार्थ जब्त कर चालक को NDPS अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर लिया गया।
क्या है यह दवा और आम इंसान के लिए क्यों है जानलेवा?
मेथम्फेटामाइन एक अत्यंत शक्तिशाली और खतरनाक कृत्रिम (सिंथेटिक) नशीला पदार्थ है। हालांकि चिकित्सा के क्षेत्र में बेहद सीमित और नियंत्रित परिस्थितियों में डॉक्टर की पर्ची पर इसका इस्तेमाल गंभीर मानसिक स्थिति (ADHD) या अत्यधिक मोटापे के दुर्लभ मामलों में होता है (जैसे अमेरिका में ‘Desoxyn’ दवा के रूप में)। लेकिन ब्लैक मार्केट में इसे ‘मेथ’, ‘क्रिस्टल मेथ’ या ‘याबा’ (Yaba) कहा जाता है, जहां लोग तुरंत ऊर्जा और फर्जी उत्साह महसूस करने के लिए इसका नशा करते हैं।
इसके सेवन से शरीर और दिमाग पर भयानक असर पड़ता है। इससे ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन खतरनाक रूप से बढ़ जाती है, दांत सड़ने लगते हैं (जिसे ‘मेथ माउथ’ कहते हैं), और स्ट्रोक या दिल का दौरा पड़ने का खतरा रहता है। साथ ही मरीज उग्र व्यवहार, मतिभ्रम ( hallucinations) और गंभीर डिप्रेशन का शिकार हो जाता है। भारत में NDPS अधिनियम, 1985 के तहत इसका निर्माण, परिवहन या कब्जा पूरी तरह से प्रतिबंधित और गंभीर दंडनीय अपराध है।
