राष्ट्रीयशिक्षा/साहित्य

भारत का उच्च शिक्षा क्षेत्र: विकास, पहुँच और समावेशिता का विस्तार

India’s higher education sector has expanded significantly over the  decades after independence, with growth in institutions, enrolment, faculty strength and student out-turn. Improvements in Gross Enrolment Ratio, women’s participation, gender parity, and inclusion of SC, ST and other disadvantaged groups reflect enhanced access and equity. Rising enrolment in STEM and international students indicates the strengthening of India’s knowledge ecosystem. Together, these achievements highlight the impact of NEP 2020 in promoting quality, inclusion, and excellence.

नई दिल्ली। भारत की ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में जारी यात्रा का सबसे अहम आधार देश का उच्च शिक्षा क्षेत्र बनकर उभरा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के लागू होने के साथ ही देश में एक ऐसी शिक्षा प्रणाली की मजबूत नींव रखी गई है, जो सर्वांगीण, बहु-विषयक (Multidisciplinary) और सतत विकास लक्ष्य (SDG 4) के अनुरूप समावेशी शिक्षा को बढ़ावा दे रही है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन (AISHE) के हालिया आंकड़े (2014-15 से 2023-24) दर्शाते हैं कि पिछले एक दशक में भारत ने उच्च शिक्षा के विस्तार, लैंगिक समानता और सामाजिक समावेशिता के मोर्चे पर ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं।

शिक्षा तक पहुंच को आसान बनाने के लिए बुनियादी ढांचे का अभूतपूर्व विस्तार किया गया है। 2014-15 में जहां देश में विश्वविद्यालयों की संख्या 760 थी, वहीं 2023-24 में यह 69.6 प्रतिशत बढ़कर 1,289 हो गई। इसी अवधि में कॉलेजों की संख्या 38,498 से 25.3 प्रतिशत बढ़कर 48,246 और स्टैंडअलोन संस्थानों की संख्या 12,276 से बढ़कर 15,221 (24 प्रतिशत वृद्धि) पहुँच गई। इस बुनियादी विस्तार के बूते कुल छात्र नामांकन 3.42 करोड़ से 31.5 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी के साथ 4.50 करोड़ के पार पहुँच गया है। सकल नामांकन अनुपात (GER) भी 23.7 प्रतिशत से बढ़कर 30 प्रतिशत हो गया है, जो वर्ष 2035 तक 50 प्रतिशत GER हासिल करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को मजबूती प्रदान करता है। विभिन्न स्तरों पर नामांकन की बात करें तो पीएचडी में 192.89 प्रतिशत, पोस्ट-ग्रेजुएट में 50.15 प्रतिशत, अंडर-ग्रेजुएट में 27.27 प्रतिशत और इंटीग्रेटेड कोर्सेज में 301.36 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई।

बीते दशक की सबसे प्रमुख झकियों में उच्च शिक्षा में महिलाओं की सशक्त भागीदारी और लैंगिक समानता शामिल है। महिला नामांकन 2014-15 के 1.57 करोड़ से 42.2 प्रतिशत बढ़कर 2023-24 में 2.24 करोड़ हो गया। महिलाओं का GER (31.2 प्रतिशत) लगातार सातवें साल पुरुषों के GER (28.9 प्रतिशत) से आगे रहा है। लैंगिक समानता को दर्शाने वाला जेंडर पैरिटी इंडेक्स (GPI) 0.92 से बढ़कर 1.08 हो गया है, जो महिलाओं के पक्ष में सकारात्मक झुकाव का प्रतीक है।

सामाजिक समावेशिता के मोर्चे पर भी देश ने बड़ा कदम बढ़ाया है। कुल नामांकन में अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों का हिस्सा बढ़कर 15.5 प्रतिशत और उनका GER 27.8 प्रतिशत हो गया। वहीं अनुसूचित जनजाति (ST) का हिस्सा 6.4 प्रतिशत और GER 22.8 प्रतिशत तक पहुँच गया। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों की हिस्सेदारी में सबसे बड़ी वृद्धि (32.8% से बढ़कर 40.1%) दर्ज की गई। दिव्यांगजनों (PwBD) का नामांकन भी 38.1 प्रतिशत बढ़कर 88,816 तक पहुँचा है।

तकनीकी और वैज्ञानिक क्षमता को बल देने के लिए STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) विषयों में नामांकन 11.5 प्रतिशत बढ़कर 1.02 करोड़ हो गया है। इसके अलावा, भारत की वैश्विक साख बढ़ने से विदेशी छात्रों का नामांकन 37.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 58,134 पर पहुँच गया है। शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के लिए शिक्षकों की संख्या 14.73 लाख से 17.6 प्रतिशत बढ़कर 17.32 लाख हुई है, जिसमें महिला शिक्षकों की हिस्सेदारी 44.9 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है। बुनियादी सुविधाओं की बात करें तो देश के 94% से अधिक संस्थानों में खेल के मैदान, 98% में पुस्तकालय और 85% से अधिक में आधुनिक प्रयोगशालाएं उपलब्ध हैं। ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि भारत एक सुलभ, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार उच्च शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रहा है।

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