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ब्रह्मांड के रहस्य खोजने निकली नासा की ‘रोमन’ अंतरिक्ष दूरबीन

NASA’s Nancy Grace Roman Space Telescope lifted off at 7:26 a.m. EDT on Aug. 30 from Kennedy Space Center in Florida. The Roman telescope will have a deep, panoramic view of the cosmos, generating never-before-seen pictures that will revolutionize our understanding of the universe.

By- Jennifer M. Dooren

वाशिंगटन। ब्रह्मांड के सबसे गहरे रहस्यों—डार्क मैटर, डार्क एनर्जी और सौरमंडल से बाहर मौजूद ग्रहों—की खोज के लिए नासा की महत्वाकांक्षी नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप ने अंतरिक्ष की अपनी यात्रा शुरू कर दी है। इसे रविवार सुबह 7:26 बजे अमेरिकी समय के अनुसार फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च कॉम्प्लेक्स-39ए से स्पेसएक्स के फाल्कन हेवी रॉकेट के जरिए प्रक्षेपित किया गया।

रोमन दूरबीन करीब तीन महीने और लगभग दस लाख मील (करीब 16 लाख किलोमीटर) की यात्रा के बाद सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के दूसरे लैग्रेंज बिंदु एल-2 के आसपास अपनी निर्धारित कक्षा में पहुंचेगी। यहां से वह विशाल आकाशीय क्षेत्र का अवरक्त प्रकाश में सर्वेक्षण करेगी।

नासा के अनुसार रोमन की खासियत उसका अत्यंत व्यापक दृष्टि क्षेत्र और स्पष्ट अवरक्त दृष्टि है। इसकी मदद से वैज्ञानिक ब्रह्मांड के इतिहास में बहुत पीछे तक झांक सकेंगे। इसका एक प्रमुख लक्ष्य डार्क मैटर और डार्क एनर्जी को बेहतर ढंग से समझना है। डार्क मैटर दिखाई नहीं देता, लेकिन उसके गुरुत्वाकर्षण प्रभाव को महसूस किया जा सकता है। इसी तरह डार्क एनर्जी को ब्रह्मांड के लगातार तेज गति से फैलने के पीछे जिम्मेदार माना जाता है।

प्रक्षेपण के सात मिनट बाद मैरीलैंड स्थित नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर को दूरबीन से आंकड़े मिलने शुरू हो गए। उड़ान के लगभग 31 मिनट बाद रोमन रॉकेट से सफलतापूर्वक अलग हो गई। करीब एक घंटे 23 मिनट बाद उसके सौर पैनल और उपकरणों को सूर्य की गर्मी तथा प्रकाश से बचाने वाली निचली ढाल भी सफलतापूर्वक खुल गई।

रोमन में लगा मुख्य वाइड फील्ड इंस्ट्रूमेंट 300 मेगापिक्सल का शक्तिशाली अवरक्त कैमरा है। इसमें 18 अत्याधुनिक डिटेक्टर लगे हैं। नासा का दावा है कि व्यापक क्षेत्रों का सर्वेक्षण करने के मामले में रोमन अंतरिक्ष दूरबीन हबल की तुलना में करीब एक हजार गुना तेजी से ब्रह्मांड का सर्वेक्षण कर सकेगी।

इसमें लगा कोरोनाग्राफ उपकरण तारों की तेज रोशनी को रोककर उनके आसपास मौजूद ग्रहों को देखने की तकनीक का परीक्षण करेगा। इससे बृहस्पति जैसे बाह्य ग्रहों की तस्वीरें लेने का प्रयास किया जाएगा। भविष्य में इसी तरह की उन्नत तकनीक पृथ्वी जैसे ग्रहों को सीधे देखने और वहां जीवन की संभावनाएं तलाशने में मददगार हो सकती है।

रोमन प्रतिदिन लगभग 1.4 टेराबाइट वैज्ञानिक आंकड़े पृथ्वी पर भेजेगी, जो अब तक नासा के किसी भी खगोल-भौतिकी मिशन की सबसे अधिक दैनिक डेटा दर होगी। इतने विशाल आंकड़ों के विश्लेषण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और नागरिक वैज्ञानिकों की भी मदद ली जाएगी।

तीन महीने की प्रारंभिक जांच और उपकरणों के अंशांकन के बाद दूरबीन वैज्ञानिक काम शुरू करेगी। नासा को उम्मीद है कि 2027 की शुरुआत में रोमन की पहली तस्वीरें जारी की जाएंगी।

इस दूरबीन का नाम नासा की पहली मुख्य खगोल विज्ञानी नैंसी ग्रेस रोमन के सम्मान में रखा गया है, जिन्हें हबल अंतरिक्ष दूरबीन की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करने के कारण अक्सर ‘मदर ऑफ हबल’ कहा जाता है।

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