अच्छी तैयारी के बावजूद चीन में अचानक आई भीषण बाढ़: पूरी रिपोर्ट
After a glacial flood last year, Chinese officials strengthened defenses at a border crossing with Nepal. But last week’s “cascade of hazards” overwhelmed them.

नेपाल-चीन सीमा पर स्थित गिलोंग पोर्ट (Gyirong Port) क्षेत्र में पिछले साल आई एक हिमनद (ग्लेशियर) बाढ़ के बाद चीनी अधिकारियों ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में महीनों लगा दिए थे। लेकिन हाल ही में आई प्राकृतिक आपदाओं की एक नई “शृंखला” (cascade of hazards) ने इन तमाम रक्षात्मक उपायों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
1. पिछले हादसे के बाद की गई तैयारियाँ
14 महीने पहले भी एक करीबी ग्लेशियर झील के फटने से आए भूस्खलन में ट्रक, मकान और पुल बह गए थे। इसके बाद अधिकारियों ने लगभग छह महीने के लिए पोर्ट बंद रखा।
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आपदा प्रबंधन का अपडेट: आपातकालीन योजनाओं में ग्लेशियर झील फटने की आपदाओं (GLOF) को शामिल किया गया और 24 घंटे जल स्तर की निगरानी के लिए सेंट्री स्थापित की गई।
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संरचनात्मक सुरक्षा: नई सुरक्षा दीवारें, मजबूत तटबंध और पानी को मोड़ने के लिए चैनल बनाने की निविदाएं (tenders) जारी की गईं।
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प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल: गिलोंग काउंटी में स्थानीय अधिकारियों को ग्लेशियर सुरक्षा का प्रशिक्षण दिया गया और मई में विशेषज्ञों के साथ विशेष सत्र आयोजित किए गए। जुलाई में मॉक ड्रिल के जरिए निवासियों को लाउडस्पीकर और मैसेज के माध्यम से जागरूक करने का अभ्यास कराया गया।

2. अचानक आई आपदा और मलबे का कहर
तमाम तैयारियों के बावजूद, बुधवार को एक बिल्कुल अलग प्रकार के खतरे ने हर सुरक्षा उपाय को नाकाम कर दिया। बर्फ, बड़ी चट्टानों और पानी की सुनामी जैसी लहर ने गिलोंग पोर्ट कॉम्प्लेक्स की 27 इमारतों को ध्वस्त कर दिया और फिर नेपाल में तबाही मचा दी। हिमस्खलन होने और सीमा से टकराने के बीच केवल 6 से 7 मिनट का ही समय मिला।
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भारी जनहानि: इस आपदा में नेपाल में 903 और तिब्बत में 16 लोगों की मौत हो गई।
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लापता लोग: नेपाल की आपदा एजेंसी के अनुसार 4,247 लोग (जिनमें 592 विदेशी शामिल हैं) और तिब्बत के गिलोंग काउंटी में 546 लोग लापता दर्ज किए गए।

3. क्यों विफल रहे निगरानी उपकरण?
विशेषज्ञों का कहना है कि 2025 का हादसा ग्लेशियर झील के ओवरफ्लो होने से हुआ था, जबकि इस बार की आपदा पिघलते परमाफ्रॉस्ट (permafrost) और कमजोर चट्टानों के कारण ग्लेशियर से गिरी बर्फ के चट्टानों के ढहने (ice avalanche) की वजह से आई।
चीन का निगरानी ढांचा केवल ग्लेशियर झीलों के फटने पर केंद्रित था, न कि इस प्रकार के अचानक हिम-मलबे के बहाव पर। चीनी वैज्ञानिक अब तिब्बत की सेडोंगपु घाटी में आइस-अवैलांच (हिमस्खलन) के लिए शुरुआती चेतावनी प्रणाली विकसित कर रहे हैं, लेकिन गिलोंग में 200 से अधिक ग्लेशियर झीलों की निगरानी ही मुख्य प्राथमिकता थी।
4. एक ही संकरे क्षेत्र में निर्माण पर उठे सवाल
मात्र 14 महीनों के भीतर एक ही क्षेत्र में दो भीषण आपदाएँ आने से अब यह सवाल उठ रहा है कि इतने संकरे घाटी वाले इलाके में मुख्य व्यापारिक केंद्र क्यों बनाया गया।
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व्यापारिक महत्व: पिछले एक दशक में गिलोंग पोर्ट चीन और नेपाल के बीच व्यापार का प्रमुख मार्ग रहा है, जो दोनों देशों के कुल व्यापार के लगभग एक-तिहाई हिस्से को संभालता है।
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भौगोलिक जोखिम: यह पांच मंजिला परिसर एक बेहद संकरी घाटी में स्थित है, जहां ग्लेशियरों से निकलने वाली दो नदियाँ आपस में मिलती हैं।
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विकल्पों की कमी: 2015 के नेपाल भूकंप में झांगमू-कोदारी क्रॉसिंग के क्षतिग्रस्त होने के बाद गिलोंग को मुख्य मार्ग बनाया गया था। विशेषज्ञों के अनुसार इस पहाड़ी क्षेत्र में सुरक्षित विकल्पों का अभाव है।
5. जलवायु परिवर्तन और जटिल आपदाएँ
क्षेत्र में पहले भी भूस्खलन और बाढ़ आते रहे हैं, लेकिन बढ़ते वैश्विक तापमान (Global Warming) ने इन घटनाओं को और अधिक विनाशकारी और अप्रत्याशित बना दिया है।
विशेषज्ञ इसे “कैस्केड ऑफ हैज़ार्ड्स” (Cascade of Hazards) कहते हैं, जहाँ एक के बाद एक कई आपदाएँ आती हैं और आपस में जुड़कर तबाही के असर को कई गुना बढ़ा देती हैं। चीनी वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार बर्फ का मलबा बिना रुके बेहद तेज गति से मलबे के बहाव में बदल गया, जो काफी दुर्लभ घटना है। इसने साबित किया है कि केवल पारंपरिक या एकल-खतरे (single hazard) की निगरानी प्रणाली अब सुरक्षा के लिए काफी नहीं है।
