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उत्तराखंड पुलिस को साइबर अपराध और मानव तस्करी पर शिकंजा कसने के निर्देश

लापता बच्चों की तलाश के लिए बनेगी समर्पित टीम, थानों से जब्त वाहनों को हटाने के लिए चलेगा अभियान

देहरादून, 31 अगस्त। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने साइबर अपराध, मानव एवं बाल तस्करी और नशीले पदार्थों के कारोबार के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के साथ पुलिस जांच में आधुनिक तकनीक का अधिक इस्तेमाल करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने लापता बालिकाओं और नाबालिग बच्चों की तलाश के लिए समर्पित टीम और मजबूत तंत्र विकसित करने तथा लंबे समय से लापता बच्चों और महिलाओं की खोज के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा है।

मुख्य सचिव ने सोमवार को सचिवालय में पुलिस विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि मानव तस्करी के खिलाफ मैदानी जिलों के साथ पर्वतीय क्षेत्रों में भी प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए। पुलिस और महिला एवं बाल विकास विभाग के पोर्टल को आपस में जोड़कर दोनों विभागों के आंकड़ों में एकरूपता सुनिश्चित की जाए। बेहतर समन्वय के लिए दोनों विभाग नोडल अधिकारी भी नियुक्त करें।

उन्होंने ‘ऑपरेशन स्माइल’ के नवीनतम आंकड़े उपलब्ध कराने और मानव एवं बाल तस्करी के मामलों का प्रकरणवार विश्लेषण करने के निर्देश दिए। तस्करी के नेटवर्क और संगठित गिरोहों की पहचान कर उनके खिलाफ मजबूत तंत्र विकसित करने को कहा। बचाए गए पीड़ितों के पुनर्वास पर विशेष ध्यान देने और दूसरे राज्यों के साथ समन्वय कर उन्हें सुरक्षित रूप से अभिभावकों तक पहुंचाने की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए गए।

साइबर अपराधों से निपटने के लिए बढ़ेगी विशेषज्ञता

मुख्य सचिव ने बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए साइबर पुलिस की क्षमता और मानव संसाधन बढ़ाने को कहा। उन्होंने साइबर विशेषज्ञों के साथ बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों को भी व्यवस्था से जोड़ने पर जोर दिया, ताकि ऑनलाइन ठगी और अन्य साइबर अपराधों के मामलों में तेजी से कार्रवाई की जा सके।

एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की कार्रवाई को प्रभावी बनाने के लिए संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और एनकॉर्ड की बैठक में इस संबंध में विस्तृत प्रस्तुतीकरण देने के निर्देश दिए गए।

अधिक मुकदमों वाले थानों में अलग जांच शाखा का सुझाव

मुख्य सचिव ने पुलिस विवेचना में तकनीक का अधिक इस्तेमाल करने और विवेचना अधिकारियों को आवश्यक जांच किट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन थानों में अधिक संख्या में प्राथमिकी दर्ज होती हैं, वहां अलग जांच शाखा स्थापित करने पर विचार किया जा सकता है।

ई-एफआईआर निरस्त किए जाने के मामलों का विश्लेषण और दोबारा सत्यापन करने के साथ न्यायश्रुति, फॉरेंसिक साइंस लैब, मालखाना और डायल 112 से जुड़ी डिजिटल व्यवस्थाओं को शीघ्र सक्रिय करने के निर्देश भी दिए गए। ई-समन का अधिक उपयोग करने तथा कमजोर इंटरनेट संपर्क वाले क्षेत्रों में नेटवर्क और बैंडविड्थ बढ़ाने को कहा गया।

थानों से हटेंगे वर्षों से खड़े जब्त वाहन

मुख्य सचिव ने थानों में बड़ी संख्या में खड़े जब्त वाहनों से जगह घिरने की समस्या पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने जब्त वाहनों के मामलों में डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर नियमानुसार उनके शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए। जिलों में अभियान चलाकर ऐसे वाहनों का निस्तारण करने और इसकी मासिक प्रगति रिपोर्ट देने को कहा गया।

बैठक में पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, सचिव गृह शैलेश बगौली, एडीजी डॉ. वी. मुरुगेशन, आईजी डॉ. नीलेश आनंद भरणे, आईजी सुनील कुमार मीणा, एसएसपी तृप्ति भट्ट और अजय सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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