कहानीकार कुसुम भट्ट को ‘आरब्ध’ सम्मान, पत्रिका का भी लोकार्पण

देहरादून, 6 सितम्बर। हिंदी की चर्चित कहानीकार कुसुम भट्ट को रविवार को देहरादून में आयोजित साहित्यिक समारोह में ‘आरब्ध’ सम्मान से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर साहित्यिक पत्रिका ‘आरब्ध’ का लोकार्पण भी हुआ। पत्रिका की संकल्पना वरिष्ठ कवि-साहित्यकार एवं ऊर्जा वैज्ञानिक डॉ. ईशान पुरोहित की है।
रिस्पना पुल के निकट एक होटल में आयोजित समारोह की अध्यक्षता करते हुए उत्तराखंड की लोक संस्कृति के पुरोधा, रंगकर्मी, शिक्षक एवं चिंतक प्रो. डी.आर. पुरोहित ने कहा कि ‘आरब्ध’ साहित्यकारों को अभिव्यक्ति का बेहतर मंच उपलब्ध कराने के साथ नए लेखन को भी प्रोत्साहित करेगी। उन्होंने डॉ. ईशान पुरोहित के साहित्यिक प्रयासों की सराहना की।
विशिष्ट अतिथि साहित्यकार डॉ. नंदकिशोर हटवाल ने कहा कि ऊर्जा वैज्ञानिक होने के बावजूद डॉ. ईशान पुरोहित बेहद संवेदनशील कवि हैं और साहित्य के प्रति उनका गहरा लगाव सुखद है। कुसुम भट्ट के साहित्य पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि किसी रचनाकार के लेखन का वास्तविक मूल्यांकन अक्सर लंबे समय के बाद होता है।
मुख्य अतिथि एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय के लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के निदेशक गणेश खुगशाल ‘गणि’ ने कहा कि ‘आरब्ध’ हिंदी और आंचलिक भाषाओं को एक साथ समझने का अवसर प्रदान करेगी।
सम्मान ग्रहण करते हुए कुसुम भट्ट ने कहा कि उन्होंने लेखन की शुरुआत कविता से की थी, लेकिन बाद में अपनी अभिव्यक्ति को विस्तार देने के लिए कहानी लेखन की ओर मुड़ीं। उनका कहना था कि रचनाकार को केवल अच्छा लिखने पर ध्यान देना चाहिए, उसका मूल्यांकन समाज स्वयं करता है।
‘आरब्ध’ के प्रबंध संपादक कैलाश गोदियाल ने आयोजन को कॉरपोरेट और सृजनात्मकता का संगम बताते हुए पत्रिका को उत्तराखंडी साहित्य का विशिष्ट मंच बनाने की प्रतिबद्धता जताई। कान्ता घिल्डियाल ने कुसुम भट्ट का परिचय दिया और संचालन ज्योत्स्ना जोशी ने किया।
समारोह के बाद बीना बेंजवाल की अध्यक्षता में कवि गोष्ठी हुई, जिसमें मदन मोहन डुकलान, कान्ता घिल्डियाल, मधुरवादिनी तिवारी, नंदन राणा नवल, कविता भट्ट, बेलीराम कंसवाल और निक्की पुष्कर सहित कई रचनाकारों ने कविता पाठ किया।
