डिजिटल दौर में लोकधुनों और परंपराओं के संरक्षण पर जोर

श्रीनगर गढ़वाल, 07 सितंबर। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग की ओर से “डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू हुई। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्री प्रकाश सिंह ने की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि गढ़ गौरव एवं सुप्रसिद्ध लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी तथा विशेष अतिथि जागर सम्राट पद्मश्री डॉ. प्रीतम भरतवाण उपस्थित रहे। उत्तराखंड सरकार के मीडिया अध्यक्ष प्रो. गोविंद सिंह भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि डिजिटल माध्यमों ने कलाकारों को सृजनात्मक स्वतंत्रता के साथ अपनी कला को व्यापक स्तर तक पहुंचाने और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के नए अवसर दिए हैं। हालांकि, उन्होंने उभरते गीतकारों और कलाकारों से लोकसंस्कृति के मूल स्वरूप तथा लोकजीवन से जुड़े विषयों को अपने सृजन का आधार बनाने का आह्वान किया। उन्होंने अपनी लोकगायन यात्रा के अनुभव साझा करते हुए लोकसंस्कृति के महत्व को रेखांकित किया।
कुलपति प्रो. श्री प्रकाश सिंह ने संगोष्ठी की विषय-वस्तु को वर्तमान समय के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताते हुए विद्यार्थियों और शोधार्थियों से अपनी लोक एवं सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोकजीवन में अनेक ऐसे सांस्कृतिक सूत्र मौजूद हैं, जिन्हें समझना और संरक्षित करना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थी और अध्यापक के बीच संवाद तथा भारतीय जीवन परंपरा में निहित लोक मूल्यों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
पद्मश्री डॉ. प्रीतम भरतवाण ने पर्वतीय लोक संस्कृति और लोकगीत परंपरा के संरक्षण में योगदान देने वाली विभूतियों को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल दौर में अपनी सांस्कृतिक जड़ों को जानना पहले से अधिक आवश्यक हो गया है। उन्होंने ढोल सागर, पंवाड़ सहित पर्वतीय लोक विधाओं के संरक्षण और नई पीढ़ी तक उनके प्रसार पर जोर दिया। उन्होंने डिजिटल माध्यमों पर गंभीर और सार्थक सामग्री को पर्याप्त स्थान न मिलने की स्थिति पर भी चिंता जताई।
विभागाध्यक्ष प्रो. मंजुला राणा ने स्वागत उद्बोधन में डिजिटल युग को लेकर “क्या खोया और क्या पाया” जैसे सवाल उठाए। उन्होंने युवाओं में घटते धैर्य और सहिष्णुता पर भी विचार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन लोक निष्पादन केंद्र के निदेशक गणेश खुगशाल ‘गणी’ ने किया, जबकि संगोष्ठी संयोजक डॉ. कपिल देव पंवार ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक, शोधार्थी, अतिथि शिक्षक और कर्मचारी मौजूद रहे। इनमें प्रो. वाईपी रैवानी, प्रो. एमएम सेमवाल, प्रो. डीएस नेगी, प्रो. राजेंद्र सिंह नेगी, प्रो. मोनिका गुप्ता, प्रो. जीपी भट्ट, प्रो. एमएस नेगी, प्रो. वीपी नेथानी, प्रो. गुड्डी बिष्ट, डॉ. विश्वेश वाग्मी, डॉ. चंद्रशेखर जोशी, डॉ. सविता भंडारी, डॉ. आरुषि उनियाल, डॉ. सुभाष चंद्र, डॉ. नितिन, डॉ. शंकर परगाई, जनसंपर्क अधिकारी आशुतोष बहुगुणा तथा सह-संचालक डॉ. अनूप सेमवाल शामिल रहे।
