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कैलाश की ओर बढ़ रहीं नंदा की तीन डोलियां, यात्रामार्ग नंदामय

हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट-
थराली/नंदाधाम कुरूड़, 7 सितम्बर। नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से कैलाश की ओर विदा हुईं नंदा देवी की तीनों डोलियां रविवार को अपने-अपने दूसरे पड़ाव पर पहुंच गईं। बधाण की श्री नंदा राजराजेश्वरी की उत्सव डोली नंदानगर क्षेत्र के मधकोट गांव, दशोली की नंदा डोली लुणतरा और बण्ड की नंदा डोली बटुला गांव पहुंची। तीनों यात्रामार्गों पर श्रद्धालुओं ने देव डोलियों का भव्य स्वागत कर पूजा-अर्चना की और मनौतियां मांगीं।
सोमवार को बधाण की नंदा डोली भेंटी, बण्ड की डोली ल्वांह-दिगोली नंदादेवी मंदिर और दशोली की डोली कांडेई गांव में तीसरे प्रवास पर रहेंगी।
शनिवार को नंदाधाम कुरूड़ से तीनों देव डोलियां कैलाश यात्रा के लिए एक साथ रवाना हुई थीं। कुरूड़ में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं ने अपनी ध्याणी के समान पूजी जाने वाली आराध्य नंदा देवी को भावपूर्ण वातावरण में कैलाश के लिए विदा किया था। तीनों डोलियों के इस बार करीब 280 किलोमीटर की यात्रा कर कैलाश क्षेत्र स्थित होमकुंड तक जाने की संभावना जताई जा रही है। इसकी एक बड़ी वजह यात्राओं के साथ चल रहे दो चौसिंगा खंडुओं को माना जा रहा है।
रविवार को यात्रा के दूसरे दिन बधाण की नंदा डोली के चरबंग में देवी पूजन के दौरान चमोली जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट, रघुवीर प्रधान, लक्ष्मण फर्स्वाण, महिपाल सिंह, राकेश फर्स्वाण, राय सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने यात्रा का स्वागत किया। चरबंग में पूजा-अर्चना और विदाई के बाद करीब पौने चार बजे डोली अपने दूसरे पड़ाव के लिए रवाना हुई। कुंडबगड़ पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने यात्रा का भव्य स्वागत किया। इसके बाद देर शाम डोली रात्रि विश्राम के लिए मधकोट पहुंची।
मधकोट में स्थानीय ग्रामीणों के साथ ही आसपास के गांवों से पहुंचे नंदा भक्तों ने डोली का श्रद्धापूर्वक स्वागत किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने नंदा देवी सहित अन्य देवी-देवताओं के अवतरण की धार्मिक अनुभूति भी की। यात्रा मार्ग पर समिति के अध्यक्ष नरेश गौड़, पूर्व अध्यक्ष मनशा राम गौड़, कन्हैया प्रसाद गौड़, राजेश गौड़, बची राम गौड़, धनी राम गौड़, दया राम गौड़, रमेश गौड़ और योगेश्वर प्रसाद गौड़ सहित नंदा पुजारियों ने श्रद्धालुओं की पूजा-अर्चना संपन्न कराई।
दशोली की डोली पहुंची लुणतरा
नंदाधाम कुरूड़ से रवाना हुई दशोली की नंदा डोली रविवार को अपने पहले पड़ाव कुमजुग गांव से सुबह करीब 11 बजे दूसरे पड़ाव के लिए रवाना हुई। यात्रा के कुंडबगड़ पहुंचने पर स्थानीय श्रद्धालुओं ने डोली का भव्य स्वागत किया और पूजा-अर्चना की। इसके बाद यात्रा लुणतरा गांव पहुंची, जहां डोली ने रात्रि प्रवास किया।
बण्ड की नंदा डोली बटुला पहुंची
कुरूड़ मंदिर से रवाना हुई तीसरी, बण्ड की नंदा देवी की डोली रविवार सुबह करीब 10 बजे अपने पहले पड़ाव मैठाणा से आगे की यात्रा पर निकली। चमोली, क्षेत्रपाल और बिरही होते हुए डोली दूसरे पड़ाव बटुला गांव पहुंची। पूरे यात्रामार्ग पर जगह-जगह श्रद्धालुओं ने देव डोली का स्वागत किया। भक्तों ने पूजा-अर्चना कर नंदा देवी से सुख-समृद्धि की कामना की।
एक साथ तीन देव डोलियों के कैलाश की ओर बढ़ने से इन दिनों पूरा चमोली जिला नंदामय हो उठा है। गांवों, कस्बों और नगरों में नंदा देवी के जागर, गीत, झोड़े और चांचरियों की गूंज सुनाई दे रही है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यात्राओं में शामिल हो रहे हैं और पूरे क्षेत्र में नंदा भक्ति का वातावरण बना हुआ है।
चौसिंगा खंडु बने श्रद्धा का केंद्र
नंदा देवी की यात्राओं के साथ चल रहे दो चौसिंगा खंडु भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बने हुए हैं। श्रद्धालु नंदा देवी की डोली की पूजा-अर्चना के साथ चौसिंगा खंडुओं की भी पूजा कर उन्हें चढ़ावा अर्पित कर रहे हैं। नंदा परंपरा में चौसिंगा खंडु का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है और इसी कारण यात्रामार्ग पर इनके दर्शन के लिए भी श्रद्धालुओं में खास उत्साह दिखाई दे रहा है।
बड़ी जात या लोकजात को लेकर फिर असमंजस
इस बीच यात्रा को ‘बड़ी जात’ अथवा ‘लोकजात’ कहे जाने को लेकर एक बार फिर असमंजस की स्थिति सामने आई है। रविवार को इस संवाददाता ने यात्रा के संबंध में नंदा देवी राजराजेश्वरी मंदिर एवं मेला कमेटी कुरूड़-नंदानगर के अध्यक्ष नरेश गौड़ से मोबाइल फोन पर जानकारी ली तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि बधाण की नंदा डोली ‘लोकजात यात्रा’ कर रही है और इसे लोकजात ही लिखा जाना चाहिए।
दूसरी ओर, इसी कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मनशा राम गौड़ नंदाधाम कुरूड़ से यात्रा की विदाई के दौरान चौसिंगा खंडु की पूजा करवाते नजर आए थे। इसके अलावा यात्रा के होमकुंड तक जाने की संभावना भी जताई जा रही है। ऐसे में यात्रा की प्रकृति और उसके आधिकारिक नाम को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है। श्रद्धालुओं के लिए, हालांकि, इस विवाद से अलग नंदा की कैलाश यात्रा आस्था और परंपरा का बड़ा पर्व बनी हुई है.

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