कालीमाई पंचगाईं समिति ने मांगा हक-हकूकधारियों का अधिकार
मुख्यमंत्री को पत्र भेज पांच गांवों को बीकेटीसी में प्रतिनिधित्व देने की उठाई मांग
कालीमठ, 8 सितम्बर। सिद्धपीठ कालीमाई पंचगाईं समिति कालीमठ ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर क्षेत्र के पांच गांवों के परंपरागत हक-हकूकधारियों के अधिकार सुनिश्चित करने और श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) में उन्हें उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग की है। समिति का कहना है कि सदियों से मां काली की सेवा, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़े रहने के बावजूद पंचगाईं के हक-हकूकधारियों को मंदिर व्यवस्था में अपेक्षित स्थान नहीं मिला है।
समिति ने मुख्यमंत्री को यह पत्र गत 23 अगस्त को भेजा था। समिति के अनुसार कालीमठ क्षेत्र के पांच गांव कालीमठ, कविलठा, ब्यूंखी, बेड़ुला और जग्गी बगवान के लोग पीढ़ियों से भगवती काली माई की सेवा और उनसे जुड़ी धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते आ रहे हैं। इसके बावजूद बीकेटीसी की व्यवस्थाओं में उनके परंपरागत योगदान को समुचित महत्व नहीं दिया जा रहा है। समिति का कहना है कि मंदिर परिसर में उसे कार्यालय जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं कराई गई है।
पंचगाईं समिति का दावा है कि अतीत में रावल परंपरा के दौरान पांचों गांवों के हक-हकूकधारियों को उनकी भूमिका के अनुरूप सम्मान और महत्व मिलता था, लेकिन बाद में मंदिरों के प्रबंधन की व्यवस्था बदलने के साथ उनका प्रतिनिधित्व लगातार कम होता गया। जबकि मां काली से जुड़े अनेक पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों का संपादन आज भी इन्हीं पांच गांवों के लोगों द्वारा किया जाता है।
समिति ने इस बात पर भी नाराजगी जताई है कि बीकेटीसी की व्यवस्था लागू होने के बाद से पंचगाईं क्षेत्र के किसी व्यक्ति को मंदिर समिति में सदस्य के रूप में प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। समिति का कहना है कि समय-समय पर ऐसे लोगों को भी बीकेटीसी में नामित किया जाता रहा है, जिनका इन मंदिरों की परंपरागत सेवा, पूजा-पद्धति और अनुष्ठानों से प्रत्यक्ष संबंध नहीं रहा, लेकिन वास्तविक हक-हकूकधारियों को प्रतिनिधित्व से वंचित रखा गया है। अलग उत्तराखंड राज्य बनने के बाद भी इस स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आने से स्थानीय लोगों में असंतोष है।
यह मांग ऐसे समय उठी है, जब इस वर्ष भगवती काली माई की दिवारा यात्रा चल रही है। गत जनवरी में देवप्रयाग में पवित्र स्नान के बाद भगवती की यात्रा विभिन्न क्षेत्रों से होते हुए इन दिनों केदारनाथ धाम पहुंची है। परंपरा के अनुसार वहां शिव-शक्ति मिलन के बाद भगवती बदरीनाथ धाम की यात्रा पर जाएंगी, जहां भगवान नारायण और मां लक्ष्मी को अयुत चंडी महायज्ञ के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
स्थानीय लोकमान्यता के अनुसार देव शक्तियों को जागृत करने के लिए निश्चित अंतराल पर इस विशिष्ट दिवारा यात्रा का आयोजन किया जाता है। समिति का कहना है कि दिवारा यात्रा से लेकर महायज्ञ तक के प्रमुख पारंपरिक अनुष्ठानों का संपादन कालीमाई पंचगाईं समिति और पांचों गांवों के हक-हकूकधारियों द्वारा किया जाता है। इसके विपरीत इन आयोजनों और मंदिर व्यवस्था से होने वाली आय बीकेटीसी के अधीन रहती है। इसी आधार पर पंचगाईं समिति ने मंदिर की व्यवस्था और निर्णय प्रक्रिया में अपने परंपरागत अधिकार तथा उचित प्रतिनिधित्व की मांग उठाई है।
समिति के अनुसार यह पहला अवसर है जब कालीमाई पंचगाईं समिति ने अपने हक-हकूक और प्रतिनिधित्व के सवाल को सीधे मुख्यमंत्री के समक्ष रखा है। पत्र भेजे करीब एक पखवाड़ा बीत जाने के बावजूद अभी तक समिति को इस संबंध में कोई सूचना अथवा जवाब नहीं मिला है। इससे कालीमठ, कविलठा, ब्यूंखी, बेड़ुला और जग्गी बगवान के हक-हकूकधारियों में निराशा के साथ रोष भी बढ़ रहा है।

