लोकगायक किशन महिपाल को डायट ने किया सम्मानित
विशिष्ट व्यक्तित्व व्याख्यानमाला में साझा की तीन दशकों की संगीत यात्रा, शिक्षकों के सवालों के दिए जवाब

गौचर, 10 सितम्बर (गुसाईं)। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) गौचर में विशिष्ट व्यक्तित्व व्याख्यानमाला के तहत प्रसिद्ध लोकगायक, संगीतकार एवं निर्देशक किशन महिपाल के व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस दौरान उन्होंने अपनी करीब तीन दशकों की संगीत यात्रा, संघर्ष और लोक संगीत से जुड़े अनुभव शिक्षकों के साथ साझा किए।
कौशलम् कक्षा-10 के तीन दिवसीय प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र में किशन महिपाल को विशिष्ट व्यक्तित्व के रूप में आमंत्रित किया गया था। व्याख्यान से पूर्व संस्थान के प्राचार्य आकाश सारस्वत ने उन्हें सम्मान पत्र, स्मृति चिह्न और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्हें श्रीमद्भागवत पुस्तक भी भेंट की गई।
अपने व्याख्यान में किशन महिपाल ने संगीत यात्रा के विभिन्न पड़ावों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2005 में उनका संगीत एल्बम आया था, जबकि वर्ष 2011 में उन्हें पहली बार अपनी टीम के साथ मंच पर प्रस्तुति देने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ने के दौरान उन्हें आर्थिक तंगी सहित अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी संगीत साधना और रचनात्मक यात्रा को निरंतर जारी रखा।
महिपाल ने लोक संगीत के प्रति अपने लगाव, संघर्ष और अनुभवों को साझा करने के साथ शिक्षकों के विभिन्न सवालों के जवाब भी दिए। उन्होंने संगीत, लोक संस्कृति और अपनी रचनात्मक यात्रा से जुड़े कई रोचक प्रसंग सुनाए। शिक्षकों के आग्रह पर उन्होंने अपने लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुतियां भी दीं। ‘कोरी कोरी’, ‘महल धरिया छिन’, ‘राजा ना रानी, जख दयबतों का ठौ छन भेजी’ और ‘जय बद्री विशाल’ जैसे गीतों की प्रस्तुति से पूरा वातावरण लोक संस्कृति और संगीत के रंग में सराबोर हो गया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ संकाय सदस्य राजेंद्र प्रसाद मैखुरी, वीरेंद्र सिंह कठैत, सुबोध कुमार डिमरी, गोपाल प्रसाद कपरुवाण, मृणाल जोशी, बच्चन जितेला, नीतू सूद, अनीता चंदोला, निशांत वशिष्ठ, पुष्पा कनवासी, मनोज हटवाल, ललित मोहन पांडे, वीरेंद्र सिंह नेगी और रविंद्र रावत समेत 150 से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन संकाय सदस्य कमलेश कुमार मिश्र ने किया।
