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400 करोड़ से अधिक खर्च, फिर भी खेत रहे सूखे

  • पर ड्रॉप मोर क्रॉप योजना में अनियमितताओं का आरोप

  • आरटीआई कार्यकर्ता विकेश नेगी की शिकायत पर देहरादून में मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश

देहरादून, 10   सितम्बर।  हर खेत तक पानी पहुंचाने और कम पानी में अधिक उत्पादन के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) के ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ (पीडीएमसी) घटक के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठे हैं। आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर आरटीआई कार्यकर्ता विकेश नेगी ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में योजना पर 400 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने के बावजूद कई स्थानों पर ड्रिप सिंचाई प्रणालियां या तो काम नहीं कर रही हैं या किसानों को उनका अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका है। उनकी शिकायत पर देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान ने मामले की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं।

विकेश नेगी ने पीएमकेएसवाई के तहत कृषि एवं उद्यान विभाग से योजना के क्रियान्वयन और खर्च से संबंधित सूचनाएं मांगी थीं। उनका दावा है कि आरटीआई से मिले दस्तावेजों में विभिन्न जिलों में योजना के क्रियान्वयन की कई खामियां सामने आई हैं। कहीं ड्रिप सिंचाई प्रणा

Advocate Vikesh Negi

ली अनुपयोगी पड़ी है तो कहीं उपकरण उपलब्ध कराने के बावजूद उनका विधिवत संयोजन और किसानों को प्रशिक्षण नहीं दिया गया।

नेगी के अनुसार कृषि एवं उद्यान विभाग के माध्यम से योजना पर अब तक 400 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद कई जिलों में खेतों में लगाई गई ड्रिप सिंचाई प्रणालियों के उपयोग और उनकी मौजूदा स्थिति को लेकर सवाल हैं।

उन्होंने दावा किया कि योजना से संबंधित थर्ड पार्टी मूल्यांकन, चार्टर्ड अकाउंटेंट की ऑडिट रिपोर्ट तथा कैग और आंतरिक ऑडिट से जुड़े अभिलेखों में लाभार्थी सत्यापन, दस्तावेजों के रखरखाव, निरीक्षण, निगरानी और दिशा-निर्देशों के अनुपालन से संबंधित कमियां सामने आई हैं। मामले की जांच की मांग को लेकर उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जिलाधिकारियों को शिकायतें भेजी हैं। कई जिलों में मुख्य विकास अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी दिए जाने की बात कही गई है, जबकि देहरादून में जिलाधिकारी ने मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं।

पौड़ी में कहीं-कहीं बचे सिर्फ ड्रिप पाइप

थर्ड पार्टी मूल्यांकन में पौड़ी गढ़वाल में वर्ष 2016-17 और 2017-18 के दौरान स्थापित ड्रिप सिंचाई प्रणालियों की स्थिति का भी जायजा लिया गया। शिकायत में उद्धृत मूल्यांकन के अनुसार कई किसानों को योजना का लाभ मिलने के बाद रखरखाव और तकनीकी सहायता के अभाव में ड्रिप सिस्टम काम करना बंद कर गए। कुछ खेतों में पूरी प्रणाली के बजाय ड्रिप पाइप के अवशेष मिलने की बात भी कही गई है।

कुछ मामलों में किसानों को सामग्री तो उपलब्ध कराई गई, लेकिन ड्रिप सिंचाई प्रणाली की विधिवत स्थापना नहीं होने की बात सामने आई। इससे योजना के उद्देश्य और उस पर किए गए सरकारी खर्च की उपयोगिता पर सवाल उठाए गए हैं।

रुद्रप्रयाग में सिस्टम मिला, प्रशिक्षण नहीं

रुद्रप्रयाग में थर्ड पार्टी मूल्यांकन के दौरान किसानों से मिली जानकारी में भी योजना के क्रियान्वयन की कमियां सामने आने का दावा किया गया है। कुछ किसानों के अनुसार आपूर्तिकर्ताओं ने सामग्री उपलब्ध करा दी, लेकिन ड्रिप सिस्टम की विधिवत स्थापना, परीक्षण और उसके संचालन का प्रशिक्षण नहीं दिया।

इसके चलते किसान उपलब्ध कराई गई तकनीक का सही तरीके से इस्तेमाल और रखरखाव नहीं कर सके। ऐसे में पानी की बचत और कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए शुरू की गई सूक्ष्म सिंचाई तकनीक का अपेक्षित लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पाया।

पिथौरागढ़ में भी ऐसी ही तस्वीर

पिथौरागढ़ में किए गए मूल्यांकन में भी कई किसानों को केवल पाइप, फिल्टर और ड्रिपर उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आई है। शिकायत के मुताबिक सिस्टम की स्थापना और उसके संचालन का आवश्यक प्रशिक्षण नहीं मिलने से कई लाभार्थी इसका समुचित उपयोग नहीं कर सके।

ऐसे मामलों ने योजना की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं कि केवल उपकरण उपलब्ध करा देने के बजाय उनकी स्थापना, संचालन और रखरखाव सुनिश्चित करने की व्यवस्था कितनी प्रभावी रही।

ऑडिट में सत्यापन और अभिलेखों पर सवाल

योजना के लेखों के परीक्षण से संबंधित चार्टर्ड अकाउंटेंट की ऑडिट रिपोर्ट में भी लाभार्थियों के सत्यापन, दस्तावेजों के रखरखाव, निरीक्षण प्रक्रिया और अभिलेखों के संधारण से जुड़ी कमियों की ओर संकेत किए जाने का दावा है। योजना के क्रियान्वयन में शासनादेशों और दिशा-निर्देशों के अनुपालन तथा निगरानी एवं मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

शिकायत में कैग और आंतरिक ऑडिट से संबंधित आपत्तियों का भी उल्लेख किया गया है। अब मजिस्ट्रेटी जांच में शिकायत में लगाए गए आरोपों, योजना पर हुए खर्च, लाभार्थियों की वास्तविक स्थिति और संबंधित अधिकारियों एवं एजेंसियों की भूमिका की पड़ताल होने की उम्मीद है।

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