पंजाबी गौरव सम्मेलन में धामी और नितिन नवीन ने की शिरकत
सिख समाज के राष्ट्र निर्माण और तराई के विकास में योगदान को सराहा

रुद्रपुर, 10 सितम्बर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने गुरुवार को रुद्रपुर के एक निजी होटल में आयोजित पंजाबी गौरव सम्मेलन में भाग लिया। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम स्थल पहुंचने पर परिसर ‘वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह’ के जयकारों से गूंज उठा। सिख समाज की ओर से मुख्यमंत्री को सरोपा भेंट कर सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाबी गौरव सम्मेलन समाज की गौरवशाली परंपरा, संस्कृति, संस्कार, साहस, सेवा और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। सिख गुरुओं की महान परंपरा भारतीय संस्कृति की अमूल्य विरासत है। गुरु साहिबान का जीवन अन्याय के आगे न झुकने, जरूरतमंदों की सेवा, मानवता की रक्षा और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता है। सिख परंपरा ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की जीवंत मिसाल है।
उन्होंने कहा कि पंजाबी समाज ने मेहनत, ईमानदारी और उद्यमशीलता के बल पर देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सीमा पर देश की रक्षा से लेकर खेतों में अन्न उत्पादन, उद्योग-व्यापार और आपदा के समय सेवा कार्यों तक पंजाबी और सिख समाज का योगदान अनुकरणीय रहा है। तराई क्षेत्र के विकास और यहां की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में भी इस समाज की अहम भूमिका रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने सिख समाज की आस्था, बलिदान और गौरवशाली परंपराओं को सम्मान देने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें करतारपुर साहिब कॉरिडोर, लंगर को करों से मुक्त करने, श्री हरमंदिर साहिब को विदेशी अंशदान की स्वीकृति और गुरु गोबिंद सिंह की 350वीं जयंती के आयोजन जैसे कार्य शामिल हैं। साहिबजादों के बलिदान की स्मृति में वीर बाल दिवस घोषित किया गया। अफगानिस्तान से श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूपों को सुरक्षित भारत लाने और 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की दिशा में भी कदम उठाए गए।
उत्तराखंड से सिख समाज के आध्यात्मिक जुड़ाव का उल्लेख करते हुए धामी ने कहा कि गुरु नानक देव और गुरु गोबिंद सिंह के पवित्र चरण इस देवभूमि पर पड़े हैं। हेमकुंड साहिब और रीठा साहिब प्रदेश की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के अभिन्न अंग हैं। गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक करीब 12.5 किलोमीटर लंबे रोपवे के निर्माण की दिशा में कार्य आगे बढ़ चुका है। इससे बुजुर्गों, महिलाओं और अन्य श्रद्धालुओं की यात्रा सुगम होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1947 के विभाजन की त्रासदी में प्राण और सर्वस्व गंवाने वाले लोगों की स्मृति में राज्य सरकार ‘विभाजन विभीषिका स्मृति स्थल’ के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रही है। सरकार कानून-व्यवस्था और सामाजिक समरसता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। धर्मांतरण विरोधी और दंगा विरोधी कानूनों को सख्त किया गया है तथा मदरसा बोर्ड के स्थान पर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में सभी समुदायों की संस्कृति, परंपरा और विरासत को सम्मान देने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि गुरुबाणी और गुरुओं के संदेश नई पीढ़ी तक पहुंच सकें।
धामी ने युवाओं से गुरुओं के जीवन से प्रेरणा लेकर मेहनत, अनुशासन, साहस, सेवा और राष्ट्रभक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा और तकनीकी ज्ञान के साथ अपनी संस्कृति और संस्कारों से जुड़ाव भी जरूरी है। सरकार का लक्ष्य ऐसा उत्तराखंड बनाना है, जहां विकास के साथ विरासत, आधुनिकता के साथ संस्कार और प्रगति के साथ सामाजिक समरसता कायम रहे।
मुख्यमंत्री ने पंडित गोविंद बल्लभ पंत की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए तराई को बसाने और उसके विकास में उनके योगदान को भी याद किया।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि सिख समाज ने राष्ट्र निर्माण में सदैव महत्वपूर्ण योगदान दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है और इसे सामूहिक प्रयासों से साकार किया जा सकता है। इस यात्रा में सिख समाज सहित प्रत्येक वर्ग की भागीदारी महत्वपूर्ण है।
सम्मेलन में सांसद अजय भट्ट, कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा, राज्यसभा सांसद एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री बलदेव सिंह औलख, विधायक शिव अरोड़ा, त्रिलोक चीमा, प्रदीप बत्रा, राम सिंह कैड़ा, अरविंद पांडे, जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, मेयर विकास शर्मा, दीपक बाली, उत्तम दत्ता, मंजीत सिंह राजू, सुरेंद्र नामधारी, कमल जिंदल, मनोज पाल, तरुण बंसल, खिलेंद्र चौधरी, पूर्व विधायक राजेश शुक्ला, डॉ. प्रेम सिंह राणा, गुरविंदर सिंह चंदोक, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
