देवाल के रोयाणा में घरों से 10 मीटर दूर तक पहुंचा अस्तित्व का खतरा
A creeping disaster is closing in on Royana hamlet in Chamoli district, where relentless erosion by the Pindar river and land subsidence have brought the danger to barely 10 metres from residential houses. For 13 years, villagers have watched the unstable slope inch closer to their homes, but this monsoon has dramatically worsened the threat to life and property. More than two dozen houses, farmland, footpaths and a BSNL mobile tower are now at risk. With cracks developing in houses and rainwater weakening the ground beneath them, frightened residents are spending sleepless nights, awaiting urgent protection or relocation.
– 13 वर्षों से पिंडर नदी का कटाव और भू-धंसाव झेल रहे ग्रामीण
– भूगर्भीय सर्वेक्षण में विस्थापन की सिफारिश के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
–हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट-
थराली/देवाल, 11 सितम्बर। विकासखंड देवाल की ग्राम पंचायत देवसारी के सोडिंग लगा त्रिकोट के रोयाणा तोक में पिंडर नदी का कटाव और भू-धंसाव अब ग्रामीणों के लिए गंभीर खतरा बन गया है। इस वर्ष भारी बारिश के कारण भूस्खलन का दायरा बढ़कर आवासीय मकानों से करीब 10 मीटर की दूरी तक पहुंच गया है। दो दर्जन से अधिक मकानों के साथ लाखों रुपये की लागत से स्थापित बीएसएनएल के मोबाइल टावर पर भी खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने तत्काल सुरक्षात्मक कार्य कराने अथवा प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर विस्थापित करने की मांग की है।
रोयाणा तोक के पूर्व पोस्टमास्टर कुंदन सिंह कठैत, खिलाप सिंह कठैत, महिला मंगल दल अध्यक्ष तुलसी देवी और बीना देवी सहित ग्रामीणों ने बताया कि पिछले 13 वर्षों से तोक के नीचे बहने वाली पिंडर नदी लगातार भू-कटाव कर रही है। हर वर्ष बरसात में कटाव का दायरा बढ़ रहा है। इस बार स्थिति ज्यादा गंभीर होने से ग्रामीण भय के साये में रातें गुजारने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों के अनुसार एक ओर पिंडर नदी के तट की तरफ से लगातार भूस्खलन हो रहा है तो दूसरी ओर गांव के पीछे पहाड़ी से आने वाला बारिश का पानी मकानों के नीचे से रिसकर निकल रहा है। इससे जमीन धंसने के साथ कई आवासीय मकानों में गहरी दरारें पड़ गई हैं। नदी की ओर हो रहे भूस्खलन से पैदल रास्ते और कृषि भूमि भी लगातार कट रही है। मकानों के आगे की काफी कृषि भूमि पहले ही भूस्खलन की भेंट चढ़ चुकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस वर्ष की बारिश में स्थिति तेजी से बिगड़ी है और भूस्खलन मकानों से करीब 10 मीटर दूर तक पहुंच चुका है। इससे दो दर्जन से अधिक आवासीय मकान सीधे खतरे की जद में आ गए हैं। गांव में स्थापित बीएसएनएल के मोबाइल टावर पर भी खतरा बना हुआ है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से पहाड़ी की ओर से आने वाले बारिश के पानी की समुचित निकासी की व्यवस्था करने और पिंडर नदी के तट पर हो रहे कटाव एवं भूस्खलन को रोकने के लिए तत्काल सुरक्षात्मक कार्य कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि भूस्खलन से मकानों, पैदल रास्तों और कृषि भूमि को बढ़ते खतरे की सूचना उपजिलाधिकारी थराली को दी गई थी। साथ ही प्रशासन से प्रभावित क्षेत्र और खतरे की जद में आए मकानों का निरीक्षण कराने की मांग की गई। इसके बाद मौके पर केवल एक राजस्व उपनिरीक्षक को भेजा गया, लेकिन अब तक सुरक्षात्मक कार्यों को लेकर कोई ठोस पहल नहीं हुई है।
ग्रामीणों के अनुसार रोयाणा तोक में वर्ष 2013 से ही भू-धंसाव की घटनाएं सामने आती रही हैं। प्रत्येक बरसात में मकानों के पीछे मलबा आने और पैदल रास्तों तथा कृषि भूमि को नुकसान पहुंचने की घटनाएं होती हैं। पूर्व में भूगर्भीय सर्वेक्षण दल ने भी गांव का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी थी। ग्रामीणों का दावा है कि रिपोर्ट में क्षेत्र को भूस्खलन प्रभावित बताते हुए विस्थापन की सिफारिश की गई थी।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों बीतने के बावजूद न तो विस्थापन की दिशा में कार्रवाई हुई और न ही भूस्खलन तथा नदी कटाव रोकने के लिए स्थायी सुरक्षात्मक कार्य कराए गए। अब खतरा मकानों के बिल्कुल करीब पहुंचने से ग्रामीणों में भय बढ़ गया है। उन्होंने शासन-प्रशासन से तत्काल सुरक्षा कार्य शुरू करने और यदि क्षेत्र को सुरक्षित करना संभव नहीं है तो प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर विस्थापित करने की मांग की है।
