नासा ने ताजा कीं 9/11 की यादें अंतरिक्ष से मंगल तक
The attacks of Sept. 11, 2001 were a national tragedy that resulted in a staggering loss of life and a significant change in American culture. Each year, we pause to remember. In addition to honoring the Americans who died that day, NASA supported FEMA (Federal Emergency Management Agency) in New York in the days that followed and honored the victims by providing their families with flags flown aboard the Space Shuttle Endeavour.
11 सितंबर 2001 की सुबह अमेरिका पर हुए आतंकवादी हमलों ने न केवल न्यूयॉर्क और वाशिंगटन, बल्कि पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया था। न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ट्विन टावरों से उठता धुआं धरती से तो दिखाई दे ही रहा था, करीब 400 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष से भी इस त्रासदी के निशान साफ नजर आ रहे थे। उस समय अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर मौजूद नासा के अंतरिक्ष यात्री फ्रैंक कलबर्टसन धरती से दूर रहकर अपने देश पर हुए हमले के साक्षी बने। बाद के वर्षों में 9/11 की स्मृतियों से नासा का रिश्ता अंतरिक्ष स्टेशन से आगे बढ़कर मंगल ग्रह तक पहुंच गया।
अंतरिक्ष से दिखा न्यूयॉर्क का धुआं
हमलों के समय फ्रैंक कलबर्टसन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के एक्सपीडिशन-3 मिशन के कमांडर थे। उस समय वह अंतरिक्ष में मौजूद एकमात्र अमेरिकी नागरिक थे। हमले की सूचना मिलने के बाद उन्होंने पृथ्वी की ओर कैमरा किया। अंतरिक्ष स्टेशन जब न्यूयॉर्क क्षेत्र के ऊपर से गुजरा तो मैनहट्टन से उठता धुएं का विशाल गुबार उन्हें साफ दिखाई दिया।
धरती से सैकड़ों किलोमीटर ऊपर मौजूद एक अंतरिक्ष यात्री के लिए यह अनुभव असाधारण रूप से पीड़ादायक था। कलबर्टसन ने बाद में अपने अनुभवों को दर्ज करते हुए लिखा कि दुनिया उस दिन बदल गई थी। पृथ्वी पर जीवन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से बनाए गए अंतरिक्ष स्टेशन से अपने ही देश के घावों से उठता धुआं देखना उनके लिए बेहद विचलित करने वाला अनुभव था।
उनकी खींची तस्वीरें बाद में 9/11 के सबसे अलग ऐतिहासिक दस्तावेजों में शामिल हो गईं। वे तस्वीरें केवल न्यूयॉर्क में हुई तबाही नहीं दिखातीं, बल्कि यह भी बताती हैं कि मानव इतिहास की वह त्रासदी अंतरिक्ष से कैसी दिखाई दे रही थी।

राहत कार्यों में काम आई अंतरिक्ष तकनीक
हमलों के बाद नासा की भूमिका केवल तस्वीरें लेने तक सीमित नहीं रही। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ढहने से मैनहट्टन के वातावरण में धूल, धुआं और विभिन्न पदार्थों के महीन कण फैल गए थे। राहत एवं बचाव कार्यों में लगे लोगों के लिए वायु गुणवत्ता एक गंभीर चिंता बन गई।
नासा से जुड़े वैज्ञानिकों और तकनीकी संसाधनों ने प्रभावित क्षेत्र के पर्यावरणीय आकलन में योगदान दिया। हवाई और उपग्रह आधारित अवलोकनों के माध्यम से आग, धुएं और प्रभावित क्षेत्र की स्थितियों को समझने की कोशिश की गई। अंतरिक्ष और पृथ्वी-अवलोकन के लिए विकसित तकनीक इस तरह एक अभूतपूर्व शहरी आपदा को समझने में भी उपयोगी साबित हुई।

छह हजार झंडों ने की अंतरिक्ष यात्रा
9/11 के पीड़ितों और उनके परिवारों को श्रद्धांजलि देने के लिए नासा ने एक असाधारण पहल की। दिसंबर 2001 में स्पेस शटल एंडेवर के एसटीएस-108 मिशन के साथ करीब 6,000 छोटे अमेरिकी झंडे अंतरिक्ष में भेजे गए।
इन झंडों ने पृथ्वी की परिक्रमा की और फिर अंतरिक्ष यान के साथ वापस लौटे। इन्हें न्यूयॉर्क, वाशिंगटन और पेंसिल्वेनिया में हुए हमलों में मारे गए लोगों के परिवारों तथा राहत और बचाव कार्य में योगदान देने वाले लोगों के सम्मान से जोड़ा गया। जून 2002 में न्यूयॉर्क में आयोजित समारोह में अंतरिक्ष यात्रा कर चुके इन झंडों को पीड़ित परिवारों और संबंधित संस्थाओं को सौंपा गया।
इस पहल का संदेश प्रतीकात्मक लेकिन गहरा था—जिस देश ने धरती पर इतनी बड़ी त्रासदी झेली थी, उसकी स्मृतियां अंतरिक्ष की यात्रा करके वापस लौटी थीं।
वर्ल्ड ट्रेड सेंटर का टुकड़ा पहुंचा मंगल पर
9/11 और नासा से जुड़ी सबसे असाधारण कहानी मंगल ग्रह पर लिखी गई।
हमलों के समय लोअर मैनहट्टन स्थित हनीबी रोबोटिक्स के इंजीनियर नासा के मार्स एक्सप्लोरेशन रोवर स्पिरिट और अपॉर्चुनिटी के लिए रॉक एब्रेशन टूल तैयार कर रहे थे। इस उपकरण का काम मंगल की चट्टानों की ऊपरी सतह को हटाकर उनके भीतर की संरचना के अध्ययन में मदद करना था।
वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के मलबे से प्राप्त एल्युमिनियम का एक हिस्सा कंपनी तक पहुंचा। इंजीनियरों ने उससे दोनों रोवरों के उपकरणों के लिए विशेष केबल शील्ड तैयार कीं और उन पर अमेरिकी ध्वज की आकृति अंकित की गई।

इसके बाद ये उपकरण पृथ्वी से करोड़ों किलोमीटर दूर मंगल की यात्रा पर निकल पड़े। स्पिरिट जनवरी 2004 में और अपॉर्चुनिटी उसी महीने मंगल पर उतरे। इस प्रकार वर्ल्ड ट्रेड सेंटर का एक छोटा-सा अंश मंगल की धरती तक पहुंच गया।
आज दोनों रोवर निष्क्रिय हो चुके हैं, लेकिन उनके साथ लगा वह धातु का हिस्सा वहीं मौजूद है। मंगल पर बारिश, समुद्र या पृथ्वी जैसी सक्रिय मौसम व्यवस्था नहीं होने के कारण यह स्मृति बहुत लंबे समय तक वहां बनी रह सकती है। इस मायने में 9/11 का एक छोटा स्मारक मानव सभ्यता द्वारा दूसरी दुनिया पर छोड़ी गई ऐतिहासिक निशानियों में शामिल हो चुका है।
एक क्षतिग्रस्त ध्वज बना राष्ट्रीय स्मृति
9/11 के बाद ग्राउंड जीरो के पास मिला एक क्षतिग्रस्त अमेरिकी ध्वज भी धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्मृति और पुनर्निर्माण का प्रतीक बन गया। इसे बाद में नेशनल 9/11 फ्लैग के रूप में जाना गया।
इस ध्वज की मरम्मत और पुनर्निर्माण की यात्रा में अमेरिका के अलग-अलग हिस्सों के लोगों ने भाग लिया। इसमें विभिन्न स्थानों से आए ध्वज के कपड़े के टुकड़े जोड़े गए और नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर का योगदान भी इस सामूहिक स्मृति का हिस्सा बना। बाद में इसे न्यूयॉर्क स्थित नेशनल सितंबर 11 मेमोरियल एंड म्यूजियम के संग्रह में स्थान मिला।

एक त्रासदी, जिसकी स्मृति पृथ्वी से बाहर भी
9/11 की कहानी आमतौर पर ट्विन टावरों, ग्राउंड जीरो, दमकलकर्मियों, पुलिसकर्मियों और हजारों पीड़ित परिवारों की तस्वीरों के माध्यम से याद की जाती है। लेकिन इसका एक कम चर्चित अध्याय अंतरिक्ष विज्ञान से भी जुड़ा है।
एक अंतरिक्ष यात्री ने पृथ्वी की कक्षा से न्यूयॉर्क के घाव देखे। अंतरिक्ष तकनीक ने आपदा के बाद स्थितियों को समझने में योगदान दिया। हजारों स्मृति-ध्वज स्पेस शटल में पृथ्वी की परिक्रमा करके लौटे और वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के मलबे से निकला एल्युमिनियम मंगल ग्रह तक पहुंच गया।
इस तरह 11 सितंबर 2001 की स्मृति केवल न्यूयॉर्क के ग्राउंड जीरो तक सीमित नहीं रही। उसका एक निशान आज भी करोड़ों किलोमीटर दूर मंगल की निर्जन धरती पर मौजूद है—मानव इतिहास की उस त्रासदी की मूक याद के रूप में, जिसे पृथ्वी कभी भुला नहीं सकती।
