अब 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर लगेगा शुल्क
5 अक्टूबर से नई व्यवस्था, ग्राहक से नहीं व्यापारी से लिया जाएगा एमडीआर; 2000 रुपये तक भुगतान और आपसी लेनदेन रहेंगे मुफ्त
नई दिल्ली, 15 सितम्बर। देश में डिजिटल भुगतान की तस्वीर बदलने वाला एक महत्वपूर्ण फैसला मंगलवार को सामने आया। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने यूपीआई के जरिए व्यापारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाने की घोषणा की है। नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगी। आम उपभोक्ता को सीधे यह शुल्क नहीं देना होगा और व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले यूपीआई लेनदेन पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।
इस फैसले के साथ जनवरी 2020 से चली आ रही व्यापारिक यूपीआई भुगतानों की शून्य-एमडीआर व्यवस्था में छह साल से अधिक समय बाद बड़ा बदलाव हो रहा है। सरकार का उद्देश्य छोटे और रोजमर्रा के डिजिटल भुगतानों को मुफ्त रखते हुए बड़े व्यावसायिक लेनदेन से यूपीआई प्रणाली के संचालन, तकनीकी ढांचे, साइबर सुरक्षा और विस्तार की लागत का कुछ हिस्सा जुटाना है।
आम आदमी को क्या फर्क पड़ेगा?
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी व्यक्ति द्वारा अपने मित्र, रिश्तेदार या किसी अन्य व्यक्ति को यूपीआई से भेजे जाने वाले पैसे पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। रकम 2,000 रुपये से अधिक होने पर भी व्यक्ति से व्यक्ति यानी पी2पी लेनदेन मुफ्त रहेगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि व्यापारी पर लगने वाले एमडीआर को ग्राहक पर डालने से रोकने के लिए बैंकों को निर्देश दिए गए हैं।
इसी तरह 2,000 रुपये तक के यूपीआई भुगतान पर कोई शुल्क नहीं होगा। सरकार की अधिसूचना में यूपीआई के साथ रुपे डेबिट कार्ड से 2,000 रुपये तक के भुगतान को भी शुल्क मुक्त रखा गया है।
मसलन, कोई ग्राहक दुकान पर 1,500 रुपये का सामान खरीदकर यूपीआई से भुगतान करता है तो एमडीआर नहीं लगेगा। लेकिन नई व्यवस्था के दायरे में आने वाले बड़े व्यापारी को यदि ग्राहक 10,000 रुपये यूपीआई से देता है तो 0.4 प्रतिशत की दर से 40 रुपये एमडीआर बनेगा। यह शुल्क व्यापारी की ओर से वहन किया जाना है, ग्राहक से अलग से वसूलने के लिए नहीं।
75 हजार पर शुल्क अधिकतम 300 रुपये
नई व्यवस्था में बड़े भुगतान पर एमडीआर को अनियंत्रित बढ़ने से रोकने के लिए अधिकतम सीमा भी तय की गई है। 75,000 रुपये या इससे अधिक के पात्र यूपीआई भुगतान पर एमडीआर 300 रुपये प्रति लेनदेन से अधिक नहीं होगा। इस तरह एक लाख रुपये के पात्र भुगतान पर 0.4 प्रतिशत की सामान्य गणना 400 रुपये बैठती है, लेकिन व्यापारी को अधिकतम 300 रुपये एमडीआर ही देना होगा।
छोटे दुकानदारों को राहत
नई व्यवस्था में छोटे व्यापारियों को बचाने की कोशिश की गई है। यूपीआई क्यूआर कोड के माध्यम से महीने में एक लाख रुपये तक भुगतान प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों को एमडीआर से छूट दी गई है। इसका उद्देश्य मोहल्ले की छोटी दुकानों, रेहड़ी-पटरी और छोटे कारोबारियों पर नई व्यवस्था का आर्थिक बोझ नहीं पड़ने देना है।
यानी नई व्यवस्था का मुख्य निशाना सामान्य ग्राहक या छोटा दुकानदार नहीं, बल्कि यूपीआई के जरिए बड़ी रकम प्राप्त करने वाले स्थापित व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं।
रेलवे, बीमा और पेट्रोल पर केवल पांच रुपये
रेलवे, दूरसंचार, बीमा और पेट्रोल-ईंधन जैसे कुछ आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था की गई है। इन क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के पात्र भुगतान पर 0.4 प्रतिशत के बजाय केवल पांच रुपये प्रति लेनदेन का निश्चित एमडीआर रखा गया है। इससे आवश्यक सेवाओं पर भुगतान लागत सीमित रखने की कोशिश की गई है।
पूंजी बाजार से जुड़े लेनदेन के लिए भी सामान्य व्यापारियों से अलग व्यवस्था है। म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियों और शेयर ब्रोकर से संबंधित पात्र भुगतानों पर एमडीआर 0.02 प्रतिशत रखा गया है और इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी।
क्यों जरूरी समझा गया एमडीआर?
यूपीआई भारत में रोजमर्रा के भुगतान का सबसे बड़ा डिजिटल माध्यम बन चुका है। अगस्त 2026 में ही यूपीआई के जरिए करीब 24 अरब लेनदेन हुए, जिनका मूल्य लगभग 311 अरब डॉलर था। इतने विशाल नेटवर्क को चलाने में बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और यूपीआई ऐप संचालकों को तकनीकी ढांचे, सर्वर क्षमता, साइबर सुरक्षा और लेनदेन प्रसंस्करण पर लगातार खर्च करना पड़ता है।
अब तक शून्य-एमडीआर व्यवस्था के कारण इस लागत की भरपाई को लेकर बैंक और फिनटेक कंपनियां सवाल उठाती रही थीं। नई व्यवस्था के पीछे यूपीआई को दीर्घकाल में आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने और तकनीकी ढांचे में निवेश के लिए संसाधन उपलब्ध कराने का तर्क दिया गया है।
एमडीआर से प्राप्त कुल राशि का पांच प्रतिशत एक विशेष कोष में जाएगा, जिसका इस्तेमाल असंगठित क्षेत्र और छोटे कारोबारियों में यूपीआई को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा।
ग्राहक के लिए यूपीआई मुफ्त, पर कीमतों पर नजर जरूरी
नई व्यवस्था में सरकार और एनपीसीआई ने ग्राहक को सीधे शुल्क से बचाया है, लेकिन इसका व्यावहारिक असर आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा। बड़े व्यापारियों को अब कुछ यूपीआई भुगतानों पर लागत वहन करनी पड़ेगी। इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह खर्च वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में अप्रत्यक्ष रूप से तो नहीं जुड़ता।
फिलहाल सामान्य यूपीआई उपयोगकर्ता के लिए सबसे सरल बात यही है—किसी व्यक्ति को यूपीआई से पैसे भेजना मुफ्त रहेगा, 2,000 रुपये तक के व्यापारिक भुगतान भी शुल्क मुक्त रहेंगे और 2,000 रुपये से अधिक के पात्र व्यापारिक भुगतान पर लगने वाला एमडीआर ग्राहक के बजाय संबंधित व्यापारी को वहन करना होगा। नई व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होगी।
