क्षेत्रीय समाचार

बेराधार के किसानों को प्राकृतिक खेती के लाभ बताए 

थराली, 23 सितम्बर (हरेन्द्र बिष्ट)। कृषि विज्ञान केंद्र ग्वालदम के वैज्ञानिकों ने देवाल विकासखंड के बेराधार गांव में किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों और इससे होने वाले लाभों की जानकारी दी। इस दौरान कृषि उत्पादन बढ़ाने और पशुपालन को बेहतर बनाने के उपाय भी बताए गए।
ग्राम प्रधान सुमित्रा देवी की अध्यक्षता में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. डीसी काला ने किसानों को प्राकृतिक खेती के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक तरीके से खेती अपेक्षाकृत सरल होने के साथ ही मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए भी लाभकारी है। रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर स्थानीय संसाधनों के उपयोग से खेती की लागत भी कम की जा सकती है।
डॉ. काला ने कहा कि देश-दुनिया में प्राकृतिक और जैविक कृषि उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे उत्पादों को बाजार में सामान्य कृषि उत्पादों की तुलना में बेहतर मूल्य मिलने की संभावनाएं भी रहती हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती किसानों की आय बढ़ाने का एक उपयोगी माध्यम बन सकती है।
कार्यशाला में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने किसानों को कृषि उत्पादन बढ़ाने, पशुपालन को बढ़ावा देने तथा खेती से जुड़े विभिन्न विषयों की जानकारी दी। केंद्र के हेम चंद्र त्रिपाठी, गौतम लोहनी और भागीरथी बिष्ट ने भी किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।
इस दौरान ज्योति बिष्ट, महिला मंगल दल अध्यक्ष नीमा देवी, लीला देवी और दुर्गा देवी सहित अन्य ग्रामीण महिलाओं एवं किसानों ने कृषि, प्राकृतिक खेती और पशुपालन से संबंधित सवाल पूछे तथा वैज्ञानिकों से आवश्यक जानकारी प्राप्त की।

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