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गढ़वाल विश्वविद्यालय: उपाधि पूरी करने से वंचित छात्रों को मिला ‘विशेष अवसर’

 

श्रीनगर (गढ़वाल), 24 सितम्बर। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय ने सीबीसीएस प्रणाली के तहत नामांकित रहे ऐसे छात्र-छात्राओं को बड़ी राहत दी है, जो केवल एक प्रश्नपत्र में अनुत्तीर्ण होने या परीक्षा छूट जाने के कारण अपनी उपाधि पूरी नहीं कर पाए हैं। विश्वविद्यालय ने ऐसे विद्यार्थियों को उपाधि पूरी करने के लिए अंतिम ‘विशेष अवसर’ देने का निर्णय लिया है।
विश्वविद्यालय की विद्या परिषद की 25वीं बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2015-16 से 2021-22 के बीच स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में नामांकित रहे विद्यार्थी इस विशेष अवसर का लाभ उठा सकेंगे। इसके तहत किसी भी सेमेस्टर के केवल एक प्रश्नपत्र—सैद्धांतिक अथवा प्रायोगिक—में अनुत्तीर्ण होने या परीक्षा में शामिल नहीं हो पाने के कारण जिन विद्यार्थियों की उपाधि अधूरी रह गई थी, वे विशेष परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।
विश्वविद्यालय की अधिसूचना के अनुसार विशेष परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 28 सितम्बर से शुरू होगी और अभ्यर्थी 15 अक्टूबर, 2026 तक आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए परीक्षा शुल्क पांच हजार रुपये निर्धारित किया गया है। विशेष परीक्षा का केंद्र विश्वविद्यालय का बिड़ला परिसर, श्रीनगर गढ़वाल होगा।
इस अवसर का लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों को एक शपथपत्र भी देना होगा। इसमें उन्हें यह घोषणा करनी होगी कि भविष्य में वे इस प्रकार की किसी अन्य छूट अथवा विशेष अवसर की मांग नहीं करेंगे।
विषम सेमेस्टर के संबंधित प्रश्नपत्रों की विशेष परीक्षा दिसम्बर 2026 में आयोजित होने वाली परीक्षाओं के साथ कराई जाएगी। इसी तरह सम सेमेस्टर के प्रश्नपत्रों की परीक्षा मई 2027 की मुख्य परीक्षाओं के साथ आयोजित की जाएगी।
इच्छुक विद्यार्थी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन परीक्षा फॉर्म भर सकते हैं। परीक्षा फॉर्म भरने में किसी प्रकार की तकनीकी अथवा अन्य समस्या आने पर अभ्यर्थी अपने संबंधित महाविद्यालय या संस्थान से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा विश्वविद्यालय के परीक्षा अनुभाग से दूरभाष संख्या 9410127055 पर भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
विश्वविद्यालय के इस निर्णय से उन विद्यार्थियों को अपनी अधूरी उपाधि पूरी करने का अंतिम अवसर मिलेगा, जिनकी पढ़ाई केवल एक प्रश्नपत्र के कारण वर्षों से अधूरी पड़ी है।

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