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क्यों करते हैं लोग यात्रायें : धर्म, रिश्ते, मनोरंजन और इलाज पर्यटन की बड़ी वजह

A recent National Statistical Office survey (July 2025–June 2026) of over 246,000 Indian households reveals that domestic tourism is driven far more by faith, family, healthcare, and shopping than pure leisure. Nearly half of overnight trips in key categories were for pilgrimage or religious reasons. Medical travel proved the costliest (rural average ₹29,454; urban ₹41,649). Social visits dominated shorter trips (89%), while business travel carried the highest short-term costs. Rural travellers preferred buses; urban ones favoured trains. Day trips surged, led by shopping and social reasons. Uttar Pradesh emerged as the top destination. The findings underscore that despite modern tourism growth, religion and social bonds remain the core of Indian travel culture.- Jay S Rawat

 

जयसिंह रावत

भारत में पर्यटन का अर्थ केवल छुट्टियां बिताना, पहाड़ों या समुद्र तटों पर घूमना और ऐतिहासिक स्थलों को देखना नहीं है। भारतीयों की यात्राओं के पीछे धर्म, रिश्तेदारी, इलाज, कारोबार और खरीदारी की बड़ी भूमिका है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के नवीनतम घरेलू पर्यटन व्यय सर्वेक्षण ने भारतीयों की यात्रा की इस दिलचस्प तस्वीर को आंकड़ों के जरिए सामने रखा है। सर्वेक्षण बताता है कि लंबी अवधि में रात में ठहरने वाली यात्राओं में तीर्थ और धार्मिक यात्राएं सबसे आगे हैं, जबकि कम अवधि की यात्राओं में सामाजिक कारण सबसे प्रमुख हैं। दूसरी ओर, इलाज और कारोबार के लिए की जाने वाली यात्राएं परिवारों की जेब पर सबसे ज्यादा बोझ डालती हैं। जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच किए गए इस व्यापक सर्वेक्षण में देश के 2.46 लाख से अधिक परिवारों से जानकारी जुटाई गई। इनमें करीब 1.43 लाख ग्रामीण और 1.04 लाख शहरी परिवार शामिल थे। इसलिए इसके आंकड़े केवल पर्यटन उद्योग ही नहीं, बल्कि भारतीय समाज की बदलती जीवनशैली, धार्मिक आस्था, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, परिवहन और पारिवारिक संबंधों की भी महत्वपूर्ण तस्वीर पेश करते हैं।

 

हर दूसरी बड़ी यात्रा के पीछे आस्था

 

सर्वेक्षण का सबसे उल्लेखनीय निष्कर्ष धार्मिक पर्यटन को लेकर है। पिछले 365 दिनों में छुट्टी, मनोरंजन, तीर्थ एवं धार्मिक उद्देश्य, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा और खरीदारी जैसी श्रेणियों में की गई रात में ठहरने वाली यात्राओं में करीब 48 प्रतिशत यात्राएं तीर्थ और धार्मिक कारणों से हुईं। यानी इन श्रेणियों की लगभग हर दूसरी यात्रा का संबंध आस्था से था।

यह आंकड़ा भारत की पर्यटन अर्थव्यवस्था में तीर्थस्थलों की विशाल भूमिका की ओर भी संकेत करता है। उत्तराखंड जैसे राज्य के लिए इसका विशेष महत्व है, जहां चारधाम, हरिद्वार, ऋषिकेश, हेमकुंड साहिब, पूर्णागिरि, कैंची धाम, जागेश्वर और अनेक दूसरे धार्मिक स्थल लाखों यात्रियों को आकर्षित करते हैं। धार्मिक यात्रा अब केवल पूजा-अर्चना तक सीमित गतिविधि नहीं रही। इसके साथ परिवहन, होटल, भोजन, स्थानीय बाजार, प्रसाद, टैक्सी, घोड़ा-खच्चर, यात्रा प्रबंधन और छोटे कारोबार की लंबी श्रृंखला जुड़ती है।

ग्रामीण और शहरी भारत की यात्रा की जरूरतों में एक दिलचस्प अंतर भी सामने आया। ग्रामीण क्षेत्रों में धार्मिक यात्रा के बाद स्वास्थ्य और चिकित्सा के लिए यात्राओं की हिस्सेदारी 38.4 प्रतिशत रही। इसके विपरीत शहरी क्षेत्रों में छुट्टी, विश्राम और मनोरंजन के लिए की गई यात्राओं की हिस्सेदारी 36.4 प्रतिशत रही। यह अंतर इस ओर संकेत करता है कि ग्रामीण परिवारों के लिए यात्रा अक्सर आवश्यकता से जुड़ी है, जबकि शहरी परिवारों में मनोरंजन और अवकाश की भूमिका अपेक्षाकृत अधिक है।

 

इलाज की यात्रा सबसे महंगी

 

स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच के सवाल को सर्वेक्षण का खर्च संबंधी आंकड़ा और महत्वपूर्ण बना देता है। पिछले 365 दिनों में ग्रामीण परिवारों ने स्वास्थ्य और चिकित्सा संबंधी यात्रा पर औसतन 29,454 रुपये खर्च किए, जबकि शहरी परिवारों का औसत खर्च 41,649 रुपये रहा। संबंधित श्रेणियों में यह सबसे अधिक था। इसका अर्थ यह भी है कि किसी परिवार के सदस्य को इलाज के लिए घर से बाहर जाना पड़े तो खर्च केवल अस्पताल तक सीमित नहीं रहता। परिवहन, ठहरने, भोजन और साथ जाने वाले परिजनों का खर्च भी जुड़ जाता है। पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों के संदर्भ में यह आंकड़ा और महत्वपूर्ण हो जाता है, जहां विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं के लिए अक्सर बड़े शहरों की यात्रा करनी पड़ती है।

 

रिश्तेदारी अब भी भारतीय यात्राओं की धुरी

जब सर्वेक्षण ने पिछले 30 दिनों में कारोबार, सामाजिक कारण, शिक्षा-प्रशिक्षण और अन्य उद्देश्यों से की गई रात में ठहरने वाली यात्राओं को देखा तो तस्वीर बिल्कुल स्पष्ट थी—इनमें 89 प्रतिशत यात्राएं सामाजिक कारणों से हुईं। शादी-विवाह, पारिवारिक आयोजन, रिश्तेदारों से मुलाकात और दूसरे सामाजिक अवसर भारतीयों को सबसे ज्यादा यात्रा कराते हैं। इन यात्राओं में होटल के बजाय रिश्तेदारों और मित्रों के घर ठहरना सबसे सामान्य पाया गया। इससे यह भी पता चलता है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और बदलती जीवनशैली के बावजूद भारत में पारिवारिक और सामाजिक संबंध यात्राओं के प्रमुख आधार बने हुए हैं।

हालांकि खर्च के मामले में कारोबार की यात्राएं सबसे आगे रहीं। पिछले 30 दिनों की रात में ठहरने वाली कारोबारी यात्राओं पर ग्रामीण परिवारों का औसत खर्च 5,179 रुपये और शहरी परिवारों का 6,934 रुपये रहा। दोनों को मिलाकर प्रति कारोबारी यात्रा परिवारों का औसत खर्च 5,949 रुपये दर्ज किया गया।

 

गांव बस से, शहर रेल से करता है सफर

भारतीयों के यात्रा साधनों में भी ग्रामीण-शहरी अंतर दिखाई देता है। पिछले एक वर्ष की संबंधित रात में ठहरने वाली यात्राओं में ग्रामीण परिवारों के लिए बस सबसे प्रमुख साधन रही और इसकी हिस्सेदारी 32 प्रतिशत थी। शहरी परिवारों में रेल सबसे ज्यादा पसंद की गई, जिसकी हिस्सेदारी 35 प्रतिशत रही।

ठहरने की बात करें तो होटल और अतिथि गृह सबसे प्रमुख विकल्प रहे और उनकी हिस्सेदारी 36 प्रतिशत थी। फिर भी ग्रामीण यात्रियों में अपने या परिचित के आवास, नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए अस्थायी आवास अथवा धार्मिक संस्थाओं द्वारा उपलब्ध कराए गए नि:शुल्क ठहराव जैसे गैर-व्यावसायिक विकल्पों की भी उल्लेखनीय हिस्सेदारी रही। लगभग 80 प्रतिशत यात्रियों ने पांच दिन या उससे कम अवधि की यात्रा की। छुट्टी और मनोरंजन के लिए मई और अक्टूबर सबसे व्यस्त महीने रहे। इससे पर्यटन कारोबार की मौसमी प्रकृति भी सामने आती है।

 

एक दिन की यात्रा में खरीदारी का दबदबा

भारत में बिना रात बिताए की जाने वाली यात्राओं की संख्या भी बहुत बड़ी है। पिछले 30 दिनों में ग्रामीण क्षेत्रों के 65.1 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों के 46.2 प्रतिशत परिवारों ने कम से कम एक ऐसी यात्रा की। 2014-15 में ये अनुपात क्रमशः 57.1 और 40.6 प्रतिशत थे। यानी एक दिन में पूरी होने वाली यात्राओं का दायरा बढ़ा है। ऐसी यात्राओं में सामाजिक कारण और खरीदारी सबसे प्रमुख रहे। ग्रामीण क्षेत्रों में 32 प्रतिशत यात्राएं सामाजिक और 29 प्रतिशत खरीदारी के लिए थीं। शहरी क्षेत्रों में सामाजिक यात्राओं की हिस्सेदारी 37 प्रतिशत और खरीदारी की 17 प्रतिशत रही। खर्च के लिहाज से खरीदारी सबसे आगे रही। ग्रामीण परिवारों की एक-दिवसीय यात्राओं के कुल खर्च में खरीदारी की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत और शहरी परिवारों में 41 प्रतिशत रही।

 

उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा गंतव्य

राज्यों की तस्वीर भी दिलचस्प है। पिछले 365 दिनों की संबंधित रात में ठहरने वाली यात्राओं में राज्य के भीतर और दूसरे राज्यों से आने वाले यात्रियों को मिलाकर उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी सबसे अधिक 15.7 प्रतिशत रही। इसके बाद तमिलनाडु 13.4 प्रतिशत और राजस्थान 8 प्रतिशत रहा।

इसमें बड़े धार्मिक केंद्रों, विशाल आबादी और पर्यटन स्थलों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। इसी तरह पिछले 30 दिनों की सामाजिक, कारोबारी, शिक्षा-प्रशिक्षण आदि श्रेणी की रात में ठहरने वाली यात्राओं में भी उत्तर प्रदेश 15.5 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे रहा। इसके बाद बिहार 10.5 प्रतिशत और तमिलनाडु 9.6 प्रतिशत रहे।

 

पर्यटन के आंकड़ों में छिपी सामाजिक कहानी

घरेलू पर्यटन का यह सर्वेक्षण वास्तव में केवल यह नहीं बताता कि भारतीय कहां और कितना घूमते हैं। यह बताता है कि वे क्यों यात्रा करते हैं। आस्था उन्हें तीर्थों तक ले जाती है, बीमारी बेहतर अस्पतालों तक, रिश्ते दूसरे गांवों और शहरों तक और रोजगार तथा कारोबार आर्थिक केंद्रों तक।

इसीलिए पर्यटन नीति को केवल दर्शनीय स्थलों, होटलों और मनोरंजन तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। बेहतर सड़क और रेल संपर्क, सुलभ सार्वजनिक परिवहन, तीर्थस्थलों पर बुनियादी सुविधाएं, ग्रामीण क्षेत्रों के निकट बेहतर चिकित्सा सेवाएं और छोटे शहरों में व्यवस्थित बाजार—ये सभी किसी न किसी रूप में भारत की घरेलू यात्रा अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं।

नए आंकड़ों का सबसे स्पष्ट संदेश यही है कि भारतीय यात्रा संस्कृति में आधुनिक पर्यटन के विस्तार के बावजूद आस्था और सामाजिक संबंधों की जड़ें बेहद मजबूत हैं। देश घूम रहा है, लेकिन उसकी यात्रा का बड़ा हिस्सा आज भी मंदिर, तीर्थ, परिवार, इलाज और रोजमर्रा की जरूरतों के इर्द-गिर्द घूमता है।

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About the Author : Jay Singh Rawat (जयसिंह रावत) is a senior Dehradun-based journalist with nearly 5 decades of experience. He has authored eight books (two published by the National Book Trust) and regularly writes on Uttarakhand’s politics, environment, Himalayan issues, and social affairs for platforms such as Amar Ujala, jagran, Hindustan, Tribune, Outlook, Down To Earth, The Wire Hindi, and others. But the opinions and data presented in this article do not necessarily reflect the views or policy of this news portal. All interpretations and conclusions remain those of the author and the National Statistical Office survey referenced.

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