गुलदार की दहशत में वनकर्मियों की निगरानी में स्कूल जा रहे बच्चे
दो शावकों की मौत के बाद सरकोट और आसपास लगातार दिख रहा गुलदार, ग्रामीणों ने पिंजरा लगाने की मांग की

–हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट-
थराली, 29 सितम्बर। विकासखंड देवाल के सरकोट और आसपास के गांवों में गुलदार की लगातार चहलकदमी से दहशत का माहौल है। स्थिति यह है कि जनता उच्चतर माध्यमिक विद्यालय श्रीकोट (नंदकेशरी) के छात्र-छात्राओं को पिछले कई दिनों से वनकर्मियों की निगरानी में विद्यालय आना-जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने वन विभाग से आबादी क्षेत्र में दहशत का पर्याय बने गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने की मांग की है।
करीब डेढ़ सप्ताह पहले सरकोट गांव में आबादी से कुछ दूरी पर गुलदार के दो शावक मृत मिले थे। सूचना मिलने पर वन विभाग की थराली और देवाल रेंज की टीमों ने दोनों शव कब्जे में लेकर उनका पोस्टमार्टम कराया। प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई गई कि शावकों की मौत गुलदारों के आपसी संघर्ष अथवा किसी अन्य हिंसक वन्यजीव के हमले में हुई हो सकती है। मौत का कारण स्पष्ट नहीं होने के कारण पशुपालन विभाग ने उनका विसरा सुरक्षित रखा है, जिसे जांच के लिए बरेली भेजा जाना है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही शावकों की मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा। पोस्टमार्टम के बाद वन विभाग ने नियमानुसार दोनों शावकों का अंतिम संस्कार कर दिया।
ग्रामीणों के अनुसार दोनों शावकों की मौत के बाद से सरकोट और आसपास के गांवों में गुलदार की गतिविधियां बढ़ गई हैं। सुबह, शाम ही नहीं बल्कि दिन में भी उसकी चहलकदमी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इस दौरान कई कुत्ते और बकरियां भी उसका शिकार बन चुके हैं। लगातार मौजूदगी के कारण सरकोट और आसपास के गांवों में भय का माहौल है और लोग अकेले आने-जाने से कतराने लगे हैं।
मामला तब और गंभीर हो गया जब गुलदार की गतिविधियां जनता उच्चतर माध्यमिक विद्यालय श्रीकोट के आसपास भी दिखाई देने लगीं। विद्यालय के प्रधानाध्यापक उमेद सिंह गड़िया ने थराली और देवाल के वन क्षेत्राधिकारी को पत्र भेजकर विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है।
प्रधानाध्यापक के अनुसार 26 सितम्बर को कोठी, चिडिंगा, नंदकेशरी, पूर्णा और काठिंग आदि गांवों से आने वाले छात्र-छात्राओं ने विद्यालय परिसर के आसपास एक वन्यजीव को घूमते देखा, जिसे पत्र में बाघ बताया गया है। उसे देखकर बच्चे घबरा गए और कुछ विद्यार्थी अपने घरों की ओर लौट गए। दिनदहाड़े विद्यालय के आसपास वन्यजीव दिखाई देने से छात्र-छात्राओं और अभिभावकों में भय बना हुआ है तथा बच्चे विद्यालय आने-जाने से कतरा रहे हैं। प्रधानाध्यापक ने वन विभाग से विद्यार्थियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्था करने को कहा है।
वनकर्मी बच्चों को पहुंचा रहे स्कूल
थराली एवं देवाल के वन क्षेत्राधिकारी मनोज देवराड़ी ने बताया कि सरकोट गांव में गुलदार के दो शावक मृत मिले थे। पोस्टमार्टम के बाद नियमानुसार उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया है। मौत का वास्तविक कारण जांच रिपोर्ट मिलने के बाद स्पष्ट होगा।
उन्होंने बताया कि श्रीकोट विद्यालय की ओर से विद्यार्थियों की सुरक्षा की मांग मिलने के बाद वनकर्मियों को बच्चों को सुरक्षित विद्यालय और घर तक पहुंचाने के लिए लगाया गया है। इसके साथ ही वन विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार गश्त कर रही हैं। गुलदार को आबादी से दूर जंगल की ओर खदेड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं, ताकि किसी व्यक्ति अथवा पालतू पशु को नुकसान न पहुंचे।
इधर ग्रामीणों का कहना है कि लगातार गश्त के बावजूद गुलदार की आवाजाही बंद नहीं हुई है। उन्होंने वन विभाग से संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाने के साथ ही पिंजरा लगाकर गुलदार को पकड़ने की कार्रवाई करने की मांग की है।
