केटामाइन: इलाज की महत्वपूर्ण दवा, गलत इस्तेमाल से गंभीर खतरा
Ketamine is a short-acting anesthetic that can have hallucinogenic effects. It is becoming more easily available, and some experts fear misuse is increasing.

केटामाइन चिकित्सा जगत की एक महत्वपूर्ण बेहोशी की दवा है। अस्पतालों में प्रशिक्षित चिकित्सकों की निगरानी में इसका दशकों से सुरक्षित उपयोग होता रहा है और हाल के वर्षों में अवसाद के कुछ गंभीर मामलों के उपचार में भी इससे जुड़ी दवाओं का इस्तेमाल बढ़ा है। लेकिन यही दवा बिना चिकित्सकीय निगरानी, अधिक मात्रा में या शराब तथा दूसरी नशीली दवाओं के साथ ली जाए तो व्यक्ति की चेतना, स्मृति और निर्णय क्षमता को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। लंबे समय तक दुरुपयोग से लत और मूत्राशय सहित शरीर के अन्य अंगों को गंभीर नुकसान भी हो सकता है।
अमेरिका में कॉर्नेल विश्वविद्यालय की एक पूर्व छात्रा से जुड़े एक मामले ने केटामाइन के दुरुपयोग पर फिर बहस छेड़ दी है। महिला का आरोप है कि एक छात्र संगठन के आवास में उसे केटामाइन लेने के लिए मजबूर किया गया और बाद में उसके साथ सामूहिक यौन उत्पीड़न हुआ। मामले की दोबारा जांच शुरू हुई है और आरोप अभी न्यायिक परीक्षण का विषय हैं। इस घटना से अलग, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए महत्वपूर्ण सवाल यह है कि केटामाइन शरीर और मस्तिष्क पर क्या असर डालता है और इसका अनियंत्रित इस्तेमाल कितना खतरनाक हो सकता है।
केटामाइन क्या है?
केटामाइन कम अवधि तक असर करने वाली एक शक्तिशाली बेहोशी की दवा है। इसे 1960 के दशक में विकसित किया गया था और 1970 से अमेरिका में चिकित्सकीय इस्तेमाल की अनुमति है। शल्य चिकित्सा और आपात चिकित्सा में इसका उपयोग बेहोशी तथा दर्द नियंत्रण के लिए किया जाता है। बच्चों की चिकित्सा और पशु चिकित्सा में भी इसका उपयोग होता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने केटामाइन को आवश्यक दवाओं की सूची में स्थान दिया है। इसका विशेष महत्व उन परिस्थितियों में भी है जहां अत्याधुनिक बेहोशी और श्वसन सहायता की सुविधाएं सीमित हों।
यह मस्तिष्क में कैसे काम करती है?
केटामाइन मुख्य रूप से मस्तिष्क के एनएमडीए रिसेप्टर पर काम करती है और ग्लूटामेट नामक महत्वपूर्ण रासायनिक संदेशवाहक की गतिविधि को प्रभावित करती है। इसका प्रभाव सामान्य बेहोशी की कई दूसरी दवाओं से अलग होता है।
इससे व्यक्ति को अपने शरीर और आसपास के वातावरण से अलग होने जैसा अनुभव हो सकता है। देखने–सुनने की अनुभूति बदल सकती है, समय और स्थान का बोध बिगड़ सकता है और भ्रम या मतिभ्रम हो सकता है। अधिक मात्रा में व्यक्ति चलने, बोलने या प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो सकता है।
कुछ लोगों में ऐसी अवस्था पैदा होती है जिसमें वे आसपास की घटनाओं से आंशिक रूप से परिचित तो रहते हैं, लेकिन प्रतिक्रिया नहीं दे पाते। नशीले पदार्थों का इस्तेमाल करने वालों के बीच इस अत्यधिक विच्छिन्न अवस्था को अक्सर ‘के–होल’ कहा जाता है। इसके बाद घटना की पूरी या आंशिक स्मृति भी गायब हो सकती है।
अवसाद के इलाज में क्यों बढ़ा उपयोग?
पिछले कुछ वर्षों में केटामाइन ने मानसिक स्वास्थ्य उपचार में भी ध्यान आकर्षित किया है। अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने 2019 में केटामाइन से संबंधित दवा एस्केटामाइन को नाक से दिए जाने वाले स्प्रे के रूप में उपचार–प्रतिरोधी अवसाद के लिए मंजूरी दी थी। इसका इस्तेमाल विशेष चिकित्सकीय निगरानी में किया जाता है।
केटामाइन के कुछ अन्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी उपयोग ‘ऑफ–लेबल’ हैं, यानी दवा को उस विशेष उद्देश्य के लिए नियामक मंजूरी नहीं मिली होती, लेकिन चिकित्सक उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण और रोगी की स्थिति के आधार पर उसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
इसलिए यह समझना जरूरी है कि अवसाद के उपचार में चिकित्सक की निगरानी में दी जाने वाली केटामाइन और मनोरंजन या नशे के लिए मनमाने ढंग से इसका सेवन दो बिल्कुल अलग स्थितियां हैं।
शराब के साथ जोखिम क्यों बढ़ जाता है?
केटामाइन के साथ शराब, नींद की दवाएं, शांतिदायक दवाएं या अन्य नशीले पदार्थ लेना विशेष रूप से खतरनाक हो सकता है। एक से अधिक पदार्थ केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर रहे हों तो अत्यधिक बेहोशी, उल्टी, भ्रम, गिरने और चोट लगने तथा सांस संबंधी गंभीर समस्या का खतरा बढ़ सकता है। व्यक्ति यह भी ठीक से नहीं समझ पाता कि उसने कितनी मात्रा ले ली है। यही कारण है कि चिकित्सक बिना निगरानी इसके इस्तेमाल के प्रति विशेष सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।
क्या इसकी लत लग सकती है?
हां। बार–बार और अनियंत्रित सेवन से व्यक्ति में केटामाइन के प्रति सहनशीलता विकसित हो सकती है, यानी पहले जैसा प्रभाव पाने के लिए अधिक मात्रा की आवश्यकता महसूस होने लगती है। कुछ लोगों में मानसिक और शारीरिक निर्भरता विकसित हो सकती है तथा नशा छोड़ने में पेशेवर सहायता की जरूरत पड़ सकती है। यदि किसी व्यक्ति को लगातार केटामाइन लेने की इच्छा हो, मात्रा बढ़ती जा रही हो, काम या पारिवारिक जीवन प्रभावित होने के बावजूद सेवन जारी हो अथवा इसे रोकने में कठिनाई हो रही हो तो इसे चेतावनी के संकेत के रूप में लेना चाहिए।
मूत्राशय को हो सकता है गंभीर नुकसान
केटामाइन के लंबे समय तक भारी या बार–बार दुरुपयोग का एक गंभीर दुष्प्रभाव मूत्राशय से संबंधित है। इसे आमतौर पर ‘केटामाइन सिस्टाइटिस’ या ‘केटामाइन ब्लैडर सिंड्रोम’ कहा जाता है।
इसमें बार–बार पेशाब लगना, पेशाब करते समय दर्द या जलन, पेट के निचले हिस्से में दर्द और कभी–कभी पेशाब में खून आने जैसी शिकायतें हो सकती हैं। लगातार दुरुपयोग से मूत्राशय की क्षमता कम हो सकती है और गंभीर मामलों में स्थायी क्षति हो सकती है। गुर्दों और मूत्र मार्ग पर भी असर पड़ सकता है।
इसलिए केटामाइन लेने वाले किसी व्यक्ति में पेशाब से संबंधित लगातार समस्या दिखाई दे तो उसे इसे सामान्य संक्रमण समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।
ओवरडोज या गंभीर प्रतिक्रिया को कैसे पहचानें?
केटामाइन की गंभीर प्रतिक्रिया में व्यक्ति अत्यधिक उनींदा या बेहोश हो सकता है, भ्रमित हो सकता है, ठीक से खड़ा या चल नहीं सकता और आसपास की परिस्थितियों पर प्रतिक्रिया देना बंद कर सकता है। उल्टी, असामान्य व्यवहार, रक्तचाप या हृदय गति में बदलाव तथा सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है।
यदि कोई व्यक्ति बेहोश हो, उसे जगाना मुश्किल हो, सांस असामान्य या बहुत धीमी हो, दौरा पड़े अथवा वह गंभीर रूप से भ्रमित हो तो इसे चिकित्सा आपात स्थिति माना जाना चाहिए। ऐसे व्यक्ति को अकेला न छोड़ें और तत्काल आपात चिकित्सा सहायता लें। बेहोश व्यक्ति को जबरन पानी, भोजन या कोई दवा नहीं देनी चाहिए।
यौन उत्पीड़न में दुरुपयोग की आशंका
केटामाइन का एक चिंताजनक पहलू यह है कि इसकी वजह से व्यक्ति की निर्णय क्षमता और शारीरिक प्रतिक्रिया प्रभावित हो सकती है तथा बाद में याददाश्त में अंतराल रह सकता है। इस कारण इसके दुरुपयोग की आशंका नशीला पदार्थ देकर किए जाने वाले यौन अपराधों के संदर्भ में भी जताई जाती रही है।
यदि किसी व्यक्ति को किसी पार्टी या सामाजिक आयोजन के बाद असामान्य रूप से तेज नशा महसूस हो, घटनाओं की स्मृति गायब हो, अचानक शरीर पर नियंत्रण कम हो जाए या उसे संदेह हो कि उसके पेय में कुछ मिलाया गया था, तो सुरक्षित स्थान पर पहुंचना और भरोसेमंद व्यक्ति को इसकी जानकारी देना प्राथमिकता होनी चाहिए। संभावित यौन उत्पीड़न की स्थिति में जल्द चिकित्सा सहायता लेना महत्वपूर्ण है। चिकित्सकीय जांच चोटों के उपचार, गर्भावस्था और संक्रमण से संबंधित देखभाल तथा परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक नमूनों के संग्रह में सहायक हो सकती है।
याददाश्त अधूरी होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि कोई अपराध हुआ है या नहीं हुआ है। शराब और कई दवाएं स्मृति को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए ऐसी परिस्थितियों का मूल्यांकन प्रशिक्षित चिकित्सा और जांच पेशेवरों द्वारा किया जाना चाहिए।
इलाज और दुरुपयोग के बीच फर्क समझना जरूरी
केटामाइन को केवल ‘खतरनाक नशीली दवा’ कहना भी सही नहीं होगा। आधुनिक चिकित्सा में इसका महत्वपूर्ण स्थान है। अस्पतालों और नियंत्रित चिकित्सा परिस्थितियों में प्रशिक्षित विशेषज्ञ इसकी मात्रा, रक्तचाप, हृदय गति, चेतना और अन्य महत्वपूर्ण संकेतों की निगरानी करते हैं।
खतरा मुख्यतः तब बढ़ता है जब इसे बिना चिकित्सकीय निगरानी लिया जाए, अज्ञात मात्रा में इस्तेमाल किया जाए, बार–बार नशे के लिए लिया जाए या शराब तथा दूसरी दवाओं के साथ मिलाया जाए। मरीजों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि केटामाइन किसी उपचार के लिए दी जा रही है तो डॉक्टर को अपनी सभी दवाओं, शराब या अन्य पदार्थों के सेवन और पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं की पूरी जानकारी दें। उपचार की मात्रा स्वयं न बढ़ाएं और किसी दूसरे व्यक्ति की दवा कभी न लें।
केटामाइन एक उपयोगी औषधि है, लेकिन ‘चिकित्सकीय रूप से उपयोगी’ होने का अर्थ ‘हर परिस्थिति में सुरक्षित’ होना नहीं है। सही मरीज, सही मात्रा, सही परिस्थिति और चिकित्सकीय निगरानी—इन चार बातों का पालन ही इसके लाभ और जोखिम के बीच सबसे महत्वपूर्ण अंतर पैदा करता है।

