रोबोटिक्स से बदलती चिकित्सा: सटीक सर्जरी से पुनर्वास तक नई संभावनाएं
Medical robotics has transitioned from a specialized niche in minimally invasive abdominal surgery into a fundamental accelerator across virtually every major branch of medicine. Driven by advancements in artificial intelligence (AI), computer vision, micro-actuation, haptics, and 5G/6G low-latency telecommunication, robotics is scaling quality, speed, and precision in acute, chronic, and surgical care.
-ज्योति रावत –
चिकित्सा विज्ञान में रोबोटिक तकनीक तेजी से उपचार के तौर-तरीकों को बदल रही है। सर्जरी से लेकर कैंसर की जांच, मस्तिष्क और रीढ़ के ऑपरेशन, घुटने-कूल्हे के प्रत्यारोपण तथा स्ट्रोक के बाद पुनर्वास तक रोबोटिक प्रणालियां डॉक्टरों को अधिक सटीकता से काम करने में सहायता कर रही हैं। लेकिन मरीजों के लिए यह समझना भी उतना ही जरूरी है कि रोबोट स्वयं ऑपरेशन नहीं करता। अधिकांश रोबोटिक सर्जरी में नियंत्रण प्रशिक्षित सर्जन के हाथ में ही रहता है और मशीन उसके निर्देशों को अत्यंत सूक्ष्म गतिविधियों में बदलती है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता, त्रि-आयामी उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरों, सूक्ष्म संवेदकों और बेहतर डिजिटल संपर्क के मेल से रोबोटिक्स का दायरा लगातार बढ़ रहा है। इसके बावजूद हर बीमारी में रोबोटिक तकनीक आवश्यक या पारंपरिक अथवा लैप्रोस्कोपिक उपचार से बेहतर हो, यह जरूरी नहीं है। सही विकल्प मरीज की बीमारी, उसकी अवस्था, ऑपरेशन के प्रकार, सर्जन के अनुभव और उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर तय होता है।
सर्जरी में छोटे चीरे और अधिक सटीकता
दा विंची और ह्यूगो जैसी रोबोट-सहायित प्रणालियों का इस्तेमाल मूत्र रोग, स्त्री रोग, सामान्य सर्जरी तथा कुछ कैंसर ऑपरेशनों में किया जा रहा है। सर्जन एक नियंत्रण प्रणाली के माध्यम से रोबोटिक उपकरणों को संचालित करता है।
रोबोटिक सर्जरी में अक्सर बहुत छोटे चीरे लगाए जा सकते हैं। शरीर के अंदर लगे कैमरे से सर्जन को ऑपरेशन वाले क्षेत्र का बड़ा और त्रि-आयामी दृश्य मिलता है। उपकरणों के छोटे और लचीले सिरे संकरी जगहों में भी सूक्ष्म गतिविधियां कर सकते हैं और हाथ के स्वाभाविक कंपन को कम करने में मदद करते हैं।
चुनिंदा ऑपरेशनों में इससे रक्तस्राव, दर्द और अस्पताल में रहने की अवधि कम हो सकती है तथा मरीज अपेक्षाकृत जल्दी सामान्य गतिविधियों में लौट सकता है। लेकिन रिकवरी की अवधि सभी मरीजों में समान नहीं होती। ऑपरेशन की जटिलता और मरीज की उम्र तथा स्वास्थ्य भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कैंसर की जांच में रोबोटिक्स
कैंसर में शुरुआती पहचान उपचार की सफलता की संभावना बढ़ाती है। फेफड़ों में बहुत छोटे और दूर स्थित संदिग्ध नोड्यूल तक पहुंचना कई बार कठिन होता है। रोबोटिक ब्रोंकोस्कोपी जैसी नई तकनीकें चिकित्सक को फेफड़ों की छोटी श्वसन नलिकाओं के भीतर अधिक नियंत्रित ढंग से पहुंचने और संदिग्ध हिस्से से बायोप्सी लेने में मदद करती हैं।
प्रोस्टेट कैंसर में एमआरआई और अल्ट्रासाउंड से प्राप्त तस्वीरों को मिलाकर संदिग्ध क्षेत्र को अधिक सटीकता से लक्षित किया जा सकता है। इससे डॉक्टर को उस हिस्से से नमूना लेने में सहायता मिलती है जहां कैंसर की आशंका अधिक है।
पाचन तंत्र की जांच में कैप्सूल एंडोस्कोपी और चुंबकीय नियंत्रण वाली कुछ प्रणालियों पर भी काम हो रहा है। हालांकि इन तकनीकों की उपलब्धता और उपयोग अलग-अलग अस्पतालों तथा देशों में भिन्न है और ये हर स्थिति में सामान्य एंडोस्कोपी या बायोप्सी का विकल्प नहीं हैं।
मस्तिष्क और रीढ़ की सर्जरी
मस्तिष्क और रीढ़ की सर्जरी में अत्यधिक सटीकता जरूरी होती है। रोबोटिक और कंप्यूटर-नेविगेशन प्रणालियां सर्जन को पहले से निर्धारित मार्ग पर उपकरण पहुंचाने और प्रत्यारोपण लगाने में सहायता कर सकती हैं।
डीप-ब्रेन स्टिम्यूलेशन जैसी प्रक्रियाओं में इलेक्ट्रोड को मस्तिष्क के निर्धारित हिस्से तक पहुंचाना होता है। इसी तरह रीढ़ की सर्जरी में स्क्रू लगाने के लिए रोबोटिक नेविगेशन सर्जन को सही दिशा और कोण निर्धारित करने में सहायता कर सकता है।
इससे कुछ प्रक्रियाओं में सटीकता बढ़ सकती है और बार-बार एक्स-रे की आवश्यकता घटने से चिकित्सा दल के विकिरण संपर्क में भी कमी आ सकती है। फिर भी जटिलताएं पूरी तरह समाप्त नहीं होतीं और अंतिम परिणाम सर्जन के प्रशिक्षण तथा मरीज की स्थिति पर भी निर्भर करता है।
घुटने और कूल्हे के प्रत्यारोपण में मदद
घुटने और कूल्हे के प्रत्यारोपण में माको और रोसा जैसी रोबोट-सहायित प्रणालियों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। ऑपरेशन से पहले मरीज की हड्डियों की संरचना का डिजिटल नक्शा तैयार किया जा सकता है। इससे सर्जन प्रत्यारोपण की स्थिति और हड्डी काटने की सीमा की योजना अधिक सटीकता से बना सकता है।
कुछ प्रणालियों में निर्धारित सीमा से बाहर उपकरण जाने पर मशीन सर्जन को रोकने या चेतावनी देने में सहायता करती है। इससे हड्डी की कटाई और प्रत्यारोपण की स्थिति अधिक सटीक हो सकती है।
लेकिन मरीज को यह नहीं मानना चाहिए कि केवल “रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण” होने से परिणाम निश्चित रूप से बेहतर होगा। प्रत्यारोपण की गुणवत्ता, सर्जन का अनुभव, मरीज का वजन, मांसपेशियों की स्थिति और ऑपरेशन के बाद फिजियोथेरेपी भी परिणाम में महत्वपूर्ण हैं।
हृदय रोग में रोबोटिक तकनीक
हृदय और रक्तवाहिकाओं में कैथेटर आधारित उपचार के लिए भी रोबोटिक तकनीक विकसित की गई है। कुछ प्रणालियां डॉक्टर को नियंत्रित कंसोल से गाइडवायर और कैथेटर संचालित करने देती हैं।
इनका एक संभावित लाभ यह है कि डॉक्टर को एक्स-रे स्रोत के बिल्कुल पास लंबे समय तक खड़ा नहीं रहना पड़ता, जिससे उसके विकिरण संपर्क में कमी आ सकती है। रोबोटिक नियंत्रण कैथेटर और उपकरणों की सूक्ष्म गति में भी मदद कर सकता है।
हालांकि हृदय रोग में रोबोटिक हस्तक्षेप अभी हर अस्पताल में उपलब्ध सामान्य तकनीक नहीं है और इसका इस्तेमाल मरीज तथा प्रक्रिया के चयन पर निर्भर करता है।
स्ट्रोक और लकवे के बाद पुनर्वास
रोबोटिक्स का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र पुनर्वास चिकित्सा है। स्ट्रोक, रीढ़ की चोट या अन्य तंत्रिका संबंधी रोगों के कारण चलने-फिरने की क्षमता खो चुके मरीजों के लिए रोबोटिक एक्सोस्केलेटन और चाल प्रशिक्षण उपकरण विकसित किए गए हैं।
ये उपकरण मरीज को नियंत्रित और बार-बार एक जैसी गतिविधियां करने में सहायता देते हैं। इससे फिजियोथेरेपिस्ट मरीज को लंबे समय तक व्यवस्थित अभ्यास करा सकता है। कुछ प्रणालियां मरीज की मांसपेशियों या गतिविधियों से प्राप्त संकेतों के आधार पर आवश्यक सहायता भी प्रदान करती हैं।
इन उपकरणों का उद्देश्य शरीर की खो चुकी क्षमता को जादुई ढंग से वापस लाना नहीं, बल्कि पुनर्वास को अधिक व्यवस्थित और गहन बनाना है। हर मरीज में परिणाम अलग हो सकते हैं और इन्हें प्रशिक्षित पुनर्वास विशेषज्ञ की देखरेख में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
अस्पतालों में दवा और सामान पहुंचा रहे रोबोट
रोबोटिक्स केवल ऑपरेशन थिएटर तक सीमित नहीं है। कई आधुनिक अस्पतालों में स्वचालित मोबाइल रोबोट दवाएं, भोजन, लिनन और प्रयोगशाला नमूने एक विभाग से दूसरे विभाग तक पहुंचाते हैं। इससे कर्मचारियों का समय बच सकता है और नियमित परिवहन कार्य अधिक व्यवस्थित हो सकते हैं।
कुछ अस्पताल कमरों और निर्धारित क्षेत्रों के विसंक्रमण में पराबैंगनी प्रकाश वाली स्वचालित मशीनों का भी इस्तेमाल करते हैं। अस्पताल की फार्मेसी में स्वचालित प्रणालियां दवाओं के भंडारण और वितरण में मानवीय गलतियों को कम करने में सहायक हो सकती हैं।
क्या रोबोटिक सर्जरी हमेशा बेहतर है?
नहीं। यह मरीजों के लिए सबसे महत्वपूर्ण तथ्य है। कई ऑपरेशनों में रोबोटिक तकनीक उपयोगी हो सकती है, लेकिन कुछ मामलों में सामान्य लैप्रोस्कोपिक या पारंपरिक सर्जरी समान रूप से प्रभावी हो सकती है। किसी नई या महंगी तकनीक का उपलब्ध होना अपने आप में यह प्रमाण नहीं है कि वही मरीज के लिए सर्वोत्तम विकल्प है।
मरीज को ऑपरेशन से पहले अपने सर्जन से पूछना चाहिए कि रोबोटिक तकनीक उसके विशेष मामले में क्या अतिरिक्त लाभ देगी, क्या इसके परिणाम सामान्य सर्जरी से बेहतर साबित हुए हैं, सर्जन ने उस विशेष रोबोटिक प्रक्रिया के कितने ऑपरेशन किए हैं और यदि ऑपरेशन के दौरान रोबोटिक प्रक्रिया को सामान्य सर्जरी में बदलना पड़े तो क्या व्यवस्था है।
भारत में कितना खर्च?
भारत में रोबोटिक सर्जरी की लागत अस्पताल, शहर, बीमारी, ऑपरेशन की जटिलता और इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के अनुसार काफी अलग-अलग हो सकती है। कई मामलों में इसका खर्च सामान्य लैप्रोस्कोपिक या पारंपरिक सर्जरी से अधिक होता है।
मोटे तौर पर विभिन्न रोबोट-सहायित प्रक्रियाओं पर करीब डेढ़ लाख रुपये से लेकर कई लाख रुपये तक खर्च हो सकता है। कैंसर की कुछ जटिल सर्जरी में खर्च इससे भी अधिक हो सकता है। इसलिए इंटरनेट पर उपलब्ध किसी एक “औसत कीमत” को वास्तविक खर्च मानना उचित नहीं है।
मरीज को अस्पताल से लिखित अनुमान लेना चाहिए और यह भी पूछना चाहिए कि इसमें सर्जन की फीस, रोबोटिक उपकरण, अस्पताल में भर्ती, दवाएं, जांच, आईसीयू और अन्य खर्च शामिल हैं या अलग से लिए जाएंगे। स्वास्थ्य बीमा में रोबोटिक प्रक्रिया शामिल है या नहीं, इसकी पुष्टि भी पहले कर लेना बेहतर है।
भविष्य: दूर बैठे विशेषज्ञ कर सकेंगे ऑपरेशन?
उच्च गति वाले संचार नेटवर्क और रोबोटिक प्रणालियों के मेल से दूरस्थ सर्जरी पर तेजी से शोध और परीक्षण हो रहे हैं। भविष्य में इसका फायदा उन क्षेत्रों को मिल सकता है जहां विशेषज्ञ सर्जन उपलब्ध नहीं हैं।
लेकिन लंबी दूरी की रोबोटिक सर्जरी को व्यापक रूप से लागू करने के लिए केवल तेज इंटरनेट पर्याप्त नहीं है। नेटवर्क की विश्वसनीयता, समय-विलंब, साइबर सुरक्षा, मरीज की सुरक्षा, प्रशिक्षित स्थानीय चिकित्सा दल और आपात स्थिति में तत्काल वैकल्पिक सर्जरी की व्यवस्था भी जरूरी होगी।
डॉक्टर का विकल्प नहीं, डॉक्टर की क्षमता बढ़ाने वाली तकनीक
चिकित्सा रोबोटिक्स की सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि वर्तमान रोबोट डॉक्टर का स्थान नहीं लेते। वे सर्जन, चिकित्सक और पुनर्वास विशेषज्ञ को अधिक नियंत्रित तथा सटीक तरीके से काम करने में सहायता करते हैं। रोबोटिक तकनीक भविष्य की चिकित्सा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है, लेकिन मरीज के लिए मशीन के नाम से अधिक महत्वपूर्ण है सही निदान, उचित उपचार का चयन, अनुभवी डॉक्टर और ऐसा अस्पताल जहां किसी जटिलता से निपटने की पूरी व्यवस्था मौजूद हो।
इसलिए किसी मरीज को केवल “रोबोटिक” शब्द से प्रभावित होकर उपचार नहीं चुनना चाहिए। सही सवाल यह है—“मेरी बीमारी और मेरी स्थिति में इस तकनीक से मुझे वास्तव में क्या अतिरिक्त लाभ मिलेगा?”
