आपदा/दुर्घटना

आपदा प्रबंधन में सहयोग बढ़ाएंगे उत्तराखंड और हिमाचल

हिमाचल आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ने उत्तराखंड की आपदा प्रबंधन प्रणाली का लिया जायजा

 

देहरादून, 9 अक्टूबर। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए आपसी समन्वय और सहयोग को और मजबूत करेंगे। हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष दीपक राठौर ने शुक्रवार को उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) का भ्रमण कर यहां संचालित आपदा पूर्व चेतावनी, राहत एवं बचाव तथा निगरानी प्रणालियों की जानकारी ली। उन्होंने विशेष रूप से भूस्खलन, अतिवृष्टि और हिमनद झीलों के फटने से आने वाली बाढ़ के खतरों से निपटने के लिए संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता बताई।

राठौर ने कहा कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियां तथा प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतियां लगभग समान हैं। दोनों राज्यों की सीमाएं भी आपस में जुड़ी हैं। ऐसे में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अनुभवों, तकनीक और संसाधनों का आदान-प्रदान बेहतर परिणाम दे सकता है। उन्होंने दोनों राज्यों के बीच समन्वित रणनीति विकसित करने पर जोर दिया।

भ्रमण के दौरान राठौर ने उत्तराखंड की आपदा प्रबंधन संबंधी इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम (आईआरएस), मानक संचालन प्रक्रियाओं तथा तहसील स्तर पर गठित त्वरित प्रतिक्रिया दलों की कार्यप्रणाली की जानकारी ली। उन्होंने इन दलों की संरचना और आपात स्थितियों में त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था की सराहना की।

उन्होंने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र का निरीक्षण कर चारधाम यात्रा, विशेषकर केदारनाथ यात्रा की वास्तविक समय में निगरानी की व्यवस्था को समझा। इस दौरान उन्हें मौसम संबंधी चेतावनियों, यात्रा मार्गों की स्थिति, भीड़ प्रबंधन और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की जानकारी दी गई। उन्होंने विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आपदा संबंधी चेतावनियों को समयबद्ध ढंग से आम जनता तक पहुंचाने की प्रक्रिया तथा भूदेव एप की कार्यप्रणाली का भी अवलोकन किया।

राठौर ने हिमनद झीलों के फटने से संभावित बाढ़ के खतरों को कम करने के लिए उत्तराखंड में किए जा रहे प्रयासों में विशेष रुचि दिखाई। उन्होंने इस क्षेत्र में दोनों हिमालयी राज्यों के बीच तकनीकी सहयोग बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की।

इस अवसर पर सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने प्राधिकरण की गतिविधियों, तकनीकी नवाचारों और आपदा प्रबंधन संबंधी संस्थागत व्यवस्थाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य में आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए तकनीक और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

इस दौरान अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रकाश चंद्र, डीआईजी राजकुमार नेगी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश कुमार पुनेठा, यूएलएमएमसी के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार, यूप्रिपेयर के अपर परियोजना निदेशक एसके बिरला, डॉ. पीडी माथुर तथा प्राधिकरण के विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

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