बदरीनाथ धाम के कपाट 16 नवंबर को रात 9:37 बजे होंगे बंद
12 नवंबर से शुरू होंगी पंच पूजाएं, 17 नवंबर को शीतकालीन प्रवास के लिए प्रस्थान करेंगे उद्धव और कुबेर

बदरीनाथ/ज्योतिर्मठ, 20 अक्टूबर (कपरुवाण)। विश्व प्रसिद्ध श्री बदरीनाथ धाम के कपाट इस वर्ष 16 नवंबर, सोमवार को रात्रि 9 बजकर 37 मिनट पर कर्क लग्न में शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। कपाट बंद होने से पहले 12 नवंबर से पांच दिवसीय पंच पूजाओं का आयोजन होगा। कपाट बंद होने के अगले दिन 17 नवंबर को भगवान उद्धव और कुबेर की उत्सव डोलियां तथा आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी अपने निर्धारित शीतकालीन प्रवास स्थलों के लिए प्रस्थान करेंगी। इसके साथ ही बदरीनाथ धाम की वर्ष 2026 की तीर्थयात्रा का औपचारिक समापन हो जाएगा।
विजयदशमी के अवसर पर मंगलवार को बदरीनाथ मंदिर परिसर में आयोजित समारोह में विधि-विधान और पंचांग गणना के बाद कपाट बंद होने की तिथि एवं समय की घोषणा की गई। बदरीनाथ धाम के रावल अमरनाथ नंबूदरी ने मंदिर समिति के पदाधिकारियों, धर्माधिकारियों, वेदपाठियों, तीर्थ पुरोहितों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति में कपाट बंद होने की तिथि घोषित की। इससे पहले धर्माधिकारी आचार्य स्वयंवर सेमवाल, वेदपाठी डॉ. रवीन्द्र भट्ट और आचार्य वाणी विलास डिमरी ने पूजा-अर्चना एवं पंचांग गणना के आधार पर शुभ मुहूर्त निर्धारित किया।
इस अवसर पर श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती एवं विजय कपरुवाण, सदस्य प्रह्लाद पुष्पवान, राजेन्द्र डिमरी, रजनीश भट्ट तथा मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने विजयदशमी के अवसर पर देश-विदेश के श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए आशा व्यक्त की कि कपाट बंद होने से पहले बड़ी संख्या में श्रद्धालु बदरीनाथ और केदारनाथ धाम सहित अन्य मंदिरों के दर्शन के लिए पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि कपाट बंद होने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशन में शीतकालीन तीर्थयात्रा को प्रोत्साहित किया जाएगा। समिति के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती और मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने यात्रा के सफल संचालन में सहयोग देने वाले सभी विभागों, संस्थाओं और स्थानीय संगठनों का आभार व्यक्त किया।
पंच पूजाओं का कार्यक्रम निर्धारित
बीकेटीसी के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने बताया कि बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने से पहले होने वाली पंच पूजाओं का कार्यक्रम भी निर्धारित कर दिया गया है।
12 नवंबर, गुरुवार: पंच पूजाओं का शुभारंभ भगवान गणेश की पूजा-अर्चना के साथ होगा। इसी दिन रात्रि में गणेश मंदिर के कपाट बंद किए जाएंगे।
13 नवंबर, शुक्रवार: आदि केदारेश्वर मंदिर और आदि गुरु शंकराचार्य मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद होंगे।
14 नवंबर, शनिवार: खड्ग और पुस्तकों का विधिवत पूजन किया जाएगा। इसके साथ ही मंदिर में वेद ऋचाओं का नियमित वाचन बंद हो जाएगा।
15 नवंबर, रविवार: माता लक्ष्मी को कढ़ाई भोग अर्पित किया जाएगा तथा उन्हें भगवान बदरीविशाल के गर्भगृह में विराजमान होने का निमंत्रण दिया जाएगा।
16 नवंबर, सोमवार: पंच पूजाओं के अंतिम दिन माता लक्ष्मी भगवान बदरीविशाल के गर्भगृह में विराजमान होंगी। भगवान उद्धव और कुबेर की उत्सव मूर्तियां मंदिर परिसर में लाई जाएंगी। इसके बाद निर्धारित धार्मिक परंपराओं और अनुष्ठानों के साथ रात्रि 9 बजकर 37 मिनट पर बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।
17 नवंबर को पांडुकेश्वर और ज्योतिर्मठ के लिए प्रस्थान
कपाट बंद होने के अगले दिन 17 नवंबर, मंगलवार को भगवान उद्धव और कुबेर की उत्सव डोलियां बदरीनाथ धाम से योग बदरी मंदिर, पांडुकेश्वर के लिए प्रस्थान करेंगी। शीतकाल में भगवान उद्धव और कुबेर की पूजा पांडुकेश्वर में ही संपन्न होगी।
इसी दिन गरुड़ जी ज्योतिर्मठ के लिए प्रस्थान करेंगे। बदरीनाथ धाम के रावल और नायब रावल आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी के साथ पांडुकेश्वर में रात्रि विश्राम करेंगे। अगले दिन 18 नवंबर, बुधवार को आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी ज्योतिर्मठ स्थित श्री नृसिंह मंदिर पहुंचेगी और वहां शीतकाल के लिए विराजमान होगी। इसके साथ ही बदरीनाथ धाम की वार्षिक यात्रा से संबंधित धार्मिक परंपराओं का समापन हो जाएगा।
वर्ष 2027 की भंडार व्यवस्था के लिए पगड़ी भेंट
विजयदशमी के अवसर पर मंदिर समिति की ओर से आगामी यात्रा वर्ष 2027 के लिए बदरीनाथ धाम की पारंपरिक भंडार व्यवस्था के संचालन हेतु संबंधित हकहकूकधारियों को पगड़ी भेंट की गई। मेहता थोक से उमेश भट्ट और शिवम मेहता तथा कमदी-भंडारी थोक से महेंद्र भंडारी और जगदीश पंवार को पगड़ी प्रदान की गई। यह परंपरा बदरीनाथ धाम की ऐतिहासिक धार्मिक एवं व्यवस्थागत परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इससे पहले मंदिर परिसर में नवरात्रि और उर्वशी माता की पूजा-अर्चना का हवन-यज्ञ के साथ समापन किया गया। रावल, धर्माधिकारी, वेदपाठी और आचार्यों की उपस्थिति में संपन्न धार्मिक अनुष्ठानों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
केदारनाथ के कपाट 11 नवंबर को होंगे बंद
चारधाम यात्रा के अंतर्गत अन्य धामों के कपाट बंद होने की तिथियां भी घोषित की जा चुकी हैं। श्री केदारनाथ धाम के कपाट 11 नवंबर, बुधवार को भैयादूज के अवसर पर प्रातः 8 बजकर 30 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। इसी दिन यमुनोत्री धाम के कपाट भी बंद होंगे। गंगोत्री धाम के कपाट एक दिन पहले 10 नवंबर, मंगलवार को गोवर्धन पूजा के अवसर पर बंद किए जाएंगे। गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिर समितियों ने संबंधित तिथियों और समय की घोषणा की है।
बदरीनाथ में आयोजित समारोह में बीकेटीसी के पूर्व उपाध्यक्ष किशोर पंवार, पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल, पूर्व सदस्य भास्कर डिमरी, प्रोटोकॉल अधिकारी राकेश सेमवाल, मंदिर अधिकारी यदुवीर पुष्पवान, जगमोहन बर्त्वाल, संतोष तिवारी, पंडा पंचायत अध्यक्ष प्रवीण ध्यानी, उपाध्यक्ष सुधाकर बाबुलकर, पीतांबर मोल्फा, बाबा उदय सिंह, अतुल डिमरी, संजय तिवारी, राहुल नेगी और सत्येंद्र चौहान सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
समारोह में डिमरी पंचायत, ब्रह्मकपाल तीर्थ पुरोहित पंचायत, विभिन्न हकहकूकधारी संगठनों के प्रतिनिधि, मंदिर समिति के अधिकारी-कर्मचारी, बामणी और माणा क्षेत्र के श्रद्धालु तथा सैकड़ों तीर्थयात्रियों ने भाग लिया।

