ब्रह्मांड का नया रहस्य उजागर: तेजी से घूमते ब्लैक होल से क्यों झिलमिलाता है प्रकाश?

This study investigates viscously driven shock oscillations in the accretion disks of Kerr black holes to understand the origin of quasi-periodic oscillations (QPOs). Using a pseudo-potential approach, the research demonstrates that black hole spin strongly dictates QPO frequencies. While low-spin black holes primarily generate low-frequency QPOs, rapidly rotating black holes produce a broad spectrum spanning low to high frequencies, closely matching observations in black hole X-ray binaries. Additionally, the study establishes a clear correlation between QPO frequency and the power-law photon index for a $10M_\odot$ black hole, offering valuable insights into the complex dynamics of non-Keplerian accretion flows.
ब्रह्मांड का नया रहस्य उजागर: तेजी से घूमते ब्लैक होल से क्यों झिलमिलाता है प्रकाश?
–ज्योति रावत –
भारतीय वैज्ञानिकों के नेतृत्व में एक अंतरराष्ट्रीय शोध दल ने ब्लैक होल के एक बड़े रहस्य से पर्दा उठाया है। अंतरिक्ष विज्ञानियों ने अंततः यह पता लगा लिया है कि ब्रह्मांड की सबसे सघन वस्तु ‘ब्लैक होल’ जब अपनी धुरी पर बहुत तेजी से घूमती है, तो उसके आसपास मौजूद एक्स-रे प्रकाश में तेज झिलमिलाहट क्यों उत्पन्न होती है। यह महत्वपूर्ण खोज इन रहस्यमयी खगोलीय पिंडों और उनके आसपास के ऊर्जावान वातावरण को समझने की दिशा में एक मील का पत्थर मानी जा रही है।
क्या है प्रकाश की झिलमिलाहट का यह रहस्य? हम सभी जानते हैं कि ब्लैक होल का गुरुत्वाकर्षण इतना शक्तिशाली होता है कि प्रकाश भी इससे बचकर नहीं निकल सकता। लेकिन, जब ब्लैक होल के आसपास का पदार्थ (जिसे एक्रीशन प्रवाह कहा जाता है) अत्यधिक गति से ब्लैक होल के अंदर गिरता है, तो भारी मात्रा में ऊर्जा और एक्स-रे विकिरण पैदा होता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, इस एक्स-रे की चमक लगातार एक जैसी नहीं रहती। इसमें एक नियमित उतार-चढ़ाव या झिलमिलाहट होती है, जिसे विज्ञान की भाषा में ‘अर्ध-आवधिक दोलन’ (Quasi-Periodic Oscillations या QPO) कहा जाता है। पिछले अध्ययन केवल धीमी गति वाली झिलमिलाहट को ही स्पष्ट रूप से समझा पाते थे, लेकिन तेजी से होने वाले दोलनों का सटीक कारण अब तक खगोलविदों के लिए एक पहेली बना हुआ था।
ब्लैक होल के ‘स्पिन’ (घूमने) का पड़ता है सीधा: असर विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान, आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज (ARIES) के वैज्ञानिकों ने इस पहेली को सुलझा लिया है। शोध में पाया गया कि ब्लैक होल की ओर गिरने वाले पदार्थ में जब ‘चिपचिपाहट’ (आंतरिक घर्षण) एक निश्चित सीमा को पार कर जाती है, तो वहां उत्पन्न होने वाली शॉक वेव (झटके) अस्थिर होकर कांपने लगती हैं। इसी कंपन से प्रकाश में झिलमिलाहट होती है।
अध्ययन स्पष्ट करता है कि यदि ब्लैक होल धीरे घूम रहा है, तो पदार्थ की चिपचिपाहट इन झटकों को ब्लैक होल से दूर धकेल देती है, जिससे एक्स-रे में धीमी (कम आवृत्ति वाली) झिलमिलाहट होती है। इसके विपरीत, बहुत तेजी से घूमने वाले ब्लैक होल इन झटकों को अपने बेहद करीब खींच लेते हैं। इसके परिणामस्वरूप प्रकाश में अत्यधिक तेज और उच्च आवृत्ति वाली झिलमिलाहट पैदा होती है।
अत्याधुनिक कंप्यूटर सिमुलेशन से मिली सफलता : यह ऐतिहासिक शोध ARIES के वैज्ञानिक श्री सनित देबनाथ और डॉ. इंद्रनील चट्टोपाध्याय के नेतृत्व में किया गया। इस अंतरराष्ट्रीय टीम में पोलैंड के निकोलस कोपरनिकस एस्ट्रोनॉमिकल सेंटर और बरेली के एमजेपी रोहिलखंड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक भी शामिल थे। टीम ने एक विशेष कंप्यूटर सिमुलेशन का उपयोग किया, जो ब्लैक होल के आसपास पदार्थ की गति, ऊर्जा और द्रव्यमान के संरक्षण का बारीकी से ट्रैक रखता है।
हाल ही में खगोल विज्ञान की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘जर्नल ऑफ हाई एनर्जी एस्ट्रोफिजिक्स’ (JHEAP) में प्रकाशित यह अपनी तरह का पहला ऐसा संख्यात्मक अध्ययन है जिसमें सापेक्षतावादी (relativistic) नियमों और आंतरिक घर्षण का एक साथ उपयोग किया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह सफलता भविष्य में एक्स-रे बाइनरी सिस्टम और ब्लैक होल के व्यवहार को समझने के लिए नए दरवाजे खोलेगी।
प्रकाशन लिंक:
https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S2214404826001059

