भूगोल की अतिथि शिक्षिका डॉ. दीप्ति सेमवाल को युवा वैज्ञानिक पुरस्कार
श्रीनगर (गढ़वाल), 29 अक्टूबर। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग में कार्यरत अतिथि शिक्षिका डॉ. दीप्ति सेमवाल को उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) की ओर से युवा वैज्ञानिक पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्हें यह सम्मान 25 और 26 अक्टूबर को आयोजित 21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन में जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट शोध प्रस्तुति के लिए प्रदान किया गया।
डॉ. दीप्ति सेमवाल ने सम्मेलन में पृथ्वी विज्ञान संकाय के अंतर्गत ‘जैविक संसाधनों का स्थानिक वितरण एवं सामुदायिक सहभागिता’ विषय पर अपना शोध प्रस्तुत किया। उनके शोध में जैविक संसाधनों के भौगोलिक वितरण और उनके संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भागीदारी के महत्व को रेखांकित किया गया। पृथ्वी विज्ञा

न संकाय के अंतर्गत भूगोल, भूविज्ञान, भू-आकृति विज्ञान, हिमनद भू-आकृति विज्ञान और भूभौतिकी सहित विभिन्न विषयों की शोध प्रस्तुतियों में डॉ. सेमवाल को इस पुरस्कार के लिए चुना गया।
रुद्रप्रयाग जिले के दूरस्थ गांव उथिंड की निवासी डॉ. दीप्ति सेमवाल ने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से भूगोल विषय में पीएचडी की है। उन्होंने जैव भूगोल के अंतर्गत ‘गढ़वाल क्षेत्र का जैव भौगोलिक प्रादेशीकरण’ विषय पर प्रोफेसर मोहन सिंह पंवार के निर्देशन में अपना शोध कार्य पूरा किया है।
सम्मेलन में प्रस्तुत शोध पत्रों के मूल्यांकन के लिए गठित विशेषज्ञ समिति में देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक शामिल थे। इनमें प्रोफेसर हरीश कर्नाटक, प्रोफेसर कमल पांडे, भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (इसरो) तथा भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिक शामिल थे। विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों में प्रस्तुत शोध पत्रों का मूल्यांकन किया।
दो दिवसीय सम्मेलन में इस वर्ष कुल 261 प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इनमें 165 महिला और 96 पुरुष शोधार्थी शामिल थे। सम्मेलन की विभिन्न श्रेणियों में कुल 36 युवा वैज्ञानिक पुरस्कार प्रदान किए गए। इनमें 16 महिला और 20 पुरुष शोधार्थियों को उत्कृष्ट शोध प्रस्तुतियों के लिए सम्मानित किया गया।
डॉ. दीप्ति सेमवाल की इस उपलब्धि को गढ़वाल विश्वविद्यालय के साथ ही रुद्रप्रयाग जिले के लिए भी गौरवपूर्ण माना जा रहा है। विशेष रूप से दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्र से निकलकर वैज्ञानिक अनुसंधान में उनकी सफलता उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने वाली युवा प्रतिभाओं के लिए प्रेरणादायक है।

