न्यायमूर्ति केशव चंद्र धूलिया निबंध प्रतियोगिता में वंदना कंडपाल प्रथम, अनमोल प्रीत कौर द्वितीय
**स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों पर आयोजित प्रतियोगिता में सात विश्वविद्यालयों के 48 विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा, पुरस्कार वितरण 16 नवंबर को**
देहरादून, 7 नवंबर। कर्मभूमि फाउंडेशन उत्तराखंड की ओर से आयोजित चौथी न्यायमूर्ति केशव चंद्र धूलिया निबंध प्रतियोगिता में सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय की वंदना कंडपाल ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उन्हें स्वर्ण पदक के साथ 25 हजार रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। डीबीएस ग्लोबल विश्वविद्यालय की अनमोल प्रीत कौर ने द्वितीय तथा उत्तरांचल विश्वविद्यालय की निधि मलिक ने तृतीय स्थान प्राप्त किया है।
कर्मभूमि फाउंडेशन के सचिव हिमांशु धूलिया ने प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा करते हुए बताया कि इसका आयोजन 23 अक्टूबर को देहरादून स्थित दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में किया गया था। प्रतियोगिता में उत्तराखंड के सात विश्वविद्यालयों के विधि स्नातक पाठ्यक्रमों के 48 विद्यार्थियों ने भाग लिया।
इस वर्ष प्रतियोगिता का विषय भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों के जीवन, योगदान और विचारधारा पर केंद्रित था। प्रतिभागियों को वर्ष 1857 से 1947 के बीच स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहे अपने किसी प्रिय नेता पर 2000 से 2500 शब्दों का निबंध लिखना था। निबंध में संबंधित नेता के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान, उनके नेतृत्व अथवा आंदोलन में भागीदारी तथा उनकी वैचारिक प्रतिबद्धताओं का उल्लेख करना आवश्यक था।
प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली वंदना कंडपाल को स्वर्ण पदक और 25 हजार रुपये, द्वितीय स्थान पर रहीं अनमोल प्रीत कौर को रजत पदक और 15 हजार रुपये तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली निधि मलिक को कांस्य पदक के साथ 10 हजार रुपये की नकद पुरस्कार राशि दी जाएगी।
फाउंडेशन के अनुसार विजेताओं का पुरस्कार वितरण समारोह 16 नवंबर को अपराह्न 2:45 बजे दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र, देहरादून में आयोजित किया जाएगा। समारोह में उत्तराखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक एवं भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी अनिल रतूड़ी मुख्य अतिथि होंगे और विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कृत करेंगे।
कर्मभूमि फाउंडेशन की इस प्रतियोगिता का उद्देश्य युवा विद्यार्थियों को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास, राष्ट्रीय आंदोलन के नेतृत्व और स्वतंत्रता सेनानियों के विचारों के अध्ययन एवं लेखन के लिए प्रोत्साहित करना है।

