भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल हुआ पनडुब्बी रोधी युद्धपोत ‘अमिनी’

नई दिल्ली / कोलकाता: गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई), कोलकाता द्वारा पूर्ण रूप से स्वदेशी तकनीक से डिजाइन और निर्मित पनडुब्बी रोधी युद्धपोत ‘अमिनी’ 5 नवंबर को आधिकारिक तौर पर भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया है। 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी घटकों से तैयार यह पोत केंद्र सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। यह रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू विनिर्माण इकोसिस्टम की बढ़ती मजबूती का एक शानदार उदाहरण पेश करता है।
इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (आईआरएस) के कड़े नियमों के तहत निर्मित ‘अमिनी’ भारतीय नौसेना के सबसे आधुनिक और मारक जलज्वारीय युद्धपोतों में से एक है। दुश्मनों के छक्के छुड़ाने के लिए इस पोत को अत्याधुनिक हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और उन्नत सोनार प्रणाली से लैस किया गया है। इसकी मदद से पानी के भीतर छिपे खतरों और पनडुब्बियों का सटीक पता लगाकर उन्हें आसानी से नष्ट किया जा सकेगा। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस पोत के शामिल होने से नौसेना की पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता, तटीय क्षेत्र की निगरानी और समुद्र में बारूदी सुरंग बिछाने की ताकत में भारी इजाफा होगा।

इस युद्धपोत का नाम लक्षद्वीप केंद्र शासित प्रदेश के ऐतिहासिक ‘अमिनी’ द्वीप के नाम पर रखा गया है। यह नया युद्धपोत दरअसल अपने पूर्ववर्ती पेट्या तृतीय श्रेणी के पनडुब्बी रोधी युद्धपोत ‘आईएनएस अमिनी’ की गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ा रहा है, जिसने नौसेना में लंबी सेवा देने के बाद साल 2002 में विदाई ली थी। पुराने पोत के नाम को नए और अत्याधुनिक स्वरूप में जीवित रखकर नौसेना ने अपनी विशिष्ट नामकरण परंपरा को कायम रखा है। ‘अमिनी’ की सफल डिलीवरी के साथ ही समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक बढ़त को एक नई मजबूती मिली है।
भारतीय नौसेना को इनकी आवश्यकता क्यों है?
हिंद महासागर में चीन और पाकिस्तान की बढ़ती नौसैनिक गतिविधियों तथा पानी के भीतर पनपने वाले अदृश्य खतरों से निपटने के लिए पनडुब्बी रोधी युद्धपोत (ASW) भारतीय नौसेना के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण रक्षा कवच हैं। भारत का अधिकांश व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति समुद्री मार्गों से होती है, जिनकी सुरक्षा के साथ-साथ लंबी तटरेखा की निगरानी करना और विमानवाहक पोतों को दुश्मन की पनडुब्बियों के हमलों से बचाना इन युद्धपोतों की मुख्य जिम्मेदारी है। ‘अमिनी’ जैसे आधुनिक जलज्वारीय (शैलो वॉटर) युद्धपोत उथले पानी में भी आसानी से काम कर सकते हैं और अपनी उन्नत सोनार प्रणाली के जरिए गहराई में एकदम शांत पड़ी दुश्मन पनडुब्बियों का भी सटीक पता लगा सकते हैं। एक बार लक्ष्य निर्धारित होने के बाद, ये पोत अपने अत्याधुनिक हल्के टॉरपीडो, पनडुब्बी रोधी रॉकेट लॉन्चर और डेप्थ चार्ज का उपयोग करके उसे तुरंत नष्ट कर देते हैं, और आवश्यकता पड़ने पर महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर रणनीतिक रूप से बारूदी सुरंगें बिछाकर दुश्मन की घुसपैठ को पूरी तरह से रोकते हुए भारत की समुद्री संप्रभुता को सुरक्षित रखते हैं।\
आईएनएस अमिनी का इतिहास और उसकी उपलब्धियां क्या थीं?
साल 2002 में सेवामुक्त हुआ पुराना ‘आईएनएस अमिनी’ (पेनेंट नंबर P75) भारतीय नौसेना का ‘अरनाला श्रेणी’ (सोवियत मूल की पेट्या-तृतीय क्लास) का एक प्रमुख पनडुब्बी रोधी युद्धपोत था। इस ऐतिहासिक पोत को 12 दिसंबर 1974 को औपचारिक रूप से नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया था। अपने लगभग 28 वर्षों के लंबे और शानदार सेवाकाल के दौरान, पुराने आईएनएस अमिनी ने भारतीय समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और पनडुब्बी रोधी अभियानों में एक मजबूत तटीय रक्षा पंक्ति के रूप में काम किया। शीत युद्ध के दौर और उसके बाद के दशकों में इस युद्धपोत ने हिंद महासागर में लगातार गश्त, व्यापारिक समुद्री मार्गों की निगरानी और नौसैनिक बेड़े के प्रशिक्षण में अपना बहुमूल्य योगदान दिया। अंततः 16 सितंबर 2002 को देश की उत्कृष्ट सेवा करने के बाद इस गौरवशाली पोत को पूरे सैन्य सम्मान के साथ सेवामुक्त कर दिया गया था। भारतीय नौसेना की अपनी ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित युद्धपोतों के नामों को संजोकर रखने की उसी गौरवशाली परंपरा के तहत ही अब आधुनिक तकनीक से बने नए ‘अमिनी’ युद्धपोत को यह नाम विरासत में दिया गया है।

