बैकडोर भर्ती का एक नमूना यहां भी

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देहरादून, 24 सितम्बर।बैकडोर भर्ती की आग से झुलस रहे प्रदेश में एक और मामला सामने आया है। यह मामला तब और गंभीर हो जाता है जब विधानसभा में उपनल के माध्यम से भर्ती किए गए 22 कार्मिकों को तत्काल प्रभाव से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया लेकिन यहां किसी की नजर नहीं जाती, लिहाजा कोई नोटिस भी नहीं ले पाया है। खासकर मेन स्ट्रीम मीडिया ने पूरे मामले को उसी तरह इग्नोर किया, जैसे विधानसभा भर्ती घोटाले में शुरुआत में रस्म अदायगी की थी।
ताजा जानकारी के अनुसार जनजाति निदेशालय में भी बैकडोर भर्ती का एक मामला प्रकाश में आया है। इस निदेशालय के अंतर्गत जनजाति कल्याण परिषद के लिए शासन से पांच पदों की स्वीकृति ली गई थी, जिन पर साक्षात्कार के बाद नियुक्ति होनी थी, लेकिन निदेशक संजय टोलिया ने कथित रूप से बिना पद विज्ञापित किए उपनल से पांच नाम मंगा कर उन्हें नौकरी दे दी। इन पांच पदों में ओएसडी-1, टाइपिस्ट-2 व चतुर्थ श्रेणी के 2 पद हैं। बताया जा रहा है कि संजय टोलिया सत्ता प्रतिष्ठान से करीबी रिश्ते हैं, लिहाजा उन्हें रोक टोक से छूट हासिल है। कम से कम इन नियुक्तियों से तो यही जाहिर हो रहा है।
सवाल यह उठ रहा है कि संविदा पर रखे गए उक्त पांच कार्मिकों के लिए कोई चयन प्रक्रिया तो अपनाई जानी चाहिए थी, पांच पदों के लिए 15 आवेदक ही बुलाए जाते और फिर टेस्ट लेकर उनको नियुक्ति दी जाती तो शायद यह सवाल नहीं उठता। विधानसभा में भी तो यही हुआ था। अपनी पसंद के 22 लोगों को बुलाकर उन्हें नौकरी दे दी गई, लिहाजा विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया किंतु जनजाति कल्याण परिषद में कौन पूछ सकता है?

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