आचार्यश्री विमर्श सागर भावलिंगी का ससंघ टीएमयू में भव्य मंगलप्रवेश

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रिद्धि-सिद्धि भवन में अपने आशीर्वचन में आचार्यश्री बोले, कर्म के संग-संग धर्म भी अनिवार्य

  • ख़ास बातें
    कुलाधिपति के संग-संग पूरा टीएमयू परिवार हुआ नतमस्तक
    जिनागम पंथ जयवंत हो… के जयकारों से गूंजा कैंपस
    जिनालय पहुंचते ही जीवीसी ने किया पाद प्रक्षालन
    रिद्धि-सिद्धि भवन में श्रावक-श्राविकाओं को दिया आशीर्वचन
    मुनिश्री विचिंत्य सागर बोले, टीएमयू में खुशियां रहें
    इंडोर स्टेडियम के संत भवन में आचार्यश्री ससंघ करेंगे प्रवास

प्रो0 श्याम सुंदर भाटिया

परमपूज्य सूरिगच्छाचार्य शुद्धोपयोगी संत श्री 108 विराग सागर जी महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य जिनागम पंथ प्रवर्तक, जीवन है पानी की बूंद महाकाव्य के मूल रचयिता, आहार जी के छोटे बाबा, विमर्श लिपि के सृजेता परमपूज्य भावलिंगी संत श्रमणाचार्य श्री 108 विमर्श सागर जी महामुनिराज ससंघ- 23 पिच्छी का तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में गाजे-बाजे के साथ भव्य मंगल प्रवेश हुआ। कुलाधिपति श्री सुरेश जैन, फर्स्ट लेडी श्रीमती वीना जैन, जीवीसी श्री मनीष जैन, उनकी धर्मपत्नी श्रीमती ऋचा जैन समेत पूरा जिनालय परिवार उनके चरणों में नतमस्तक रहा।

आचार्यश्री और उनके संघ के सबसे आगे जैन ध्वज, फिर श्राविकाएं कलश लिए कतारबद्ध चल रही थीं। जिनागम पंथ जयवंत हो… के जयकारों से कैंपस गूंजा उठा। आचार्यश्री ने ससंघ जिनालय में श्रीजी समेत तीर्थंकरों के विधि-विधान से दर्शन किए। इसके बाद आचार्यश्री ससंघ रिद्धि-सिद्धि भवन में विराजमान हुए। रिद्धि-सिद्धि भवन में आचार्यश्री का पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य कुलाधिपति परिवार को मिला। आर्यिका माताजी ने भजनों के बीच आचार्यश्री का पाद प्रक्षालन कराया। इस भव्य मंगल प्रवेश के मौके पर गाजियाबाद, अमरोहा, मुरादाबाद जैन समाज के साथ यूनिवर्सिटी की फैकल्टी ने भी आचार्यश्री को श्रीफल अर्पित किए। आचार्यश्री और उनका संघ संत भवन में तीन दिन प्रवास पर रहेगा। इस दौरान कैंपस में सुबह और शाम आस्था की बयार बहेगी।

आचार्य विमर्श सागर जी महाराज के श्रीमुख से मधुर वाणी सुनने का सौभाग्य सभी को प्राप्त हुआ। आचार्यश्री ने कहा, कर्म सिखाती टीएमयू। धर्म सिखाती टीएमयू। शिक्षा का आधार है ज्ञान सिखाती टीएमयू। जीवन है पानी की बूंद कब मिट जाए रे… भजन के साथ अपनी वाणी का शुभारम्भ किया। उन्होंने कहा, भगवान महावीर की वाणी भव्य जीवों को ही प्राप्त होती है। श्रीजी के संदेश को प्रचार-प्रसार करने में टीएमयू संग्लन है। कर्म का फल भगवान देते हैं, परन्तु कर्म के साथ धर्म की भी आवश्यकता है। कर्म और धर्म में संतुलन कायम रखना ही जीवन की वास्तविक चुनौती है। इसी के साथ जिनागम पंथ जयवंत हो… के उद्घोष के साथ अपनी मधुर वाणी को विराम दिया। संचालन दीदी कल्पना जैन ने किया। आचार्यश्री की मधुर वाणी से पूर्व उन्होंने परमपूज्य भावलिंगी संत श्रमणाचार्य श्री 108 विमर्श सागर जी महामुनिराज का जीवन परिचय देते हुए टीएमयू पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। अंत में मां जिनवाणी की स्तुति हुई।

इससे पूर्व मुनिश्री विचिंत्य सागर जी महाराज ने अपने मुखारविंद से कहा, जैन समाज में दिगंबर, श्वेतांबर, तेरह पंथ, बीस पंथ आदि अनेक पंथ हैं पर आचार्यश्री ने एक पंथ को आगे बढ़ाया है। वह है जिनागम पंथ। जिनेंद्र देव का बताया हुआ मार्ग ही जिनागम है। उन्होंने कहा, आचार्य कुंदकुंद स्वामी के महाकाव्यों के बाद जीवन है पानी की बूंद महाकाव्य के रचयिता आचार्य विमर्श सागर का पावन सानिध्य टीएमयू के लिए एक बड़ा सौभाग्य है। पूज्य गुरूदेव सभी जैन सूत्रों का एकीकरण करने के उद्देश्य से भ्रमण कर रहे हैं। इसी के साथ हर दिल में उल्लास रहे, टीएमयू में खुशियां रहें और अपनी मधुर ध्वनि में जीवन है पानी की बूंद भजन के साथ अपने प्रवचन को विराम दिया।

रिद्धि-सिद्धि भवन से गाजे-बाजे के साथ आचार्यश्री ने ससंघ संत भवन के लिए प्रस्थान किया। संत भवन में आचार्यश्री की आहारचर्या हुई, जिसमें फैकल्टी और स्टुडेंट्स ने बढ़चढ़ कर भाग लिया। इस मौके पर कुलाधिपति श्री सुरेश जैन, फर्स्ट लेडी श्रीमती वीना जैन, जीवीसी श्री मनीष जैन, श्रीमती ऋचा जैन, महानगर जैन सभा, मुरादाबाद के अध्यक्ष श्री अनिल जैन, रजिस्ट्रार डॉ. आदित्य शर्मा, एसोसिएट डीन प्रो. मंजुला जैन, निदेशक पीएंडडी श्री विपिन जैन, डायरेक्टर टिमिट डॉ. विपिन जैन, मेडिकल कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल डॉ. एसके जैन, सीसीएसआईटी के प्राचार्य प्रो. आरके द्विवेदी, सिविल इंजीनियरिंग के एचओडी प्रो. रवि जैन, पैरामेडिकल के प्रिंसिपल प्रो. नवनीत कुमार, फार्मेसी के एचओडी प्रो. एससी डिंडा, डॉ. विनीता जैन, डॉ. अर्पित जैन के संग-संग सैकड़ों श्रावक-श्राविकाओं आदि की भी गरिमामयी मौजूदगी रही।

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