उत्तराखंड में भारी वर्षा के कारण उत्पन्न आपदा की स्थिति से निपटने के प्रशासन हरकत में

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देहरादून 07 जुलाई  ( उहि ) । उत्तराखंड में भारी  वर्षा के कारण उत्पन्न आपदा की स्थिति से निपटने के लिए राज्य प्रशासन हरकत में आ  गया है। अवरुद्ध मार्गों को खोलने के ली विभिन्न स्थानों पर जेसीबी लगायी गयी हैं । सभी 13  जिलों में बाढ़ नियंत्रण केंद्र खोले गए हैं।  बांध बैराजों पर नज़र रखी जा रही है।  आपदा प्रबंधन तंत्र अलर्ट पर है।


सिंचाई विभाग के अन्तर्गत वर्ष 2022 मानसून काल में प्रत्येक जनपद में बाढ़ नियंत्रण कक्ष तथा देहरादून में केन्द्रीय बाढ़ नियंत्रण केन्द्र की स्थापना की गयी है। सिंचाई विभाग द्वारा 23 स्थानों पर नदियां तथा 14 स्थानों पर बैराज / डैम पर जलस्तर तथा डिस्चार्ज की निगरानी की जा रही है। सिंचाई विभाग द्वारा विभिन्न जिलों में 113 राजस्व बाढ़ चोकियों स्थापित की गयी है, बाढ़ चौकियों के माध्यम से ग्रामीणों को चेतावनी पहुंचाने की व्यवस्था की जाती है। इसके अतिरिक्त सम्बन्धित कर्मचारियों के पास ग्राम प्रधानों के मो० नम्बर व जनप्रतिनिधियों मो० नम्बर से आपदा स्थिति में तत्काल सूचना पहुॅचाई जाती है।

4 जुलाई को जनपद बागेश्वर के विकासखण्ड कपकोट के ग्राम कुँवारी में शम्भू नदी पर भू-स्खलन के कारण मलवा आ गया था, जिस कारण प्राकृतिक झील का निर्माण हो गया था। जो की 80 मीटर लम्बाई एवं 58 मीटर चौड़ाई में थी। आज (07 जुलाई तक झील से पानी के निकासी हेतु सिंचाई विभाग द्वारा 12 मीटर चौड़ाई में चैनल निर्माण कर दिया गया है। जिससे की 1050 क्यूसेक पानी का निकास हो रहा है। इसके अलावा अधिकारियों द्वारा झील पर नियमित निगरानी भी रखी जा रही है, अभी तक स्थिति खतरे से बाहर है।

इटरना – कालमन – कुखई मोटर मार्ग की खुदाई पी०एम०जी०एस०वाई०, खण्ड नरेन्द्रनगर द्वारा कराई जा रही थी। जिसका मलबा जाखन नदी पर सूर्यधार बैराज से 03 कि०मी० ऊपर की ओर प्राकृतिक झील का निर्माण हो गया था। सिंचाई खण्ड देहरादून एवं पी०एम०जी०एस०वाई० खण्ड नरेन्द्रनगर के अधिकारियों द्वारा स्थलीय निरीक्षण किया गया। आज 07. जुलाई तक मानवीय संसाधनों द्वारा झील के मुख को 01 मीटर गहराई तक खोल दिया गया है, प्राकृतिक झील में बड़े-बड़े बोल्डर होने के कारण इसे मजदूरों द्वारा हटाना सम्भव नहीं है। उक्त स्थल पर वन भूमि होने के कारण पोकलेन मशीन / जे०सी०बी० लाना सम्भव नहीं है, जिस हेतु सम्बन्धित विभागों से अनुमति लेने का प्रयास किया जा रहा है।

 

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