आपदा/दुर्घटना

आपदा से निपटने की तैयारियों का चेपड़ों में मॉक ड्रिल, राहत एवं बचाव कार्यों का किया अभ्यास

थराली, 2 जुलाई (हरेन्द्र बिष्ट)। मानसून के दौरान संभावित आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए प्रशासन ने गुरुवार को थराली विकासखंड के गत वर्ष आपदाग्रस्त रहे चेपड़ों गांव में व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन किया। इस दौरान विभिन्न विभागों और राहत-बचाव एजेंसियों ने आपदा की स्थिति में समन्वित कार्रवाई का अभ्यास किया।
मॉक ड्रिल का संचालन इंसीडेंट कमांडर एवं उपजिलाधिकारी थराली यशवीर सिंह तथा पर्यवेक्षक आईटीबीपी गौचर के निरीक्षक दीपक सिंह के निर्देशन में किया गया। अभ्यास में काल्पनिक स्थिति बनाई गई कि चेपड़ों गधेरे क्षेत्र में 72 घंटे से लगातार हो रही अतिवृष्टि और बादल फटने के कारण भूस्खलन हुआ, जिससे लगभग 13 आवासीय भवन पूर्ण एवं आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए तथा कई गौशालाएं भी प्रभावित हुईं।
सूचना मिलते ही इंसीडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम (आईआरएस) सक्रिय किया गया। इसके बाद एसएसबी, आईटीबीपी, एसडीआरएफ, डीडीआरएफ सहित अन्य विभागों की टीमों ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया।
अभ्यास के दौरान काल्पनिक आपदा में घायल हुईं पांच महिलाओं और तीन पुरुषों सहित कुल आठ घायलों को एंबुलेंस के माध्यम से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थराली पहुंचाने का अभ्यास किया गया। वहीं एक गंभीर घायल को हेलीकॉप्टर के माध्यम से हायर सेंटर रेफर किए जाने की प्रक्रिया का भी प्रदर्शन किया गया।
क्षतिग्रस्त भवनों से मलबा हटाने के लिए सिंचाई विभाग द्वारा श्रमिकों की व्यवस्था की गई। भूस्खलन से बाधित थराली-देवाल तथा थराली-जूनिधार मोटर मार्गों को लोक निर्माण विभाग द्वारा सुचारु करने का अभ्यास भी किया गया। सुरक्षा की दृष्टि से 25 प्रभावित व्यक्तियों को प्राथमिक विद्यालय चेपड़ों में बनाए गए राहत शिविर में ठहराने की कार्यवाही भी प्रदर्शित की गई।
मॉक ड्रिल में राजस्व विभाग, पुलिस, अग्निशमन सेवा, जल संस्थान, ग्रामीण निर्माण विभाग (आरडब्ल्यूडी), लोक निर्माण विभाग, बाल विकास, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, स्वास्थ्य विभाग, एंबुलेंस सेवा, वन विभाग, नगर पंचायत, पशुपालन विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
इसके अतिरिक्त देवाल और वांण क्षेत्र में भी बादल फटने की काल्पनिक सूचना के आधार पर राहत एवं बचाव कार्यों का मॉक ड्रिल अभ्यास किया गया, ताकि आपदा की स्थिति में विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके।

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