अंकिता हत्याकांड पर पुलिस ने दी सफाई, बताया जांच से सजा तक का घटनाक्रम
देहरादून, 15 अक्टूबर। उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में पुलिस की जांच और न्यायिक कार्यवाही को लेकर अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) डॉ. वी. मुरुगेशन ने गुरुवार को पुलिस मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस मामले में तीनों अभियुक्तों को घटना सामने आने के 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया गया था। विशेष जांच दल (एसआईटी) ने 88 दिनों में जांच पूरी कर न्यायालय में लगभग 500 पृष्ठों का आरोपपत्र दाखिल किया था। मामले में तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।
डॉ. मुरुगेशन ने बताया कि वर्ष 2022 में ऋषिकेश के निकट वनंतरा रिजॉर्ट में कार्यरत अंकिता भंडारी की हत्या के मामले को पुलिस ने अत्यंत गंभीरता से लिया था। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर तत्काल विशेष जांच दल गठित किया गया। इसकी कमान पुलिस उपमहानिरीक्षक स्तर की एक महिला आईपीएस अधिकारी को सौंपी गई थी।
उन्होंने बताया कि एसआईटी ने जांच के दौरान डिजिटल, तकनीकी, फॉरेंसिक और भौतिक साक्ष्यों को एकत्र किया। अभियुक्तों से पूछताछ के साथ ही गवाहों के बयान दर्ज किए गए और वैज्ञानिक जांच रिपोर्टों का विश्लेषण किया गया। इन साक्ष्यों के आधार पर विस्तृत आरोपपत्र तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
अपर पुलिस महानिदेशक के अनुसार, राज्य सरकार की ओर से मामले की त्वरित सुनवाई और प्रभावी अभियोजन के लिए आवश्यक कदम उठाए गए। पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की पैरवी के आधार पर कोटद्वार स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने 30 मई 2025 को पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई।
डॉ. मुरुगेशन ने बताया कि तीनों दोषी वर्तमान में जेल में बंद हैं और न्यायालय द्वारा सुनाई गई सजा भुगत रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस ने इस संवेदनशील मामले में वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर जांच पूरी कर दोषियों को सजा दिलाने के लिए प्रभावी कार्रवाई की।

