बीकेटीसी अध्यक्ष बहस की चुनौती देकर भागे इससे उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठे: गणेश गोदियाल
देहरादून, 14 जुलाई। उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने सार्वजनिक रूप से उन्हें बहस की चुनौती दी थी, जिसे कांग्रेस ने स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि निर्धारित समय पर सोमवार दोपहर 12:30 बजे कांग्रेस के नेता प्रेस क्लब देहरादून पहुंचे, लेकिन बीकेटीसी अध्यक्ष वहां नहीं आए।
गोदियाल ने कहा कि सार्वजनिक रूप से बहस की चुनौती देने के बाद निर्धारित समय पर उपस्थित न होना इस बात का संकेत है कि उनके पास अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस तथ्य नहीं थे। उन्होंने कहा कि इससे उनकी विश्वसनीयता पर स्वयं प्रश्नचिह्न लग गया है और यह संदेश गया है कि वे सच्चाई का सामना करने का साहस नहीं जुटा सके।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और बीकेटीसी के पदाधिकारी जानबूझकर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। गोदियाल ने कहा कि प्रमोद नौटियाल की नियुक्ति वर्ष 2003 में बीकेटीसी में हुई थी। वर्ष 2010 में भाजपा सरकार के दौरान उनके नियमितीकरण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया, जबकि वर्ष 2014 में शासन स्तर पर इसे स्वीकृति मिली। उन्होंने कहा कि नियमितीकरण का निर्णय शासन द्वारा लिया गया था।
गोदियाल ने कहा कि वास्तविक मुद्दा प्रमोद नौटियाल की नियुक्ति या नियमितीकरण नहीं, बल्कि बदरीनाथ धाम में दानराशि की कथित चोरी है। उन्होंने कहा कि यदि मंदिर की दानराशि की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं, सीसीटीवी फुटेज में नोटों की गड्डियां गायब होने के आरोप सामने आ रहे हैं और मंदिर समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं, तो इसकी जवाबदेही वर्तमान प्रबंधन और राज्य सरकार की बनती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की कार्यशैली रही है कि अपने शासनकाल में किसी गंभीर मामले के सामने आने पर वह जिम्मेदारी से बचने के लिए कांग्रेस नेताओं को विवाद में घसीटने का प्रयास करती है। उन्होंने कहा कि जनता अब तथ्यों को समझ रही है और जानती है कि जवाबदेही किसकी है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस किसी भी तथ्य या बहस से पीछे हटने वाली नहीं है। यदि बीकेटीसी अध्यक्ष में साहस है तो वे किसी भी सार्वजनिक मंच पर तथ्यों के आधार पर चर्चा करें। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हर सवाल का जवाब देने को तैयार है, लेकिन भाजपा को भी अपने कार्यकाल में हुई घटनाओं का जवाब जनता को देना होगा।
गोदियाल ने सवाल उठाया कि यदि उनके कार्यकाल में कोई अनियमितता हुई थी तो भाजपा की नौ वर्षों की पूर्ण बहुमत वाली सरकार ने अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की।
उन्होंने कहा कि देवभूमि की आस्था सर्वोपरि है। मंदिरों की दानराशि, व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं के विश्वास की रक्षा करना सरकार और मंदिर समिति की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।
