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रेलवे ने त्योहारी सीजन में यात्रियों की सुरक्षा के लिए बढ़ाये उपाय

यदि आपको रेलवे परिसर में कोई संदिग्ध वस्तु दिखाई देती है, तो कृपया निर्दिष्ट हेल्पलाइन का उपयोग करके रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को सूचित करें। जैसे-जैसे दिवाली नजदीक आ रही है, देश भर में रोशनी, खुशी और यात्रा में भी वृद्धि हो रही है। इसे देखते हुए आरपीएफ ने लाखों यात्रियों के लिए सुरक्षित और निर्बाध ट्रेन यात्रा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत सुरक्षा उपाय लागू किए हैं।

इस बार त्योहारों के मौसम में सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए, आरपीएफ ने रेलवे नेटवर्क पर आग के खतरों को कम करने और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एक व्यापक सुरक्षा अभियान शुरू किया है। रेलवे में विभिन्न हितधारकों के सहयोग के साथ, आरपीएफ के जागरूकता अभियान में छोटी पत्रिका के ज़रिए जानकारी साझा करना, आकर्षक पोस्टर लगाना, आकर्षक नुक्कड़ नाटक (नुक्कड़ नाटक) करना और सार्वजनिक घोषणाएं प्रसारित करना शामिल है। सभी यात्रियों तक पहुंचने के लिए सोशल, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को भी सक्रिय किया जा रहा है। किसी भी आग के जोखिम को रोकने के लिए, पोर्टेबल स्टोव (सिगड़ी) का उपयोग करने वाले विक्रेताओं और फेरीवालों की निगरानी के साथ-साथ निरंतर सामान निरीक्षण और पार्सल जांच 15 अक्टूबर 2024 से जारी है।

अब तक, इस सक्रिय अभियान के कारण 56 व्यक्तियों पर खतरनाक, ज्वलनशील वस्तुएं ले जाने के लिए रेलवे अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अतिरिक्त, ट्रेनों में धूम्रपान करने के लिए 550 लोगों को दंडित किया गया है और 2,414 व्यक्तियों पर सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (सीओटीपीए) के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है।

आरपीएफ के महानिदेशक श्री मनोज यादव ने कहा, “दिवाली और छठ खुशी और एकजुटता के त्योहार हैं और हमारे यात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।” उन्होंने कहा, “हम यात्रियों से सतर्क रहने और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए हमारे कर्मियों के साथ सहयोग करने का आग्रह करते हैं।”

दुर्घटनाओं और अपराधों को रोकने के मकसद से आरपीएफ ने रेल में यात्रा करने वाले यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक व्यापक सुरक्षा सलाह जारी की है-

  • ट्रेनों या स्टेशनों पर किसी भी पटाखे, ज्वलनशील वस्तु या संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति की सूचना तुरंत आरपीएफ/जीआरपी कर्मियों या रेलवे अधिकारियों को दें।
  • अपने क़ीमती सामान को अपने पास और निगरानी में रखें।
  • कम सामान के साथ यात्रा करें और अतिरिक्त सुरक्षा के लिए डिजिटल भुगतान चुनें।
  • सुनिश्चित करें कि बच्चों के साथ हमेशा वयस्क रहें।
  • घोषणाओं पर ध्यान दें और रेलवे कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करें।

सुरक्षा उपाय पूरी तरह पुख्ता

  • प्रमुख स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी बढ़ाई गई
  • ट्रेनों और स्टेशनों में आरपीएफ कर्मियों द्वारा गश्त तेज की गई
  • अपराध की प्रभावी रोकथाम के लिए राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) के साथ सहयोग
  • सामान और यात्रियों की नियमित जांच
  • यात्री किसी भी सुरक्षा संबंधी चिंता की रिपोर्ट रेल मदद वेब पोर्टल (https://railmadad.indianrailways.gov.in) या मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से या 139 हेल्पलाइन नंबर पर डायल कर सकते हैं।
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प्रयागराज महाकुम्भ 2025 में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए  रहे हैं प्रयास 

**नमामि गंगे मिशन के तहत विशेष स्वच्छता प्रयास महाकुंभ 2025 में स्वच्छता को पुनः परिभाषित करेंगे

**पर्यावरण अनुकूल स्वच्छता के लिए 28,000 से अधिक शौचालय स्थापित किए गए, इसके अलावा श्रद्धालुओं के लिए स्वच्छता और सुविधा बढ़ाने के लिए 20,000 सामुदायिक मूत्रालय और 37.75 लाख लाइनर बैग भी लगाए गए

 

प्रयागराज,18  जनवरी।  राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के अंतर्गत महाकुंभ 2025 के लिए 152.37 करोड़ रुपये की लागत से विशेष स्वच्छता प्रबंधन उपायों को क्रियान्वित किया जा रहा है। इन पहलों में आधुनिक प्रौद्योगिकी को पारंपरिक प्रथाओं के साथ जोड़ा गया है ताकि आयोजन के लिए स्वच्छ और दीर्घकालीन वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।

महाकुंभ 2025 के आयोजन की सर्वोच्च प्राथमिकताएं, गंगा की पवित्रता बनाए रखना, प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन और प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र बनाना हैं। इस आयोजन को पर्यावरणीय जिम्मेदारी के लिए एक मानक के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जिसमें पूरे मेला क्षेत्र में स्वच्छता बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।

मेला परिसर में 28,000 से ज़्यादा शौचालय स्थापित किए गए हैं, जिनमें सेप्टिक टैंक से लैस 12,000 फ़ाइबर रीइनफ़ोर्स्ड प्लास्टिक (एफआरपी) शौचालय और सोखने के गड्ढों वाले 16,100 प्रीफ़ैब्रिकेटेड स्टील शौचालय शामिल हैं। इन शौचालयों का उद्देश्य स्वच्छता सुनिश्चित करते हुए पर्यावरण के अनुकूल दृष्टिकोण को प्रोत्साहन देना है। इसके अतिरिक्त, पर्यावरण के अनुकूल प्रथाओं को बढ़ावा देते हुए श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक और स्वच्छ अनुभव सुनिश्चित करने के लिए 20,000 सामुदायिक मूत्रालय स्थापित किए गए हैं।

 

प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए आयोजन क्षेत्र में 20,000 कूड़ेदान लगाए गए हैं। इससे स्रोत पर ही अपशिष्ट को पृथक करने के साथ-साथ इसके पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण को प्रोत्साहन मिलेगा। अपशिष्ट संग्रह और निपटान को और अधिक सुव्यवस्थित करने के लिए, 37.75 लाख लाइनर बैग प्रदान किए गए हैं। यह सुव्यवस्थित अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली आयोजन क्षेत्र को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाएगी। महाकुंभ 2025 के लिए अपनाई गई रणनीतियाँ न केवल स्वच्छता के लिए उच्च मानक स्थापित करेंगी, बल्कि पर्यावरणीय सततता के लिए भारत की प्रतिबद्धता को भी प्रदर्शित करेंगी।

महाकुंभ 2025 सिर्फ़ एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता का एक आदर्श उदाहरण है। यह गंगा की पवित्रता बनाए रखने, दीर्घकालीन कचरा प्रबंधन और प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र बनाने की दिशा में सरकार के प्रयासों को दर्शाता है। इस पवित्र आयोजन के ज़रिए समाज में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता जागृत की जाएगी। महाकुंभ 2025 के लिए स्वच्छता की यह पहल न सिर्फ़ मौजूदा पीढ़ी को बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा देगी।

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आईआईपी देहरादून के सहयोग से फ्लू गैस सीओ2 से मेथनॉल उत्पादन के लिए स्वदेशी उत्प्रेरक विकसित 

देहरादून, 1 नवंबर। कार्बन उत्सर्जन कम करना जीवाश्म इंधन आधारित बिजली संयंत्र के सामने आने वाली महत्वपूर्ण चुनौतियों में से एक है। इसलिए, वैश्विक स्तर पर फ्ळू गैस से CO2 प्राप्त करना और इसे मूल्यवान ईंधन तथा रसायनों में परिवर्तित करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

एनटीपीसी की अनुसंधान एवं विकास शाखा, नेत्रा ने भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी), देहरादून के सहयोग से CO2 से मेथनॉल के हाइड्रोजनीकरण के लिए स्वदेशी उत्प्रेरक विकसित किया है। किसी भी रासायनिक संश्लेषण के लिए उत्प्रेरक एक आवश्यक घटक है। उत्प्रेरक के लक्षण वर्णन के बाद, उत्प्रेरक की लंबी अवधि वाले मात्रात्मक और गुणात्मक प्रदर्शन का मूल्यांकन विशेष रूप से डिजाइन किए गए 10 किलोग्राम प्रतिदिन वाले मेथनॉल पायलट संयंत्र में किया जा रहा है। यहां, 1 मोल CO2 और 3 मोल H2 फिक्स बेड डाउन फ्लो रिएक्टर में डाले गये।  इस उत्प्रेरक द्वारा उत्पादित मेथनॉल की शुद्धता 99 प्रतिशत से अधिक है।

एनटीपीसी ने ग्रीनहाउस गैस (जीएचजी) कटौती के प्रति अपनी प्रतिबद्धता में महत्वपूर्ण प्रगति की है और ऊर्जा क्षेत्र में टिकाऊ तौर तरीकों के लिए एक मानक स्थापित किया है। एनटीपीसी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी – एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड वैश्विक जलवायु कार्रवाई लक्ष्यों और 2070 तक कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने के लक्ष्य को प्राप्त करने की भारत की शपथ के अनुरूप, अपने कार्बन उत्सर्जन को कम करने के उद्देश्य की प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण पहल कर रही है।

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इसलिए सारा  विश्व ट्रम्प के पहले भाषण को सुनने और उनकी नीतियों को जानने के लिए लालायित था । आपने  इस  उद्घाटन भाषण में उन्होंने “अमेरिका फर्स्ट” की नीति का जोरदार समर्थन किया। यह भाषण न केवल अमेरिका के भीतर बल्कि वैश्विक स्तर पर भी बड़ी चर्चा का विषय बना। इस भाषण ने यह स्पष्ट कर दिया कि ट्रम्प प्रशासन का ध्यान अमेरिका के राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने पर होगा। उनके शब्दों में अमेरिका को एक नई दिशा में ले जाने का इरादा झलक रहा था, जिसमें वैश्विक सहयोग से अधिक आत्मनिर्भरता और आर्थिक राष्ट्रवाद पर जोर दिया गया।

ट्रम्प ने अपने भाषण में कहा कि उनकी प्राथमिकता अमेरिकी नौकरियों की सुरक्षा, उद्योगों के पुनरुत्थान और विदेशी व्यापार समझौतों पर पुनर्विचार होगी। उन्होंने खुले तौर पर यह ऐलान किया कि अमेरिका अब केवल अपने हितों को प्राथमिकता देगा और उन समझौतों से दूरी बनाएगा जो “अमेरिकी लोगों” के लिए नुकसानदायक हैं। यह भाषण उनकी “अमेरिका फर्स्ट” नीति का घोषणापत्र था, जिसने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल खड़े किए।

भारत के लिए इस भाषण और ट्रम्प की नीति के निहितार्थ बहुआयामी थे। सबसे पहले, “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत ट्रम्प प्रशासन ने H-1B वीज़ा जैसे कार्यक्रमों को सख्त बनाने की दिशा में कदम उठा ने का संकल्प जताया है।  यह नीति भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरेगी, क्योंकि अमेरिका में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों का एक बड़ा वर्ग इन वीज़ा कार्यक्रमों पर निर्भर है। इसके अलावा, अमेरिका के व्यापार समझौतों पर पुनर्विचार और आयात पर जोर ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को भी प्रभावित  करेगा।

हालांकि, ट्रम्प प्रशासन के कुछ फैसले भारत के लिए सकारात्मक भी हो सकते है । चीन के प्रति ट्रम्प का आक्रामक रुख भारत के लिए एक रणनीतिक अवसर साबित  ही सकता है। ट्रम्प ने चीन के साथ ट्रेड वार का संकेत और उसकी विस्तारवादी नीतियों को चुनौती  है। यह भारत के लिए एक अनुकूल स्थिति  हो सकती है, क्योंकि चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक सहयोग  बढ़ेगा। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका की बढ़ती भागीदारी और रक्षा समझौतों के माध्यम से भारत को सहायता दोनों देशों के संबंधों को और प्रगाढ़ बनायेगा।

इसके विपरीत, पिछले कार्यकाल में ट्रम्प का पेरिस जलवायु समझौते से बाहर निकलने का निर्णय भारत और अन्य देशों के लिए चिंता का विषय बना। यह कदम वैश्विक जलवायु परिवर्तन नीतियों के लिए एक बड़ा झटका था। भारत को न केवल अपने पर्यावरणीय लक्ष्यों को और मजबूत करना पड़ा, बल्कि विकसित और विकासशील देशों के बीच जलवायु वित्तपोषण को लेकर असमंजस की स्थिति भी उत्पन्न हुई।

ट्रम्प के भाषण का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरी विश्व व्यवस्था पर इसका व्यापक प्रभाव  पड़ेगा। बहुपक्षीय संस्थाओं जैसे WTO, संयुक्त राष्ट्र, और NATO को लेकर ट्रम्प की आलोचनात्मक सोच ने इन संस्थाओं की भूमिका को कमजोर किया। अमेरिका, जो दशकों से इन संस्थाओं का नेतृत्व करता आया था, अब एक अलगाववादी रुख अपनाता नजर आया। इससे वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव हुआ और अन्य महाशक्तियों जैसे चीन और रूस को अपनी भूमिका बढ़ाने का अवसर मिला।

यूरोप पर भी ट्रम्प के भाषण और नीतियों का गहरा प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने यूरोपीय देशों से NATO में अपने रक्षा खर्च बढ़ाने की मांग की, जिससे पारंपरिक अमेरिकी-यूरोपीय गठबंधन में दरारें पड़ने लगीं। इससे न केवल यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई, बल्कि वैश्विक सुरक्षा संतुलन भी कमजोर हुआ।

चीन-अमेरिका टकराव ने एशिया में एक नई भूराजनीतिक स्थिति पैदा की। ट्रम्प ने चीन के व्यापारिक और सैन्य विस्तार पर कड़ा रुख अपनाया, जिससे एशिया में शक्ति संतुलन बदलने लगा। इस स्थिति में भारत को एक बड़ी भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा। अमेरिका ने भारत के साथ अपने रक्षा और आर्थिक संबंधों को और मजबूत किया, जिससे क्षेत्र में भारत की स्थिति को बल मिला।

हालांकि, ट्रम्प की नीतियों ने भारत के लिए कई चुनौतियां भी पैदा कर सकती हैं । H-1B वीज़ा की सख्ती के कारण भारतीय आईटी क्षेत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसके अलावा, ट्रम्प का “अमेरिका फर्स्ट” दृष्टिकोण भारत के व्यापारिक हितों के लिए बाधा बन सकता था, क्योंकि उन्होंने भारतीय उत्पादों पर भी आयात शुल्क बढ़ाने का संकेत दिया।

कुल मिलाकर, ट्रम्प का उद्घाटन भाषण और उनकी नीतियां वैश्विक व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित  होगा। उन्होंने पारंपरिक सहयोगी संबंधों और वैश्विक नेतृत्व की भूमिका पर सवाल उठाए, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था में नई चुनौतियां और अवसर उत्पन्न हुए। भारत के लिए यह स्थिति जटिल लेकिन संभावनाओं से भरी है। जहां एक ओर चीन के प्रति ट्रम्प का आक्रामक रुख और रक्षा सहयोग लाभप्रद था, वहीं वीज़ा प्रतिबंध और व्यापारिक सख्ती ने भारत को नई रणनीतियों पर विचार करने के लिए मजबूर होगा।

ट्रम्प का “अमेरिका फर्स्ट” दृष्टिकोण एक नई प्रकार की वैश्विक व्यवस्था की शुरुआत होगी, जिसमें सहयोग की बजाय प्रतिस्पर्धा को प्राथमिकता दी गई। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस नीति का दीर्घकालिक प्रभाव भारत और विश्व व्यवस्था पर कैसा रहेगा।

 

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भूमध्यरेखीय आयनमंडल प्रक्रियाओं को समझने के लिए मॉडल विकसित

भारत के दक्षिणी छोर पर स्थल आधारित मैग्नेटोमीटर के माध्यम से पृथ्वी के आयनमंडल में तीव्र विद्युत धारा के एक बहुत ही संकीर्ण बैंड, “इक्वेटोरियल इलेक्ट्रोजेट” पर नज़र रखने वाले वैज्ञानिकों ने भूमध्यरेखीय विद्युतगतिकी प्रक्रियाओं को समझने के लिए एक आनुभविक (एम्पिरिकल) मॉडल विकसित किया है। यह मॉडल उपग्रह कक्षीय गतिशीलता, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम और अन्य उपग्रह संचार लिंक के साथ-साथ विद्युत पावर ग्रिड को भी प्रभावित कर सकता है।

पृथ्वी की भू-चुंबकीय भूमध्य रेखा (जियोमेग्नेटिक इक्वेटर) भारत के दक्षिणी सिरे के बहुत करीब से गुजरती है, जहाँ 100 kA के क्रम की एक अनोखी और बहुत तेज़ धारा इक्वेटोरियल इलेक्ट्रोजेट (ईईजे) पाई गई है और यह ऊपरी वायुमंडल में लगभग 105-110 किमी की ऊँचाई पर प्रवाहमान है। इस तीव्र धारा जेट के कारण, भूमध्य रेखा के पास भू-चुंबकीय क्षेत्र दस अंकों से लेकर कुछ सैकड़ों नैनो टेस्ला (एनटी) तक विशिष्ट रूप से बढ़ जाता है।

भू-चुंबकीय क्षेत्र में होने वाली वृद्धि के माध्यम से इस धारा की तीव्रता को मापने से आयनमंडलीय विद्युत क्षेत्र की भिन्नता के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है। इसलिए, ईईजे भिन्नताओं की समझ और मॉडलिंग के जरिए उपग्रह कक्षीय गतिशीलता, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम और अन्य उपग्रह संचार लिंक, विद्युत पावर ग्रिड आदि का आकलन करने में महत्वपूर्ण जानकारी हासिल हो सकेगी।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग एक स्वायत संस्थान भारतीय भू-चुम्बकत्व संरचना, (आईआईजी)  नवी मुंबई, नियमित रूप से इस ईईजे धारा को भू-आधारित मैग्नेटोमीटर के माध्यम से मापता है, जो भारत के दक्षिणी सिरे के बहुत करीब स्थित भूमध्यरेखीय स्टेशन तिरुनेलवेली पर स्थित है।

दो दशकों से अधिक समय से जारी वैज्ञानिक परीक्षणों से ईईजे में होने वाले बदलावों को समझते हुए, आईआईजी के वैज्ञानिकों ने एक एम्परियल मॉडल विकसित किया है जो ईईजे करंट का  बहुत सटीक अनुमान लगा सकता है। यह शोध स्पेस वेदर जनरल में प्रकाशित हुआ है।

यह मॉडल, जिसका नाम “भारतीय भूमध्यरेखीय इलेक्ट्रोजेट (आईईईजे) मॉडल” है, पहला आनुभविक मॉडल है जो भारतीय क्षेत्र पर भूमध्यरेखीय इलेक्ट्रोजेट की सटीक भविष्यवाणी कर सकता है। मॉडल का वेब इंटरफ़ेस उपयोगकर्ता को कभी भी सौर गतिविधि स्थितियों के लिए ईईजे का अनुकरण करने की सुविधा देता है; और एएससीआईआई और/या पीएनजी ग्राफ़िकल प्रारूपों में आउटपुट प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।

इस मॉडल का उपयोग अद्वितीय भूमध्यरेखीय आयनमंडलीय प्रक्रियाओं को समझने के लिए किया जा सकता है और इसका अनुप्रयोग जीएनएसएस-आधारित नेविगेशन/पोजिशनिंग, लंबी दूरी की पाइपलाइनों वाली ट्रांसमिशन लाइनों और तेल/गैस उद्योग में हो सकता है।

 

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image001ZSA9.jpg

भारतीय भूमध्यरेखीय इलेक्ट्रोजेट मॉडल (आईआईजीएमके लिए वेब-पोर्टल,

https://iigm.res.in/system/files/IEEJ_model.html

 

 

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स्पोर्ट्स को एक नए आसमान पर ले जाएगा। ओलंपिक्स सिर्फ एक खेल का आयोजन भर नहीं होता, दुनिया के जिन देशों में भी ओलंपिक्स होता है, वहां अनेक सेक्टर्स को गति मिलती है। ओलंपिक्स के लिए जो स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर बनता है, उससे भी रोजगार बनता है। भविष्य में खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाएं बनती हैं। जिस शहर में ओलंपिक होता है, वहां नया कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर बनता है। इससे कंस्ट्रक्शन से जुड़ी इंडस्ट्री को बल मिलता है, ट्रांसपोर्ट से जुड़ा सेक्टर आगे बढ़ता है। और सबसे बड़ा फायदा तो देश के टूरिज्म को मिलता है। अनेकों नए होटल बनते हैं, दुनिया भर से लोग ओलंपिक्स में हिस्सा लेने और गेम्स देखने आते हैं। इसका पूरे देश को फायदा होता है। जैसे ये नेशनल गेम्स का आयोजन, यहां देवभूमि उत्तराखंड में हो रहा है। यहां जो दर्शक, देश के दूसरे हिस्से से आएंगे, वो उत्तराखंड के दूसरे हिस्सों में भी जाएंगे। यानि स्पोर्ट्स के एक इवेंट से सिर्फ खिलाड़ियों को ही फायदा नहीं होता, बल्कि बहुत से अन्य सेक्टर्स की इकोनॉमी भी इससे ग्रो करती है।

साथियों,

आज दुनिया कह रही है, 21वीं सदी भारत की सदी है। और यहां बाबा केदार के दर्शन के बाद मेरे मुंह से, मेरे दिल से अचानक ही निकला था- ये उत्तराखंड का दशक है। मुझे खुशी है कि उत्तराखंड तेज़ी से प्रगति कर रहा है। कल ही उत्तराखंड देश का ऐसा राज्य बना है, जिसने यूनिफॉर्म सिविल कोड, समान नागरिक संहिता लागू की, मैं कभी-कभी इसे सेक्‍युलर सिविल कोड भी कहता हूं। समान नागरिक संहिता, हमारी बेटियाँ, माताओं-बहनों के गरिमापूर्ण जीवन का आधार बनेगी। यूनिफॉर्म सिविल कोड से लोकतंत्र की स्पिरिट को मजबूती मिलेगी, संविधान की भावना मजबूत होगी। और मैं आज यहां स्पोर्ट्स के इस इवेंट में हूं, तो इसे मैं आपसे जोड़कर भी देखता हूं। स्पोर्ट्स-मैन-शिप हमें भेदभाव की हर भावना से दूर करती है, हर जीत, हर मेडल के पीछे का मंत्र होता है- सबका प्रयास। स्पोर्ट्स से हमें टीम भावना के साथ खेलने की प्रेरणा मिलती है। यही भावना यूनिफॉर्म सिविल कोड की भी है। किसी से भेदभाव नहीं, हर कोई बराबर। मैं उत्तराखंड की भाजपा सरकार को इस ऐतिहासिक कदम के लिए बधाई देता हूं।

साथियों,

उत्तराखंड में पहली बार, इतने बड़े पैमाने पर इस तरह के नेशनल इवेंट का आयोजन हो रहा है। ये अपने आप में बहुत बड़ी बात है। इससे यहां रोजगार के भी ज्यादा अवसर बनेंगे, यहां के युवाओं को यहीं पर काम मिलेगा। उत्तराखंड को अपने विकास के लिए और भी नए रास्ते बनाने ही होंगे। अब जैसे उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था सिर्फ चार धाम यात्राओं पर निर्भर नहीं रह सकती। सरकार आज सुविधाएं बढ़ाकर इन यात्राओं का आकर्षण लगातार बढ़ा रही है। हर सीजन में श्रद्धालुओं की संख्या भी नए रिकॉर्ड बना रही है। लेकिन इतना काफी नहीं है। उत्तराखंड में शीतकालीन आध्यात्मिक यात्राओं को भी प्रोत्साहित करना जरूरी है। मुझे खुशी है कि इस दिशा में भी उत्तराखंड में कुछ नए कदम उठाए गए हैं।

साथियों,

उत्तराखंड एक प्रकार से मेरा दूसरा घर है। मेरी भी इच्छा है कि मैं शीतकालीन यात्राओं का हिस्सा बनूं। मैं देशभर के युवाओं से भी कहूंगा कि सर्दियों में जरूर उत्तराखंड आएं। तब यहां श्रद्धालुओं की संख्या भी उतनी नहीं होती। आपके लिए एडवेंचर से जुड़ी एक्टिविटीज़ की बहुत संभावना यहां पर है। आप सभी एथलीट्स भी नेशनल गेम्स के बाद इनके बारे में जरूर पता करिएगा और हो सके तो देवभूमि के आतिथ्य का और ज्यादा दिनों तक आनंद उठाइएगा।

साथियों,

आप सभी अपने-अपने राज्यों को रिप्रज़ेंट करते हैं। आने वाले दिनों में आप यहां कड़ी स्पर्धा करेंगे। अनेक नेशनल रिकॉर्ड टूटेंगे, नए रिकॉर्ड बनेंगे। आप पूरे सामर्थ्य के अनुसार अपना शत-प्रतिशत देंगे, लेकिन मेरा आपसे कुछ आग्रह भी हैं। ये नेशनल गेम्स सिर्फ खेल की ही स्पर्धा नहीं है, ये एक भारत श्रेष्ठ भारत का भी एक मजबूत मंच है। ये भारत की विविधता को सेलिब्रेट करने का आयोजन है। आप कोशिश करें, आपके मेडल में, भारत की एकता और श्रेष्ठता की चमक भी नजर आए। आप यहां से देश के अलग-अलग राज्यों की भाषा, खान-पान, गीत-संगीत की बेहतर जानकारी लेकर जाएं। मेरा एक आग्रह स्वच्छता को लेकर भी है। देवभूमि के निवासियों के प्रयासों से उत्तराखंड प्लास्टिक मुक्त बनने की दिशा में काफी मेहनत कर रहा है, आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा है। प्लास्टिक मुक्त उत्तराखंड का संकल्प, आपके सहयोग के बिना पूरा नहीं हो सकता। इस अभियान को सफल बनाने में जरूर अपना योगदान दें।

साथियों,

आप सभी फिटनेस का महत्व समझते हैं। इसलिए मैं आज एक ऐसी चुनौती की बात भी करना चाहता हूं, जो बहुत जरूरी है। आंकड़े कहते हैं कि हमारे देश में Obesity की, मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है। देश का हर एज ग्रुप, और य़ुवा भी इससे बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं। और ये चिंता की बात इसलिए भी है, क्योंकि Obesity, मोटापे की वजह से Diabetes, Heart disease जैसी बीमारियों का रिस्क बढ़ रहा है। मुझे संतोष है कि आज देश Fit India Movement के माध्यम से फिटनेस और Healthy Lifestyle के लिए जागरूक हो रहा है। ये नेशनल गेम्स भी, हमें ये सिखाते हैं कि Physical Activity, Discipline और Balanced Life कितनी जरूरी है। आज मैं देशवासियों से कहूंगा, दो चीजों पर जरूर फोकस करें। ये दो चीजें, Exercise और Diet से जुड़ी हैं। हर दिन, थोड़ा सा समय निकालकर एक्सरसाइज जरूर करिए। टहलने से लेकर वर्क-आउट करने तक, जो भी संभव हो अवश्य कीजिए। दूसरा ये कि अपनी Diet पर फोकस कीजिए। Balanced Intake पर आपका फोकस हो और खाना न्यूट्रिशियस हो, पौष्टिक हो।

एक और चीज हो सकती है। अपने खाने में अन-हेल्दी फैट, तेल को थोड़ा कम करें। अब जैसे हमारे सामान्य घरों में, महीने की शुरुआत में राशन आता है। अब तक अगर आप हर महीने दो लीटर खाने का तेल घर लाते थे, तो इसमें कम से कम 10 प्रतिशत की कटौती करिए। हम हर दिन जितना तेल यूज करते हैं, उसको 10 परसेंट कम करें। ये Obesity से बचने के कुछ रास्ते हमें खोजने पड़ेंगे। ऐसे छोटे-छोटे कदम उठाने से आपकी हेल्थ में बहुत बड़ा चेंज आ सकता है। और यही तो हमारे बड़े-बुजुर्ग करते थे। वो ताजी चीजें, नैचुरल चीजें, Balanced Meals खाते थे। एक स्वस्थ तन ही, स्वस्थ मन और स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण कर सकता है। मैं राज्य सरकारों, स्कूलों, ऑफिसों और Community Leaders से भी कहूंगा कि वो इसे लेकर जागरूकता फैलाएं, आप सभी को तो बहुत सारा प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस है। मैं चाहता हूं कि आप सही Nutrition की जानकारी निरंतर लोगों तक पहुंचाएं। आइए, हम सब मिलकर एक ‘फिट इंडिया’ बनाएं, इसी आह्वान के साथ।

साथियों,

वैसे मेरा दायित्व होता है नेशनल गेम्स की शुरुआत करवाने का, लेकिन मैं आज आप सबको जोड़कर करना चाहता हूं। तो इस गेम्‍स के शुभारंभ के लिए आप अपने मोबाइल के फ्लैश लाइट चालू कीजिए, आप सब। आप सब अपने मोबाइल के फ्लैश लाइट चालू कीजिए। सबके-सबके मोबाइल के फ्लैश लाइट चालू हों, आप सबके मोबाइल के फ्लैश लाइट चालू हों। आप सबके साथ मिलकर मैं 38वें नेशनल गेम्स की शुरुआत की घोषणा करता हूं। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्यवाद !

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भविष्य के रोबोट: दोस्त या दुश्मन? (Robots of the Future: Friends or Foes?)

ब्रेन ऑन, मशीन ऑन! (Brain On, Machine On!) “मन का सिद्धांत” (Theory of Mind – ToM).

-Himanshu Painuly

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता तेजी से तरक्की कर रही है. फोटो पहचानने से लेकर भाषा समझने और पेचीदा सवालों को सुलझाने में ये इंसानों को भी मात दे चुकी है. लेकिन एक चीज है जो एआई अभी सीख पाने में फंस गई है – वो है “मन का सिद्धांत” (Theory of Mind – ToM).

मन का सिद्धांत क्या है? (What is Theory of Mind?)

ये अपने और दूसरों के विचारों, इच्छाओं और मकसदों को समझने की काबिलियत है. ये चीज दोस्ती करने, दूसरों का दर्द समझने और सही फैसले लेने के लिए बहुत जरूरी है.

अगर एआई को भी मन का सिद्धांत समझ आ गया तो… (If AI Cracks the Mind Code…)

  • बातचीत का बूम! Elevated Social Engagement (Chatting Revolution!) एआई इंसानों की भावनाओं और परिस्थिति को समझकर गहरी बातचीत कर सकेगी. इससे ग्राहक सेवा और पढ़ाने के तरीके पूरी तरह से बदल सकते हैं.
  • फैसलों की धूम! (Enhanced Decision Making) एआई दूसरों के विचारों और भावनाओं को समझकर बेहतर फैसले ले सकेगी. इसका फायदा पैसों के लेन-देन, इलाज और कानूनी मामलों में भी हो सकता है.

लेकिन रुको जरा… (But Wait a Minute…)

क्या एआई का इस्तेमाल लोगों को फंसाने या उनकी निगरानी करने के लिए किया जाएगा? क्या एआई कभी अपने आप युद्ध छेड़ सकती है? ये तरक्की कुछ सवाल भी खड़े करती है…

एआई अभी सीख रही है… (AI is Still Learning…)

अभी एआई इंसानों जैसी भाषा समझने और बोलने में तो आगे बढ़ चुकी है, लेकिन दूसरों के मन को समझने में उसे अभी भी परेशानी होती है. वैज्ञानिक एआई को मन को समझने की क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं.

भविष्य का इंतजार… (Waiting for the Future…)

जब एआई को पूरी तरह से मन का सिद्धांत समझ आ जाएगा, तो ये समाज के लिए एक बड़ा बदलाव होगा. चुनौतियां तो हैं, लेकिन फायदे भी कम नहीं. जैसे-जैसे एआई आगे बढ़ेगी, ये जरूरी है कि हम ऐसे नियम और सुरक्षा उपाय बनाएं, ताकि ये तरक्की इंसानों की भलाई के लिए ही इस्तेमाल हो.

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है। अब हमारे युवा Sports को प्रमुख Career Choice मानकर काम कर रहे हैं।

साथियों,

जैसे हमारे खिलाड़ी हमेशा बड़े लक्ष्य लेकर चलते हैं, वैसे ही, हमारा देश भी बड़े संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है। आप सभी जानते हैं कि भारत, 2036 ओलंपिक्स की मेज़बानी के लिए पूरा ज़ोर लगा रहा है। जब भारत में ओलंपिक होगा, तो वो भारत के स्पोर्ट्स को एक नए आसमान पर ले जाएगा। ओलंपिक्स सिर्फ एक खेल का आयोजन भर नहीं होता, दुनिया के जिन देशों में भी ओलंपिक्स होता है, वहां अनेक सेक्टर्स को गति मिलती है। ओलंपिक्स के लिए जो स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर बनता है, उससे भी रोजगार बनता है। भविष्य में खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाएं बनती हैं। जिस शहर में ओलंपिक होता है, वहां नया कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर बनता है। इससे कंस्ट्रक्शन से जुड़ी इंडस्ट्री को बल मिलता है, ट्रांसपोर्ट से जुड़ा सेक्टर आगे बढ़ता है। और सबसे बड़ा फायदा तो देश के टूरिज्म को मिलता है। अनेकों नए होटल बनते हैं, दुनिया भर से लोग ओलंपिक्स में हिस्सा लेने और गेम्स देखने आते हैं। इसका पूरे देश को फायदा होता है। जैसे ये नेशनल गेम्स का आयोजन, यहां देवभूमि उत्तराखंड में हो रहा है। यहां जो दर्शक, देश के दूसरे हिस्से से आएंगे, वो उत्तराखंड के दूसरे हिस्सों में भी जाएंगे। यानि स्पोर्ट्स के एक इवेंट से सिर्फ खिलाड़ियों को ही फायदा नहीं होता, बल्कि बहुत से अन्य सेक्टर्स की इकोनॉमी भी इससे ग्रो करती है।

साथियों,

आज दुनिया कह रही है, 21वीं सदी भारत की सदी है। और यहां बाबा केदार के दर्शन के बाद मेरे मुंह से, मेरे दिल से अचानक ही निकला था- ये उत्तराखंड का दशक है। मुझे खुशी है कि उत्तराखंड तेज़ी से प्रगति कर रहा है। कल ही उत्तराखंड देश का ऐसा राज्य बना है, जिसने यूनिफॉर्म सिविल कोड, समान नागरिक संहिता लागू की, मैं कभी-कभी इसे सेक्‍युलर सिविल कोड भी कहता हूं। समान नागरिक संहिता, हमारी बेटियाँ, माताओं-बहनों के गरिमापूर्ण जीवन का आधार बनेगी। यूनिफॉर्म सिविल कोड से लोकतंत्र की स्पिरिट को मजबूती मिलेगी, संविधान की भावना मजबूत होगी। और मैं आज यहां स्पोर्ट्स के इस इवेंट में हूं, तो इसे मैं आपसे जोड़कर भी देखता हूं। स्पोर्ट्स-मैन-शिप हमें भेदभाव की हर भावना से दूर करती है, हर जीत, हर मेडल के पीछे का मंत्र होता है- सबका प्रयास। स्पोर्ट्स से हमें टीम भावना के साथ खेलने की प्रेरणा मिलती है। यही भावना यूनिफॉर्म सिविल कोड की भी है। किसी से भेदभाव नहीं, हर कोई बराबर। मैं उत्तराखंड की भाजपा सरकार को इस ऐतिहासिक कदम के लिए बधाई देता हूं।

साथियों,

उत्तराखंड में पहली बार, इतने बड़े पैमाने पर इस तरह के नेशनल इवेंट का आयोजन हो रहा है। ये अपने आप में बहुत बड़ी बात है। इससे यहां रोजगार के भी ज्यादा अवसर बनेंगे, यहां के युवाओं को यहीं पर काम मिलेगा। उत्तराखंड को अपने विकास के लिए और भी नए रास्ते बनाने ही होंगे। अब जैसे उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था सिर्फ चार धाम यात्राओं पर निर्भर नहीं रह सकती। सरकार आज सुविधाएं बढ़ाकर इन यात्राओं का आकर्षण लगातार बढ़ा रही है। हर सीजन में श्रद्धालुओं की संख्या भी नए रिकॉर्ड बना रही है। लेकिन इतना काफी नहीं है। उत्तराखंड में शीतकालीन आध्यात्मिक यात्राओं को भी प्रोत्साहित करना जरूरी है। मुझे खुशी है कि इस दिशा में भी उत्तराखंड में कुछ नए कदम उठाए गए हैं।

साथियों,

उत्तराखंड एक प्रकार से मेरा दूसरा घर है। मेरी भी इच्छा है कि मैं शीतकालीन यात्राओं का हिस्सा बनूं। मैं देशभर के युवाओं से भी कहूंगा कि सर्दियों में जरूर उत्तराखंड आएं। तब यहां श्रद्धालुओं की संख्या भी उतनी नहीं होती। आपके लिए एडवेंचर से जुड़ी एक्टिविटीज़ की बहुत संभावना यहां पर है। आप सभी एथलीट्स भी नेशनल गेम्स के बाद इनके बारे में जरूर पता करिएगा और हो सके तो देवभूमि के आतिथ्य का और ज्यादा दिनों तक आनंद उठाइएगा।

साथियों,

आप सभी अपने-अपने राज्यों को रिप्रज़ेंट करते हैं। आने वाले दिनों में आप यहां कड़ी स्पर्धा करेंगे। अनेक नेशनल रिकॉर्ड टूटेंगे, नए रिकॉर्ड बनेंगे। आप पूरे सामर्थ्य के अनुसार अपना शत-प्रतिशत देंगे, लेकिन मेरा आपसे कुछ आग्रह भी हैं। ये नेशनल गेम्स सिर्फ खेल की ही स्पर्धा नहीं है, ये एक भारत श्रेष्ठ भारत का भी एक मजबूत मंच है। ये भारत की विविधता को सेलिब्रेट करने का आयोजन है। आप कोशिश करें, आपके मेडल में, भारत की एकता और श्रेष्ठता की चमक भी नजर आए। आप यहां से देश के अलग-अलग राज्यों की भाषा, खान-पान, गीत-संगीत की बेहतर जानकारी लेकर जाएं। मेरा एक आग्रह स्वच्छता को लेकर भी है। देवभूमि के निवासियों के प्रयासों से उत्तराखंड प्लास्टिक मुक्त बनने की दिशा में काफी मेहनत कर रहा है, आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा है। प्लास्टिक मुक्त उत्तराखंड का संकल्प, आपके सहयोग के बिना पूरा नहीं हो सकता। इस अभियान को सफल बनाने में जरूर अपना योगदान दें।

साथियों,

आप सभी फिटनेस का महत्व समझते हैं। इसलिए मैं आज एक ऐसी चुनौती की बात भी करना चाहता हूं, जो बहुत जरूरी है। आंकड़े कहते हैं कि हमारे देश में Obesity की, मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है। देश का हर एज ग्रुप, और य़ुवा भी इससे बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं। और ये चिंता की बात इसलिए भी है, क्योंकि Obesity, मोटापे की वजह से Diabetes, Heart disease जैसी बीमारियों का रिस्क बढ़ रहा है। मुझे संतोष है कि आज देश Fit India Movement के माध्यम से फिटनेस और Healthy Lifestyle के लिए जागरूक हो रहा है। ये नेशनल गेम्स भी, हमें ये सिखाते हैं कि Physical Activity, Discipline और Balanced Life कितनी जरूरी है। आज मैं देशवासियों से कहूंगा, दो चीजों पर जरूर फोकस करें। ये दो चीजें, Exercise और Diet से जुड़ी हैं। हर दिन, थोड़ा सा समय निकालकर एक्सरसाइज जरूर करिए। टहलने से लेकर वर्क-आउट करने तक, जो भी संभव हो अवश्य कीजिए। दूसरा ये कि अपनी Diet पर फोकस कीजिए। Balanced Intake पर आपका फोकस हो और खाना न्यूट्रिशियस हो, पौष्टिक हो।

एक और चीज हो सकती है। अपने खाने में अन-हेल्दी फैट, तेल को थोड़ा कम करें। अब जैसे हमारे सामान्य घरों में, महीने की शुरुआत में राशन आता है। अब तक अगर आप हर महीने दो लीटर खाने का तेल घर लाते थे, तो इसमें कम से कम 10 प्रतिशत की कटौती करिए। हम हर दिन जितना तेल यूज करते हैं, उसको 10 परसेंट कम करें। ये Obesity से बचने के कुछ रास्ते हमें खोजने पड़ेंगे। ऐसे छोटे-छोटे कदम उठाने से आपकी हेल्थ में बहुत बड़ा चेंज आ सकता है। और यही तो हमारे बड़े-बुजुर्ग करते थे। वो ताजी चीजें, नैचुरल चीजें, Balanced Meals खाते थे। एक स्वस्थ तन ही, स्वस्थ मन और स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण कर सकता है। मैं राज्य सरकारों, स्कूलों, ऑफिसों और Community Leaders से भी कहूंगा कि वो इसे लेकर जागरूकता फैलाएं, आप सभी को तो बहुत सारा प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस है। मैं चाहता हूं कि आप सही Nutrition की जानकारी निरंतर लोगों तक पहुंचाएं। आइए, हम सब मिलकर एक ‘फिट इंडिया’ बनाएं, इसी आह्वान के साथ।

साथियों,

वैसे मेरा दायित्व होता है नेशनल गेम्स की शुरुआत करवाने का, लेकिन मैं आज आप सबको जोड़कर करना चाहता हूं। तो इस गेम्‍स के शुभारंभ के लिए आप अपने मोबाइल के फ्लैश लाइट चालू कीजिए, आप सब। आप सब अपने मोबाइल के फ्लैश लाइट चालू कीजिए। सबके-सबके मोबाइल के फ्लैश लाइट चालू हों, आप सबके मोबाइल के फ्लैश लाइट चालू हों। आप सबके साथ मिलकर मैं 38वें नेशनल गेम्स की शुरुआत की घोषणा करता हूं। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्यवाद !

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भारत का इस्पात उद्योग: विकास और वैश्विक नेतृत्व की कहानी

 

-A PIB Feature-

भारत के इस्पात उद्योग में हुई प्रगति की कहानी इस क्षेत्र में हुए उल्लेखनीय परिवर्तन का प्रमाण है, जो देश की व्यापक आर्थिक विकास की यात्रा को दर्शाता है। वैश्विक उत्पादन में कभी एक मामूली भूमिका निभाने वाला यह क्षेत्र आज विकसित होकर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक बन गया है, जिसने वर्ष 2018 में जापान को पीछे छोड़कर यह दर्जा हासिल किया है। इस्पात उद्योग में यह बदलाव आधुनिकीकरण, आत्मनिर्भरता और सतत औद्योगीकरण की दिशा में भारत की व्यापक यात्रा का प्रतीक है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शब्दों में, इस्पात उद्योग देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में एक “महत्वपूर्ण भूमिका” निभाएगा क्योंकि भारत एक विकसित देश बनने के अपने दृष्टिकोण का अनुसरण करता है के अनुरूप है।

भारत के इस्पात उद्योग की वृद्धि, विशेष रूप से 2019 और 2023 के बीच, उल्लेखनीय रही है। इस अवधि के दौरान, भारत का इस्पात उत्पादन 6 प्रतिशत की प्रभावशाली चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (साएजीआर) से बढ़ा, जो चीन के 1 प्रतिशत से काफी आगे निकल गया और वैश्विक इस्पात उत्पादन से आगे निकल गया, जिसमें 1 प्रतिशत  की गिरावट देखी गई। पिछले पाँच वर्षों में वैश्विक इस्पात क्षमता में लगभग 62 मिलियन टन की वृद्धि देखी गई है, जिसमें भारत का योगदान इस वृद्धि का 6 प्रतिशत  है। विशेष रूप से, एशिया की इस्पात निर्माण क्षमता में वृद्धि का लगभग 89 प्रतिशत हिस्सा आसियान और भारत का है।

भारत के इस्पात उद्योग का यह प्रदर्शन वैश्विक बाजार में देश की रणनीतिक स्थिति को उजागर करता है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे घरेलू विनिर्माण प्रयासों से प्रेरित है। भारत सिर्फ स्टील का उत्पादन ही नहीं कर रहा है; यह आयात निर्भरता को कम करने और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए एक रोडमैप तैयार कर रहा है।

भारत के इस्पात उद्योग की इस सफलता में राष्ट्रीय इस्पात नीति (एनएसपी) 2017 की महत्वपूर्ण भूमिका  रही है, जिसमें 2030-31 तक 300 मिलियन टन कच्चे इस्पात की क्षमता हासिल करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं और 255 मिलियन टन कच्चे इस्पात और 230 मिलियन टन तैयार इस्पात का उत्पादन अपेक्षित है। इस नीति का उद्देश्य भारत को इस्पात उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना, घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों बाजारों की इस्पात संबंधी जरूरतों को पूरा करना तथा उद्योग की क्षमता और  गुणवत्ता बढ़ाने के लिए टिकाऊ और ऊर्जा-कुशल विधियों को अपनाने पर जोर देना है।

कच्चे इस्पात का उत्पादन वर्ष 2019-20 में 109.137 मिलियन टन से बढ़कर वर्ष 2023-24 में 144.299 मिलियन टन  हो गया, जो पिछले वर्ष (2022-23 में 127.197 मिलियन टन ) की तुलना में 13.4 प्रतिशत की वृद्धि है। घरेलू इस्पात उद्योग की क्षमता वर्ष 2019-20 में 142.299 मिलियन टन  प्रति वर्ष से बढ़कर वर्ष 2023-24 में 179.515 मिलियन टन  हो गई, जिससे उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। इसी अवधि के दौरान उत्पादन क्षमता का उपयोग बढ़कर 81 प्रतिशत हो गया।

 

https://one.oecd.org/document/DSTI/SC(2024)3/FINAL/en/pdf

2 https://one.oecd.org/document/DSTI/SC(2024)3/FINAL/en/pdf

https://steel.gov.in/sites/default/files/lu%202320.pdf

 

लेकिन भारतीय इस्पात उद्योग की कहानी सिर्फ़ क्षमता में विस्तार तक सीमित नहीं है – यह घरेलू खपत में वृद्धि भी दर्शाती है। कुल तैयार स्टील की खपत वर्ष 2019-20 में 100.171 मीट्रिक टन थी, जो वर्ष 2023-24 में बढ़कर 136.291 मीट्रिक टन हो गई। यह पिछले वर्ष की तुलना में 13.7 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ मजबूत घरेलू मांग को दर्शाता है। वित्त वर्ष 2027 तक स्टील की मांग में 6 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) के अनुमान के अनुसार भारत का इस्पात उद्योग स्टील क्षेत्र से जुड़ी मांग को पूरा करने के अलावा बेहतर प्रदर्शन करने के लिए भी तैयार है।

इस्पात उद्योग में हुई इस वृद्धि का श्रेय रणनीतिक नीतियों और उद्योग का नेतृत्व करने वाली पहल  को जाता है, जो क्षमता विस्तार और उच्च गुणवत्ता वाले इस्पात उत्पादों के विकास पर केंद्रित हैं।

इस्पात उद्योग एक अविनियमित क्षेत्र है तथा सरकार इस क्षेत्र के विकास के लिए अनुकूल नीतिगत वातावरण बनाकर एक सुविधा प्रदाता के रूप में कार्य करती है। सरकार ने इस्पात क्षेत्र को पूर्ण रूप से पुनर्जीवित करने के लिए कई कदम उठाए हैं।

इस्पात उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए, एक प्रमुख पहल उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना है, जिसका उद्देश्य पूंजी निवेश को आकर्षित करना और आयात को कम करना है, जिसमें अनुमानित ₹29,500 करोड़ का निवेश और विशेष इस्पात के लिए 25 मिलियन टन की अतिरिक्त क्षमता का निर्माण शामिल है। इस्पात उद्योग को वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए, बजट 2024 में, सरकार ने कच्चे माल, फेरो निकल पर मूल सीमा शुल्क कम कर दिया और मार्च 2026 तक फेरस स्क्रैप पर शुल्क छूट बढ़ा दी। एक अन्य प्रमुख पहल घरेलू रूप से निर्मित लौह और इस्पात उत्पाद (डीएमआई और एसपी) नीति है, जो सरकारी खरीद के लिए ‘मेड इन इंडिया’ स्टील को बढ़ावा देती है।

वित्तीय प्रोत्साहनों के अलावा, सरकार ने उद्योग की पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ाने के लिए निर्णायक कदम उठाए हैं। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, स्टील क्षेत्र को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन और उपयोग के व्यापक लक्ष्य में एकीकृत करता है, जो स्टील उत्पादन के डीकार्बोनाइजेशन में योगदान देता है। स्टील स्क्रैप रीसाइक्लिंग नीति घरेलू स्तर पर उत्पादित स्क्रैप की उपलब्धता बढ़ाकर इन प्रयासों को और आगे बढ़ाती है, जिससे संसाधन दक्षता को बढ़ावा मिलता है।

आज, भारत का इस्पात उद्योग एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जो स्थिरता को अपनाते हुए महत्वपूर्ण वृद्धि के लिए तैयार है। बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा परियोजनाएं और ‘मेक इन इंडिया’ और पीएम गति-शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान जैसी पहल मांग को बढ़ा रही हैं, जिससे निरंतर वृद्धि सुनिश्चित हो रही है। सरकार और निजी क्षेत्र दोनों रणनीतिक निवेश उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने के लिए तैयार हैं, जिससे उद्योग को राष्ट्रीय इस्पात नीति 2017 द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को पार करने में मदद मिलेगी। जैसे-जैसे भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में काम कर रहा है, इस्पात क्षेत्र आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हुएव टिकाऊ और समावेशी प्रगति के लिए वैश्विक मानक स्थापित करेगा।

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