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अरुणाचल में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन से झड़पें जारी, आईटीबीपी ने बढ़ाई सतर्कता

 

  • आईटीबीपी महानिदेशक का खुलासा—कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमना-सामना, गलवान जैसी घटनाएं रोकने के लिए आधुनिक तकनीक और ड्रोन बल पर जोर
  • सीमा पर तनाव के बीच चीन से मुकाबले के लिए ड्रोन और ड्रोनरोधी प्रणालियों पर एक हजार करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर। भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अरुणाचल प्रदेश में पिछले कुछ महीनों के दौरान दोनों देशों के सैनिकों के बीच आमना-सामना होने और कुछ स्थानों पर झड़पें होने की जानकारी सामने आई है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने इसका खुलासा करते हुए कहा है कि सीमा पर उत्पन्न होने वाली चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने के लिए बल को आधुनिक तकनीक और ड्रोन प्रणालियों से सुसज्जित किया जा रहा है।

महानिदेशक ने बृहस्पतिवार को राजस्थान के अलवर में आईटीबीपी जवानों के सम्मान समारोह के दौरान पत्रकारों से बातचीत में बताया कि अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर कई स्थानों पर गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि जुलाई के अंत से अरुणाचल प्रदेश के मुक्तानसिरी और असाफिला क्षेत्रों में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिकों के साथ भारतीय जवानों का आमना-सामना और झड़पें हुई हैं। हालांकि, इन घटनाओं में किसी के हताहत होने या घायल होने के संबंध में समाचार में कोई जानकारी नहीं दी गई है।

सीमा पर यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत और चीन के बीच तनाव कम करने के लिए उच्चस्तरीय सैन्य तथा कूटनीतिक बातचीत जारी है। दोनों देशों के बीच कई दौर की वार्ताओं के बावजूद वास्तविक नियंत्रण रेखा के कुछ क्षेत्रों में मतभेद और सैन्य सतर्कता बनी हुई है।

गलवान जैसी घटनाओं को रोकने पर विशेष ध्यान

आईटीबीपी महानिदेशक ने कहा कि जून 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुए हिंसक संघर्ष जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना सुरक्षा बलों की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए सीमा पर निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ जवानों को आधुनिक तकनीक से प्रशिक्षित किया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि 15 जून 2020 को पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक संघर्ष हुआ था, जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे। चीन ने आधिकारिक रूप से अपने चार सैनिकों की मौत स्वीकार की थी। इस घटना के बाद दोनों देशों के संबंधों में गंभीर तनाव उत्पन्न हो गया था और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सैन्य तैनाती बढ़ा दी गई थी।

महानिदेशक के अनुसार, गलवान जैसी किसी भी अप्रिय स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए आईटीबीपी जवानों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण में आधुनिक निगरानी उपकरणों, ड्रोन प्रणालियों तथा दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता विकसित करने पर जोर दिया गया है।

 ड्रोन और ड्रोनरोधी प्रणालियों पर एक हजार करोड़ का निवेश

चीन की बढ़ती तकनीकी और सैन्य क्षमताओं को देखते हुए आईटीबीपी अपनी निगरानी तथा प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। महानिदेशक ने बताया कि बल के आधुनिकीकरण के लिए चार हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इनमें से लगभग एक हजार करोड़ रुपये ड्रोन और ड्रोनरोधी प्रणालियों के विकास तथा खरीद पर खर्च किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि चीन जैसे शक्तिशाली पड़ोसी का मुकाबला केवल पारंपरिक तरीकों से करना कठिन होता जा रहा है। आधुनिक युद्ध और सीमा सुरक्षा में मानव रहित हवाई प्रणालियों की भूमिका तेजी से बढ़ी है। ऐसे में आईटीबीपी को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना आवश्यक है।

समाचार में दी गई जानकारी के अनुसार, ड्रोन क्षमता बढ़ाने के लिए लगभग 400 करोड़ रुपये की एक योजना का 70 प्रतिशत हिस्सा भी इसी दिशा में लगाया जा रहा है। हालांकि, इस योजना का विस्तृत स्वरूप स्पष्ट नहीं किया गया है।

ड्रोन तकनीक के माध्यम से दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों, बर्फ से ढकी चोटियों और ऐसे सीमावर्ती स्थानों की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकती है, जहां सामान्य गश्त कठिन होती है। दूसरी ओर, ड्रोनरोधी प्रणालियां विरोधी पक्ष के मानव रहित विमानों की पहचान करने और संभावित खतरों का मुकाबला करने में उपयोगी होती हैं।

उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जवानों की भूमिका महत्वपूर्ण

आईटीबीपी भारत-चीन सीमा की सुरक्षा में प्रमुख भूमिका निभाने वाला केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के अत्यंत दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में इसके जवान तैनात रहते हैं। अनेक चौकियां अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित हैं, जहां कड़ाके की ठंड, भारी हिमपात, सीमित संचार सुविधाएं और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां सुरक्षा संबंधी चुनौतियों को बढ़ाती हैं।

महानिदेशक ने कहा कि आईटीबीपी जवानों ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। बल की नई रणनीति में जवानों के अनुभव और साहस के साथ आधुनिक तकनीक के उपयोग को विशेष महत्व दिया जा रहा है।

 सैन्य वार्ताओं के बावजूद सीमा पर तनाव

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर विवाद लंबे समय से बना हुआ है। गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों ने सैन्य कमांडर स्तर पर अनेक दौर की बातचीत की। कुछ क्षेत्रों में सैनिकों को पीछे हटाने और तनाव कम करने के उपायों पर सहमति भी बनी, लेकिन सभी क्षेत्रों में सीमा संबंधी मतभेद समाप्त नहीं हुए हैं।

आईटीबीपी महानिदेशक के अनुसार, जुलाई से अब तक दोनों देशों के बीच तीन उच्चस्तरीय बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन सीमा पर तनाव बरकरार है। उनका यह बयान संकेत देता है कि कूटनीतिक बातचीत के साथ-साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा बलों की सतर्कता बनाए रखना भी आवश्यक है।

 चीन ने आरोपों को नकारा, भारत ने शांति बनाए रखने पर दिया जोर

आईटीबीपी महानिदेशक के बयान के बाद केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि जब चीनी सैनिक गश्ती के निर्धारित तौर-तरीकों से हटते हैं, तो सीमा क्षेत्र की स्थिति समय-समय पर बिगड़ती है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि दोनों देश वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान और गलतफहमी से बचने के लिए कूटनीतिक तथा सैन्य माध्यमों से बातचीत कर रहे हैं।

इस बीच चीन की ओर से भारतीय आरोपों को लेकर अलग रुख सामने आया है। चीन ने सीमा पर अपनी गतिविधियों को लेकर उठाए गए सवालों को खारिज किया है।

अरुणाचल से उत्तराखंड तक सुरक्षा की चुनौती

अरुणाचल प्रदेश में सामने आई घटनाओं का महत्व केवल पूर्वोत्तर सीमा तक सीमित नहीं है। भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा हिमालय के विस्तृत भूभाग से होकर गुजरती है। उत्तराखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी आईटीबीपी की महत्वपूर्ण तैनाती है। चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सीमा सुरक्षा की चुनौतियां भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत जटिल हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक ड्रोन, संचार उपकरण, निगरानी प्रणालियां और समय पर सूचना उपलब्ध कराने वाली तकनीकें हिमालयी सीमा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों में इनका महत्व बढ़ जाता है, जहां मौसम और दुर्गम भूगोल के कारण नियमित गश्त प्रभावित होती है।

आईटीबीपी महानिदेशक का ताजा बयान स्पष्ट करता है कि भारत-चीन सीमा पर बातचीत जारी रहने के बावजूद सैन्य सतर्कता कम करने की स्थिति नहीं बनी है। अरुणाचल प्रदेश में सैनिकों के आमने-सामने आने की घटनाएं इस बात की याद दिलाती हैं कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति बनाए रखना अब भी दोनों देशों के लिए एक बड़ी चुनौती है। सीमा पर गलतफहमी या स्थानीय स्तर पर उत्पन्न टकराव को व्यापक संघर्ष में बदलने से रोकने के लिए सैन्य संवाद, कूटनीतिक प्रयास और प्रभावी निगरानी व्यवस्था का समान रूप से महत्व बना हुआ है।

 

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