सरकारी जमीनों के हस्तांतरण पर कांग्रेस ने राज्यपाल से की शिकायत, फैसले निरस्त करने की मांग
**जॉर्ज एवरेस्ट सहित 40 सरकारी संपत्तियों के आवंटन पर उठाए सवाल, दस दिन में कार्रवाई नहीं होने पर उच्च न्यायालय जाने की चेतावनी**
देहरादून, 5 नवंबर। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को राज्यपाल से मुलाकात कर प्रदेश की बेशकीमती सरकारी जमीनों और ऐतिहासिक संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपे जाने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने संबंधित शासनादेश निरस्त करने, संपत्तियां उनके मूल विभागों को लौटाने तथा कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के आय से अधिक संपत्ति मामले, सहकारिता विभाग की भर्तियों और एमबीबीएस दाखिलों में कथित फर्जीवाड़े का मुद्दा भी उठाया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि राज्य सरकार ने विभिन्न विभागों की करीब 40 संपत्तियों को निजी निवेश के लिए उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में संवैधानिक और प्रशासनिक प्रावधानों की अनदेखी की है। कांग्रेस के अनुसार ये संपत्तियां प्रदेश के 12 जिलों में स्थित हैं और इनका अनुमानित बाजार मूल्य एक लाख करोड़ रुपये तक है।
ज्ञापन में 20 दिसंबर 2022 के मंत्रिमंडलीय निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि इसके माध्यम से विभिन्न विभागों की सरकारी भूमि संबंधी अंतिम निर्णय लेने का अधिकार मुख्यमंत्री को सौंप दिया गया। कांग्रेस ने इसे मंत्रिपरिषद के सामूहिक उत्तरदायित्व और कार्य संचालन नियमावली की भावना के विपरीत बताया।
कांग्रेस ने मसूरी स्थित जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट की 142 एकड़ भूमि और ऐतिहासिक संपत्तियों को लगभग एक करोड़ रुपये वार्षिक किराये पर 15 वर्ष के लिए निजी कंपनी को देने का आरोप लगाया। पार्टी का दावा है कि निविदा प्रक्रिया में भाग लेने वाली तीनों कंपनियों के बीच आपसी संबंध थे। कांग्रेस ने इस आवंटन को निरस्त कर उच्च न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।
ज्ञापन में पटवाडांगर, डाकपत्थर, रामगढ़, ऋषिकेश, रानीबाग और अन्य स्थानों की सरकारी जमीनों के हस्तांतरण पर भी आपत्ति जताई गई। कांग्रेस का आरोप है कि कुछ मामलों में राजस्व अभिलेख, भूमि की पैमाइश और संबंधित विभागों की सहमति सुनिश्चित किए बिना निर्णय लिए गए। पार्टी ने उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड तथा सिडकुल को हस्तांतरित संपत्तियां मूल विभागों को लौटाने की मांग की।
कांग्रेस ने पटवाडांगर, हरिद्वार के अलकनंदा होटल और ऋषिकेश निरीक्षण भवन से संबंधित तीन निविदाएं तत्काल निरस्त करने तथा लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवनों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी में देने की प्रक्रिया रोकने का आग्रह किया।
प्रतिनिधिमंडल ने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति मामले में न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। इसके अतिरिक्त कोरोना काल में सहकारिता विभाग की नियुक्तियों में कथित धन वसूली और एमबीबीएस प्रवेश में फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने को कहा।
कांग्रेस ने चेतावनी दी कि दस दिन के भीतर भूमि संबंधी विवादित निर्णय वापस नहीं लिए गए तो पार्टी उच्च न्यायालय की शरण लेगी।
प्रतिनिधिमंडल में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रीतम सिंह, डॉ. हरक सिंह रावत, विधायक मदन बिष्ट, फुरकान अहमद, पूर्व विधायक मनोज रावत, सीपी सिंह, राजीव महर्षि, राजेंद्र शाह, ज्योति रौतेला, सुरेंद्र सिंह रांगड़ और राजेश चमोली सहित अन्य नेता शामिल थे।
इन आरोपों पर राज्य सरकार का पक्ष तत्काल उपलब्ध नहीं हो सका।

