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देश में 7 सालों में 20 हज़ार करोड़ रुपये की ड्रग्स पकड़ी गयी : फिर भी कम नहीं हो रहा खतरनाक धंधा

-उषा रावत

नयी दिल्ली, 31   जुलाई । चंडीगढ़ में ‘नशीली दवाओं की तस्करी और राष्ट्रीय सुरक्षा’ पर राष्ट्रीय सम्मेलन में  नशीली दवाओं के  धंधे और प्रचलन की जो तस्बीर उभरी वह काफी चिंता जनक है।  यध्यपि सरकारी  सरकारी एजेंसियां भी अपने स्तर पर बड़े पैमाने पर धर पकड़ कर रही हैं फिर भी इस धंधे में लिप्त अपराधी  नए -नए तरीके ईजाद कर रहे हैं।  इसलिए इस सामाजिक दुश्मन से लड़ाई में सम्पूर्ण समाज को भी सक्रिय रूप से शामिल होना होगा  और अपने घर से ही चौकसी बढ़ानी होगी।

26 जून 1988 से प्रतिवर्ष अंतर्राष्ट्रीय ड्रग्स और इसकी अवैध तस्करी के लिए दिवस मनाया जाता है। यह दिन हुमैन, गुआंग्डोंग जो चीन में अफीम की अवैध तस्करी और दुरूपयोग के विनाश के लिए मशहूर थे उन्हें याद करने के लिए चुना गया। 7 दिसंबर 1987 को संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा ने 9 नवंबर, 1985 के अपने 40/122 के संकल्प को नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी पर एक बैठक आयोजित कर पूरी तरह से इस खतरे से लड़ने का फैसला किया। यह उस बैठक का पहला कदम था जिसमें सचिव-जनरल ने ड्रग्स के दुरूपयोग पर एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया था और ऑस्ट्रिया में वियना में मंत्री स्तर पर इसका अवैध वितरण किया था।

सम्मलेन में बताया गया कि 2006-2013 की तुलना में 2014-2022 के बीच पिछले 8 साल में लगभग 200 प्रतिशत ज्यादा मामले दर्ज़ किए गए हैं, गिरफ्तारियों की संख्या में 260 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। जब्त किए गए ड्रग्स की मात्रा दोगुने से अधिक हुई है, 2006 से 2013 के बीच 1.52 लाख किलोग्राम मादकपदार्थ ज़ब्त हुए थे जबकि 2014 से 2022 के बीच 3.3 लाख किलोग्राम ड्रग्स पकड़ी गई है।  2006 से 2013 तक 768 करोड़ रुपये का ड्रग्स पकड़ी गईं जबकि 2014 से 2021 के बीच 20 हज़ार करोड़ रुपये के ड्रग्स पकड़ कर उसे नष्ट करने का अभियान भारत सरकार चला रही है।  सम्मलेन में केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि जून से 15 अगस्त तक 75 दिन के ड्रग्स नष्ट करने का अभियान चल रहा है और आज  लगभग 31000 किलोग्राम ड्रग्स को चार शहरों में जलाया गया है। 15 अगस्त को 75 दिन के अभियान की समाप्ति पर इसकी मात्रा एक लाख किलोग्राम पहुँच जाएगी जिसका अनुमानित काला बाज़ार मूल्य क़रीब 3000 करोड़ रुपये होगा ।

अमित शाह ने कहा कि पिछले आठ सालों में  ड्रग्स के ख़िलाफ़ लड़ाई में शानदार नतीजे प्राप्त हुए हैं। 2006-2013 की तुलना में 2014-2022 के बीच पिछले 8 साल में लगभग 200 प्रतिशत ज्यादा मामले दर्ज़ किए गए हैं। गिरफ्तारियों की संख्या में 260 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। क्वालिटी केसेज़ में 800 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। जब्त किए गए ड्रग्स की मात्रा दुगने से अधिक हुई है। 2006 से 2013 के बीच 1.52 लाख किलोग्राम मादकपदार्थ ज़ब्त हुए थे जबकि 2014 से 2022 के बीच 3.3 लाख किलोग्राम ड्रग्स पकड़ी गई है। ज़्यादा नुक़सान पहुंचाने वाले और शरीर और समाज को खोखला करने वाले मादक पदार्थों पर हमने ज़्यादा कॉन्सेन्ट्रेट किया है। 2006 से 2013 तक 768 करोड़ रुपये का ड्रग्स पकड़ी गईं जबकि 2014 से 2021 के बीच 20 हज़ार करोड़ रुपये के ड्रग्स पकड़ कर उसे नष्ट करने का अभियान भारत सरकार चला रही है:

2006-13 2014-22
कुल मामले 1,257 3,172 200% से ज्यादा बढ़ोत्तरी
कुल अरेस्ट 1,363 4,888 गिरफ़्तारी में 260% बढ़ोतरी
Seized ड्रग्ज (KG) 1.52 लाख KG 3.3 लाख KG दोगुने से भी ज्यादा
Seized ड्रग्ज

(करोड़ रू. में)

768 करोड़ 20 हजार करोड़ 25 गुना ज्यादा

ये परिणाम बताते हैं कि हमारा अभियान और रास्ता सही हैं। ज़रूरत है तो इस रास्ते पर गति बढ़ाने की, श्रद्धा बनाने की और इस रास्ते में अभी भी जो थोड़े बहुत लूपहोल्स हैं उन्हें समाप्त करने की। भारत सरकार का गृह मंत्रालय इस दिशा में बहुत द्रुत गति से आगे बढ़ रहा है।

केन्द्रीय गृह मंत्री के निर्देश पर 1 जून से 15 अगस्त तक 75 दिन के ड्रग्स नष्ट करने के अभियान की शुरुआत हुई और अब तक 1200 करोड़ रुपये मूल्य के 51000 किलोग्राम ड्रग्स नष्ट किए जा चुके हैं। आज केन्द्रीय गृह मंत्री द्वारा नष्ट किए गए लगभग 31000 किलोग्राम ड्रग्स का काला बाज़ार मूल्य क़रीब 800 करोड़ रुपये है। इस प्रकार आज तक क़रीब 2000 करोड़ रुपये की क़ीमत के 82000 किलोग्राम ड्रग्स नष्ट किए जा चुके हैं। 15 अगस्त को 75 दिन के अभियान की समाप्ति पर इसकी मात्रा एक लाख किलोग्राम पहुँच जाएगी जिसका अनुमानित काला बाज़ार मूल्य क़रीब 3000 करोड़ रुपये होगा।

नष्ट किये ड्रग्स की मात्रा (लगभग) अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में मूल्य (लगभग)
01 जून 2022 से 29 जुलाई 2022 तक 51000 किलोग्राम 1200 करोड़
30 जुलाई 2022 को 31000 किलोग्राम 800 करोड़
आज तक कुल विनिष्टीकरण 82000 किलोग्राम 2000 करोड़
15 अगस्त तक अनुमानित विनिष्टीकरण 1 लाख किलोग्राम 3000 करोड़

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि गृह मंत्रालय ने संस्थागत संरचना की मज़बूती के लिए त्रिस्तरीय फ़ार्मूला पर काम शुरू किया है। पहला सभी नार्को एजेंसियों का सशक्तिकरण और समन्वय ताकि उन्हें दुनियाभर की बेस्ट प्रेकटिस, अच्छे से अच्छे उपकरण और सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा सकें, दूसरा विस्तृत जागरूकता अभियान और तीसरा नशामुक्ति। नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई को इन तीन मोर्चों में विभाजित किया है और इन तीनों क्षेत्रों में बहुत तीव्र गति से काम हो रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी हमेशा कहते हैं कि संपूर्ण सरकार दृष्टिकोण ( Whole of Govt. Approach) से ही समस्याओं का समाधान हो सकता है और यह एक ऐसी समस्या जिसमें अगर इस दृष्टिकोण को नहीं अपनाया गया तो सफलता मिलनी मुश्किल है। उन्होने कहा कि अगर हम युवाओं को नशे की लत से मुक्त कराने और नए युवाओं को इससे दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान को तेज नहीं करेंगे और मादक पदार्थों को नहीं रोकेंगे तो विफल हो जाएँगे। अतः इन तीनों बिंदुओं पर हमें एक साथ आगे बढ़ना पड़ेगा।

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