आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया फिर शुरू करने का मुख्यमंत्री ने दिया आश्वासन

देहरादून, 2 अक्टूबर। उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद ने छूटे हुए राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की मांग को लेकर गुरुवार को शहीद स्थल पर धरना दिया। इस दौरान शहीद स्थल पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपकर चिन्हीकरण की समय-सीमा बढ़ाने और वंचित आंदोलनकारियों को प्रक्रिया में शामिल करने की मांग की। परिषद के अनुसार मुख्यमंत्री ने चिन्हीकरण की प्रक्रिया फिर से शुरू करने का आश्वासन दिया।
परिषद ने ज्ञापन में कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन में हजारों लोगों ने सक्रिय भागीदारी की, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में वास्तविक आंदोलनकारी चिन्हीकरण से वंचित हैं। इसके कारण उन्हें आंदोलनकारी के रूप में मिलने वाले सम्मान और निर्धारित सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
परिषद ने सरकार से चिन्हीकरण के लिए आवेदन की समय-सीमा बढ़ाने, छूटे हुए प्रामाणिक आंदोलनकारियों को शामिल करने तथा पूरी प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने की मांग की। इसके साथ ही अलग-अलग स्थानों पर विशेष चिन्हीकरण शिविर लगाने और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने में आंदोलनकारियों की सहायता करने का सुझाव दिया गया। परिषद ने दस्तावेज उपलब्ध न होने की स्थिति में दो वरिष्ठ चिन्हित आंदोलनकारियों के सत्यापन को भी आधार बनाए जाने की मांग रखी।
परिषद के अध्यक्ष सुरेश कुमार के अनुसार मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि छूटे आंदोलनकारियों के लिए चिन्हीकरण की प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाएगी। परिषद ने इस आश्वासन का स्वागत करते हुए शीघ्र शासनादेश जारी करने की मांग की। ज्ञापन की प्रति राज्यपाल को भी भेजी गई है।
इससे पहले आंदोलनकारियों ने मुजफ्फरनगर कांड के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और महात्मा गांधी की जयंती पर उन्हें नमन किया।
धरने में परिषद के संरक्षक बालेश बबानिया, अध्यक्ष सुरेश कुमार, अनंत आकाश, लेखराज, प्रमिला रावत, सुभागा फर्सवाण, राजेश शर्मा, प्रभात डण्डरियाल, मंजू पंवार, गीता नेगी, सुरेंद्र सिंह सजवाण, चिंतन सकलानी, देवेश्वरी गुसाईं, अजय तिवारी, भगत सिंह रावत, शशि जैन, जानकी भट्ट, यशोदा देवी और निशा रतूड़ी सहित बड़ी संख्या में राज्य आंदोलनकारी शामिल हुए।
