भूस्थानिक स्वप्रमाणन पोर्टल शुरू: सालभर की जगह मिनटों में मिलेंगी महत्वपूर्ण जानकारियां

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-जयसिंह रावत
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने व्यक्तियों, कंपनियों, संगठनों और सरकारी एजेंसियों द्वारा भू-स्थानिक दिशा-निर्देशों के प्रावधानों का पालन करने के लिए स्व-प्रमाणन पोर्टल लॉन्च किया। इससे पूर्व अगस्त 2021 में सरकार द्वारा एकत्र किए गए भू-स्थानिक आंकड़ों (जियोस्पेशियल डेटा) को भारत में नागरिकों और संगठनों के लिए स्वतंत्र रूप से और आसानी से उपलब्ध कराने के लिए ऑनलाइन एप्लिकेशंस का उद्घाटन किया गया था। इसे भारत में भू-स्थानिक उद्योग के उदारीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम कहा जा सकता है। इस प्रकार के प्रयास अनुसंधान और विकास प्रयासों को बढ़ावा देंगे जो स्थानीय स्तर पर प्रौद्योगिकियों और समाधानों के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारतीय सर्वेक्षण (एसओआई), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (आरएसएसी), तथा राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) जैसे विशेषज्ञ संस्थानों के साथ सभी मंत्रालयों तथा विभागों का समन्वय, भारत में भू-स्थानिक इकोसिस्टम को मजबूत करता है।
भूस्थानिक स्वप्रमाणन पोर्टल की लांचिंग के समय केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह का कहना था कि पोर्टल स्व-प्रमाणन व्यवस्था के साथ भू-स्थानिक डेटा, मानचित्र, उत्पाद, समाधान और सेवाओं के निर्माण की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करेगा। इससे पहले, इस प्रक्रिया में परियोजना पर वास्तविक काम शुरू करने से पहले पूर्व अनुमोदन और मंजूरी में लगभग एक वर्ष का समय लगता था। इसके परिणामस्वरूप समय, संसाधन, व्यवसाय और विकास के अवसरों का काफी नुकसान हुआ। नया स्व-प्रमाणन पोर्टल भू-स्थानिक डेटा से संबंधित गतिविधियों में कार्यरत सभी संस्थाओं को कुछ ही मिनटों में आसानी से प्रमाणित करने की सुविधा प्रदान करता है।
भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी में सामान्यतया मानचित्रण तथा सर्वेक्षण तकनीक, रिमोट सेंसिंग, फोटोग्रामेट्री, कार्टोग्राफी, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) और भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) सम्मिलित होती है। भारत में भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी का उपयोग करने वाले प्रमुख क्षेत्र कृषि, दूरसंचार, तेल और गैस, पर्यावरण प्रबंधन, वानिकी, सार्वजनिक सुरक्षा, बुनियादी ढांचा, लॉजिस्टिक क्षेत्र इत्यादि हैं।
इससे पूर्व विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग में तत्कालीन सचिव प्रो. आशुतोष शर्मा ने कहा था कि “फरवरी 2021 में शुरू की गई नई भू-स्थानिक नीति ने सर्वेक्षण और मानचित्रण के सभी नियमों को खत्म कर दिया, इस प्रकार अतीत की बहुत सारी बाधाओं को एक ही झटके में हटा दिया गया। भू-स्थानिक डेटा के उदारीकरण और लोकतंत्रीकरण से 2030 तक अपेक्षाकृत अधिक अप्रत्यक्ष प्रभाव के साथ-साथ लगभग 1 लाख करोड़ का प्रत्यक्ष प्रभाव अर्थव्यवस्था पर होगा। यह जियो-पोर्टल उस विशाल, प्रमाणित और मूल्यवान डेटा को प्रदर्शित करता है जिसे एनएटीएमओ ने अपनी 65 वर्षों की लंबी सेवा अवधि के दौरान हासिल किया था। उपयोगकर्ता ’’मानचित्रण’’ में नक्शे औरएटलस और विभिन्न भू-स्थानिक डेटा परतों को देखने, डाउनलोड करने और उस पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं। एनएटीएमओ ने इस जियोपोर्टल को ज्यादातर भारत में निर्मित स्वदेशी (मेक-इन-इंडिया) तकनीकों केसाथ और न्यूनतम वित्तीय भागीदारी और न्यूनतम निर्धारित समय अवधि के भीतर विकसित किया है।
भारत में भू-स्थानिक डेटा और मानचित्रों के संग्रह, निर्माण, तैयारी, प्रसार, भंडारण, प्रकाशन, अद्यतन औरध्या डिजिटलीकरण पर पूर्व अनुमोदन, सुरक्षा मंजूरी, लाइसेंस या किसी अन्य प्रतिबंध की कोई आवश्यकता नहीं रहेगी। व्यक्ति, कंपनी, संगठन और सरकारी एजेंसी स्वयं के द्वारा प्राप्त भू-स्थानिक डेटा को संसाधित करने, एप्लिकेशन बनाने और ऐसे डेटा के संबंध में समाधान विकसित करने के लिए स्वतंत्र होंगे एवं बिक्री, वितरण, साझा करने, अदला-बदली करने, प्रसार करने, प्रकाशित करने, अस्वीकार करने और नष्ट करने के माध्यम से ऐसे डेटा उत्पादों, अनुप्रयोगों, समाधानों आदि का उपयोग करने के लिए भी स्वतंत्र होंगे। स्व-प्रमाणन का उपयोग, इन दिशानिर्देशों का पालन करने के सन्दर्भ में किया जाएगा।
पोर्टल का उपयोग, भू-स्थानिक गतिविधियों को पूरा करने में भू-स्थानिक कंपनियों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और नवप्रवर्तकों को मंजूरी और अनुमोदन प्राप्त करने में लगने वाले समय को अनिवार्य रूप से कम करेगा। हालांकि, अनुभव यह रहा है कि नई गाइडलाइंस को लागू हुए एक साल बीत जाने के बाद भी यूजर्स को अभी भी चीजों की पूरी जानकारी नहीं है। सभी सरकारी विभागों में अनिश्चितता है तथा निजी उद्योग में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। भारत की क्षमता और आकार से जुड़े पैमाने पर भू-स्थानिक सेवाओं और उत्पादों की मांग अत्यंत कम है। इसका मुख्य कारण सरकारी तथा निजी क्षेत्र में संभावित उपयोगकर्ताओं के बीच जागरूकता की कमी है।
इस पोर्टल का शुभारम्भ 15 फरवरी, 2021 को डीएसटी द्वारा जारी नए भू-स्थानिक डेटा दिशा-निर्देशों में परिवर्तनकारी विचारों और घोषणाओं के अनुरूप है। पोर्टल को एनआईसी के सहयोग से विकसित किया गया है। डीएसटी के सचिव डॉ. श्रीवरी चंद्रशेखर के अनुसार स्व-प्रमाणन पोर्टल की भूमिका की सराहना की और कहा कि यह भू-स्थानिक गतिविधियों को तेजी लायेगा। उदारीकृत भू-स्थानिक शासन कृषि, विनिर्माण, निर्माण, उपयोगिता सेवा, आपदा प्रबंधन, शहरी विकास और शासन के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कंपनी, संगठन और सरकारी एजेंसी, जो डेटा का स्वयं संग्रह करती हैं, भू-स्थानिक डेटा को संसाधित करने, एप्लिकेशन बनाने और ऐसे डेटा और डेटा उत्पादों का उपयोग करके समाधान विकसित करने, वितरित करने, साझा करने, अदला-बदली करने, प्रसार करने और प्रकाशित करने के लिए स्वतंत्र हैं तथा इनके लिए मंजूरी और अनुमोदन की प्रतीक्षा करने की जरूरत नहीं है।

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