पेंडोरा पेपर्स : सचिन तेंदुलकर और अनिल अंबानी की भी जांच होगी

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नयी दिल्ली, 6 अक्टूबर(PIB)

केन्द्र सरकार ने इंटरनेशनल कन्सोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट (आइसीआइजे) के पैडोरा पेपर्स लीक में 300 भारतीयों के विदेशों में छिपे धन के खुलासे का संज्ञान लेते हुये इस मामले की पूरी जांच कराने का निर्णय लिया है। इस खुलासे में क्रिकेट के भगवान बताये जा रहे सचिन तेंदुलकर और रिलायंस के अनिल अंबानी का भी नाम है।

संबंधित जांच एजेंसियां ​​इन मामलों की जांच करेंगी

केन्द्र सरकार की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार सरकार ने इन घटनाक्रमों पर संज्ञान लिया है। संबंधित जांच एजेंसियां ​​इन मामलों की जांच करेंगी और ऐसे मामलों में कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी। इन मामलों में कारगर जांच सुनिश्चित करने की दृष्टि से, सरकार प्रासंगिक करदाताओं/संस्थाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिए विदेशी क्षेत्राधिकारों से पूरी तत्परता के साथ संपर्क भी करेगी। भारत सरकार एक ऐसे अंतर-सरकारी समूह का हिस्सा भी है, जो इस तरह के रहस्योदघाटन से जुड़े कर- संबंधी जोखिमों से कारगर तरीके से निपटने के लिए सहयोग और अनुभव साझा करना सुनिश्चित करता है।

किनकिन भारतीयों के नाम हैं?
ICIJ की ओर से जारी दस्‍तावेजों में 300 भारतीयों के नाम हैं। इनमें अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप के अनिल अंबानी, पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंडुलकर, बायकॉन की किरन मजूमदार शॉ और भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी की बहन शामिल हैं। इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कई भारतीयों ने 2016 में पनामा पेपर्स लीक के बाद अपनी सपंत्तियों को इधर-उधर किया।

200 से अधिक देशों विदेशों में छुपे रहस्य

इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इंटरनेशनल जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) ने 3 अक्टूबर, 2021 को अपने पास 200 से अधिक देशों और इलाकों के धनी अभिजात वर्ग के लोगों के विदेशों में छुपे रहस्यों को उजागर करने वाले 2.94 टेराबाइट डेटा के आंकड़ों के होने का दावा किया है। यह खोजबीन कम या बिना कर वाले क्षेत्राधिकार में नकली (शेल) कंपनियों, ट्रस्टों, फाउंडेशनों और अन्य संस्थाओं को सूचीबद्ध कराने की चाहत रखने वाले धनी व्यक्तियों और निगमों को पेशेवर सेवाएं प्रदान करने वाले 14 अपतटीय सेवा प्रदाताओं के गोपनीय रिकॉर्ड के लीक होने पर आधारित है।

लगभग 20,352 करोड़ रुपये की अघोषित जमाराशि

इस बात पर गौर किया जा सकता है कि आईसीआईजे, एचएसबीसी, पनामा पेपर्स और पैराडाइज पेपर्स के रूप में पहले इसी तरह के रहस्योदघाटन के बाद, सरकार ने उपयुक्त कर और जुर्माना लगाकर काले धन अघोषित विदेशी परिसंपत्तियों एवं आय पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से पहले से ही काला धन (अज्ञात विदेशी आय तथा परिसंपत्ति) एवं कर अधिनियम, 2015 को लागू कर रखा है। पनामा और पैराडाइज पेपर्स में की गई खोजबीन में लगभग 20,352 करोड़ रुपये की अघोषित जमाराशि(15.09.2021 तक की स्थिति के अनुसार) का पता चला है।

इसके अलावा, सरकार ने आज निर्देश दिया है कि ‘पेंडोरा पेपर्स’ के नाम से मीडिया में आने वाले पेंडोरा पेपर्स रहस्योद्घाटन से जुड़े मामलों की जांच की निगरानी सीबीडीटी के अध्यक्ष के नेतृत्व में विविध एजेंसियों वाले एक समूह के जरिए की जाएगी। इस समूह में सीबीडीटी, ईडी,भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) और फाइनेंसियल इंटेलिजेंस यूनिट (एफआईयू) के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
किस तरह विदेशों में जमा किया गया पैसा?
एक तरीका यह था कि स्विट्जरलैंड या UAE के फ्री ट्रेड जोन में एक कंपनी खड़ी की जाए। इसके बाद पैसे को स्विट्जरलैंड से इस कंपनी में ट्रांसफर किया जाए। धीरे-धीरे डिविडेंड इनकम के रूप में पैसे को भारत लाया जाए, उसपर 33% टैक्‍स देकर उसे सफेद बनाया जाए। स्विस बैंक्‍स उन ग्राहकों की जानकारी देने के लिए बाध्‍य नहीं हैं जो भारत संग संधि से पहले खोले गए थे।

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