ऐतिहासिक गलोगी जलविद्युत परियोजना : देश की 119 साल पुरानी विरासत

मसूरी/देहरादून। भारत सरकार के नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के संयुक्त सचिव (विंड) राजेश कुलहारी ने यूजेवीएन लिमिटेड की ऐतिहासिक ‘गलोगी लघु जलविद्युत परियोजना’ का निरीक्षण किया। लगभग 119 वर्ष पुरानी इस हेरिटेज परियोजना के कुशलतापूर्वक संचालन को देखकर संयुक्त सचिव विशेष रूप से प्रभावित हुए।
स्थापना और गौरवशाली इतिहास
उत्तर भारत की सबसे पुरानी जलविद्युत परियोजनाओं में शुमार गलोगी का इतिहास अत्यंत रोचक है:
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शिलान्यास: इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास वर्ष 1907 में मेरठ के तत्कालीन कमिश्नर द्वारा किया गया था।
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इंजीनियरिंग का कमाल: उस दौर में जब सड़कें नहीं थीं, इस परियोजना की भारी मशीनरी को रोपवे (रज्जू मार्ग) के जरिए दुर्गम पहाड़ियों तक पहुँचाया गया था।
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उद्देश्य: इसका निर्माण मुख्य रूप से मसूरी की अंग्रेज बस्ती को रोशन करने के लिए हुआ था। शुरुआत में इसकी बिजली मसूरी की मांग पूरी करने के बाद देहरादून के कुछ हिस्सों तक भी पहुँचाई जाती थी।
संचालन का सफरनामा
परियोजना का प्रबंधन समय के साथ विभिन्न हाथों में रहा:
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शुरुआत में इसका संचालन मसूरी नगर पालिका द्वारा किया जाता था।
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तत्पश्चात यह ‘मसूरी देहरा अंडरटेकिंग’ के पास गई।
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बाद में उत्तर प्रदेश जल विद्युत निगम ने लघु परियोजनाओं के तहत इसका कार्यभार संभाला।
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वर्ष 2000 में उत्तराखंड जल विद्युत निगम (UJVN Ltd) के अस्तित्व में आने के बाद से अब इसका संचालन निगम द्वारा किया जा रहा है।
क्षमता और चुनौतियां
परियोजना की अधिस्थापित (Installed) क्षमता 5 मेगावाट थी। हालांकि, लंबे समय तक पाइप लाइन में चूना (Silt/Calcium) जमा होने और रखरखाव में रही कुछ लापरवाहियों के कारण इसकी वास्तविक उत्पादन क्षमता में गिरावट आई है। बावजूद इसके, वर्तमान प्रबंधन के प्रयासों से इसके प्रदर्शन में सुधार देखा गया है।
54 वर्षों का रिकॉर्ड उत्पादन
संयुक्त सचिव को अवगत कराया गया कि गलोगी विद्युत गृह ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 81 लाख यूनिट ऊर्जा का उत्पादन किया है। यह पिछले 54 वर्षों का सर्वाधिक और परियोजना के कमीशनिंग के बाद का दूसरा सर्वोच्च उत्पादन है। इस अवसर पर महाप्रबंधक अजय पटेल, उपमहाप्रबंधक अजय सिंह, उपमहाप्रबंधक कृष्ण कुमार सिंह बिष्ट समेत यूजेवीएन लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारी और अभियंता उपस्थित रहे।
निगम की प्रतिबद्धता
यूजेवीएन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अजय कुमार सिंह ने कहा कि निगम इस विरासत परियोजना को अक्षुण्ण रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पुरानी परियोजनाओं को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में संपूर्ण योगदान देना ही निगम का लक्ष्य है।
