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उत्तराखण्ड की स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए गये कई निर्णय

 

-डी पी उनियाल की रिपोर्ट-

देहरादून, 3 मई। प्रदेश के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने दून अस्पताल में राज्य के सात राजकीय मेडिकल कॉलेजों तथा हल्द्वानी स्थित राज्य कैंसर संस्थान के साथ उच्च स्तरीय मैराथन समीक्षा बैठक की। बैठक में सभी मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य, निदेशक और चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. अजय आर्या मौजूद रहे। इस दौरान स्वास्थ्य सचिव सचिन कुर्वे और राज्य कैंसर संस्थान, हल्द्वानी के निदेशक डॉ. पांडे ने संस्थान की प्रगति पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़, सुलभ और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। तय किया गया कि राज्य कैंसर संस्थान, हल्द्वानी में शीघ्र ही इंडोर सेवाएं शुरू की जाएंगी। हरिद्वार मेडिकल कॉलेज में 15 दिनों के भीतर नियमित ओपीडी सेवाएं प्रारंभ होंगी, जबकि श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में इसी माह कैथ लैब शुरू करने की तैयारी की जा रही है। अल्मोड़ा और हल्द्वानी में स्थापित कैथ लैब के संचालन के लिए कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती भी की जाएगी।

बैठक में मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। पर्वतीय क्षेत्रों में लगभग 70 प्रतिशत और देहरादून में करीब 40 प्रतिशत पद रिक्त होने की जानकारी दी गई। इस समस्या के समाधान के लिए प्रभावी फैकल्टी रिटेंशन नीति बनाने पर मंथन किया गया। साथ ही सीनियर रेजिडेंट्स के वेतन में वृद्धि करने का निर्णय लिया गया।

रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज में जिला अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों को फैकल्टी के रूप में समायोजित करते हुए इसी शैक्षणिक सत्र से एमबीबीएस पाठ्यक्रम शुरू करने के निर्देश दिए गए। डॉक्टरों के लिए ट्रांजिट हॉस्टल विकसित करने, श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में चारधाम यात्रा मार्ग को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने तथा पर्वतीय अस्पतालों के निकट हेलीपैड निर्माण की योजना पर भी सहमति बनी।

इसके अलावा आपातकालीन स्थितियों में विशेषज्ञ चिकित्सकों को हेली सेवा के माध्यम से आवश्यक स्थानों तक पहुंचाने, रोस्टर प्रणाली के जरिए प्रदेशभर में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और संस्थागत एम्बुलेंस सेवाओं को 108 सेवा की तर्ज पर संचालित करने के निर्देश दिए गए।

स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल परिसरों में स्वच्छता व्यवस्था मजबूत करने, अनावश्यक रेफरल पर रोक लगाने और बाहर से दवाएं लिखने की प्रवृत्ति पर सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए। उन्होंने “सफाई, दवाई और भलाई” को स्वास्थ्य सेवाओं के तीन प्रमुख स्तंभ बताते हुए इन पर विशेष ध्यान देने को कहा।

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