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दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे पर भारी बारिश के बाद सड़क धंसी

एनएचएआई ने जलभराव और स्थानीय बाधाओं को बताया कारण

नई दिल्ली, 3 जुलाई। दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे पर 1 जुलाई को भारी बारिश के बाद किलोमीटर 55+480 पर सड़क का एक हिस्सा धंस गया। घटना के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने प्रभावित हिस्से की तत्काल मरम्मत कर यातायात को सुरक्षित रूप से बहाल कर दिया। इस बीच, सड़क धंसने की घटना पर उठे सवालों के बीच एनएचएआई ने विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करते हुए इसके लिए भारी वर्षा, जलभराव और स्थानीय स्तर पर उत्पन्न बाधाओं को जिम्मेदार ठहराया है।
एनएचएआई के अनुसार, 1 जुलाई की सुबह नियमित निरीक्षण के दौरान परियोजना दल ने सड़क धंसने की जानकारी मिलने पर तुरंत मरम्मत कार्य शुरू किया। प्राथमिकता के आधार पर क्षतिग्रस्त हिस्से को ठीक कर यातायात को निर्बाध रूप से संचालित किया गया।


प्राधिकरण का कहना है कि संबंधित स्थान पर वर्षा जल की निकासी के लिए बैलेंसिंग कल्वर्ट (संतुलन पुलिया) का निर्माण किया गया था, जिससे पानी को मीडियन के पार सुरक्षित रूप से निकाला जा सके। लेकिन स्थानीय निवासियों के विरोध के कारण इस पुलिया को स्थायी क्रॉस-ड्रेनेज प्रणाली से नहीं जोड़ा जा सका। एनएचएआई का दावा है कि कुछ स्थानीय लोग पुलिया के मुहाने का उपयोग वाहनों की आवाजाही के लिए कर रहे हैं और जल निकासी व्यवस्था को जोड़ने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। इसके कारण भारी बारिश के दौरान सड़क पर पानी भर गया, जिससे सड़क की सतह धंस गई।
एनएचएआई ने यह भी बताया कि भूमि से जुड़े एक लंबित मध्यस्थता विवाद के कारण उस स्थान पर स्थायी ढलान सुरक्षा (स्लोप प्रोटेक्शन) और ढलानदार नाली (स्लोप ड्रेन) का निर्माण भी अधूरा है। प्राधिकरण के अनुसार, संबंधित भूस्वामियों द्वारा कार्य की अनुमति नहीं दिए जाने से परियोजना की मूल डिजाइन के अनुरूप सुरक्षा कार्य पूरे नहीं हो सके।
फिलहाल समस्या के समाधान के लिए एनएचएआई ने लगभग 1.5 किलोमीटर लंबी अंतरिम समानांतर नाली का निर्माण शुरू कर दिया है। साथ ही, बैलेंसिंग कल्वर्ट के चालू होने तक वर्षा जल को सुरक्षित रूप से आगे ले जाने के लिए नाली के ढाल का पुनः डिज़ाइन किया जा रहा है।
एनएचएआई का कहना है कि प्रभावित स्थल की लगातार निगरानी की जा रही है और यातायात की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक संसाधन तैनात हैं। भूमि विवाद सुलझने के बाद स्थायी ढलान सुरक्षा और जल निकासी से जुड़े शेष कार्य भी पूरे कर दिए जाएंगे।

प्राधिकरण ने दोहराया है कि राजमार्ग सुरक्षा, संरचनात्मक मजबूती और समयबद्ध रखरखाव उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

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