उत्तराखण्ड में बारिश का कहर, 30 से अधिक दब कर मर गये

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–जयसिंह रावत

देहरादून 19 अक्टूबर । मानसून के लौटने के बावजूद उत्तराखण्ड में कुपित आसमान कहर बरपाये जा रहा है। प्रदेश में कई स्थानों पर मंगलवार को लगभग 124 सालों का वर्षा का रिकार्ड टूट गया है। इस आसमानी आफत में अब तक कुमाऊं मण्डल में लगभग 30 लोगों के मारे जाने की सूचना है। राज्य मौसम केन्द्र से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुक्तेश्वर और पन्तनगर में भारी वर्षा ने सौ साल से अधिक पुराना रिकार्ड तोड़ दिया है। इस अतिवृष्टि आपदा में अकेले नैनीताल जिले में कम से कम 26 लोगों के मारे जाने की सूचना है।

राज्य मुख्यालय पर प्राप्त जानकारी के अनुसार कुमाऊं मण्डल के नैनीताल जिले के रामगढ़ में बादल फटने की घटना से मकान ढहने के कारण झूटिया गांव में कम से कम 10 मजदूर दब कर मर गये।इसी प्रकार मुक्तेश्वर के दोसापानी में भी 5 लोग दब कर मर गये। ओखलकाण्डा में एक ही परिवार के पांच लोगों की मकान के अन्दर दब कर मरने की सूचना है। कैंची धाम में भी दो बच्चों के दब कर मरने का समाचार प्राप्त हुआ है। इसी प्रकार अल्मोड़ा-नैनीताल के बीच क्वारा पुल पर भी दो लोगों के दब कर मरने की सूचना है। जूलीकोट में एक युवक गत दिवस मोटर साइकिल समेत बह गया था।अल्मोड़ा जिले के रानीखेत के निकट एक पत्रकार आनन्द सिंह नेगी की अपने पोते-पोती के साथ मकान ढहने के कारण मलबे में दब कर मौत हो गयी। देर सांय तक स्थिति की पूरी जानकारी राज्य आपदा प्रबंधन केन्द्र को नहीं थी। पहाड़ी क्षेत्रों में स्थिति विकट बतायी जा रही है।

साल का मानसून जब वापस लौटने लगता है तो अपने पीछे शीत ऋतु के लिये रास्ता बनाता जाता है। शीत ऋतु में वर्षा अवश्य होती है मगर उसमें मानसून की जैसी बौछारें नहीं पड़तीं। हमने इसी साल पहली बार फरबरी जैसे ठण्डे महीने की कड़कड़ाती सर्दी में उत्तराखण्ड के हिम प्रदेश में ऋषि और धौली गंगाओं में विनासकारी बाढ़ देखी। अब मानसून लौटने पर नैनीताल जिले के रामनगर क्षेत्र में बादल फटने की घटना भी सुन ली। मौसम विभाग कहता है कि अक्टूबर की 19 तारीख को नैनीताल जिले के मुक्तेश्वर में 340.8 मिमी वर्षा दर्ज हुयी जो कि अब तक का एक रिकार्ड है। ठीक 124 साल पहले 10 जुलाई 1914 को वहां 254.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गयी थी। जाहिर है कि मुक्तेश्वर में इतनी वर्षा बरसात में भी कभी नहीं हुयी थी। इसी प्रकार 19 अक्टूबर को ही पंतनगर में 403.2 मिमी वर्षा दर्ज की गयी जबकि इससे पहले वहां 1990 में  सबसे अधिक 222.8 मिमी वर्षा का रिकार्ड था। प्रकृति की इन विचित्र हरकतों को समझने और प्रकृति के कोप से बचने के उपाय करने के बजाय हम इसे स्वाभाविक मान कर आपदाओं का इंजतजार कर रहे हैं।

कुमाऊ में सरकारी तौर पर 22 के मरने और 8 के लापता होने की पुष्टि
राज्य आपदा परिचालन केन्द्र द्वारा सांय 5 बजे जारी विज्ञप्ति के अनुसार नैनीताल जिले में कुल 18 लोगों के शव बरामद हुये हैं तथा 5 लापता है। इनके अलावा 2 लोग गंभीर रूप् से घायल हैं। 3 भवना के पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। नैनीताल में तोतापानी में 5 मृतक एवं एक घायल होने की सूचना है। जिले के कैंची धाम में भी 2 लोग मारे गये है। जिले की धारी तहसील के ग्राम चौखुटा में अत्यधिक वर्षा से 2 लोगों के मरने और पांच अन्य के घायल होने की सूचना है। रामगढ़ में 9 शव बरामद हो चुके हैं तथा एक व्यक्ति घायल हुआ है।
अल्मोड़ा जिले में 3 मृतकों और एक व्यक्ति के लापता होने की सूचना है। जिले की भतरौंजखान तहसील के अन्तर्गत ग्राम रापड़ में अत्यधिक वर्षा होने के कारण 3 लोग मरे जिनमें से अभी तक 2 ही शव बरामद हुये हैं। भिखियासैण केहीराडंगरी में एक व्यक्ति की जान गयी है। चम्पावत जिले में एक व्यक्ति का शव बरामद हो चुका है तथा 2 लापता है, जबकि 2 लोग घायल हैं। चमोली जिले में 4 लोग घायल हुये हैं। इस प्रकार कुमाऊं मण्डल में 22 मृतकों के शव बरामद हुये हैं जबकि 8 लापता बताये गये हैं। जबकि गैर सरकारी सूत्र मृतकों की संख्या अधिक बताते हैं।
नैनीताल जिले की नैनीताल तहसील के अन्तर्गत ज्योलीकोट में अत्यधिक वर्षा और भूस्खलन के कारण कुछ लोगों के फंसे होने की सूचना है।

 

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