हल्द्वानी में बनेगा हाई कोर्ट का नया न्यायिक परिसर ; सुप्रीम कोर्ट की लगी मुहर
नैनीताल से स्थानांतरण को मंजूरी, राज्य सरकार को छह सप्ताह में भूमि उपलब्ध कराने का निर्देश
नई दिल्ली/देहरादून। उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित करने के लंबे समय से लंबित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने हाईकोर्ट को हल्द्वानी में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया को मंजूरी देते हुए राज्य सरकार को छह सप्ताह के भीतर चिन्हित भूमि हाईकोर्ट को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। साथ ही, पहले दिए गए जनमत संग्रह (रेफरेंडम) कराने के आदेश को भी वापस ले लिया गया है।
यह फैसला मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट कहां स्थापित होगा, यह नीति और प्रशासनिक निर्णय का विषय है तथा इस पर न्यायिक हस्तक्षेप सीमित होना चाहिए।
जनमत संग्रह के आदेश को किया निरस्त
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले दिए गए उस निर्देश को वापस ले लिया, जिसमें हाईकोर्ट के स्थानांतरण के मुद्दे पर जनमत संग्रह कराने की बात कही गई थी। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों का निर्णय जनमत के आधार पर नहीं, बल्कि प्रशासनिक आवश्यकता, न्यायिक व्यवस्था और सार्वजनिक हित को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
छह सप्ताह में जमीन सौंपने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को निर्देश दिया कि हल्द्वानी में नए हाईकोर्ट परिसर के लिए चिन्हित भूमि छह सप्ताह के भीतर न्यायालय को हस्तांतरित की जाए। इसके बाद नए न्यायिक परिसर के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
ब्रिटिशकालीन भवन में चल रहा है हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट वर्तमान में नैनीताल स्थित लगभग 125 वर्ष पुराने ब्रिटिशकालीन भवन से संचालित हो रहा है। यह भवन मूल रूप से ब्रिटिश शासनकाल में गवर्नर के उपयोग के लिए बनाया गया था। राज्य गठन के बाद वर्ष 2000 से हाईकोर्ट इसी भवन में कार्य कर रहा है। बढ़ते मुकदमों, सीमित स्थान, पार्किंग और आधुनिक न्यायिक सुविधाओं की कमी के कारण लंबे समय से नए परिसर की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
राज्य गठन के बाद से उठती रही मांग
9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड राज्य बनने के बाद हाईकोर्ट की स्थापना नैनीताल में की गई थी। शुरुआती वर्षों से ही आधुनिक और विस्तृत न्यायिक परिसर बनाने की मांग उठती रही। वर्ष 2003 में नए भवन का उद्घाटन भी हुआ, लेकिन बढ़ती आवश्यकताओं के अनुरूप पर्याप्त आधारभूत ढांचा विकसित नहीं हो सका।
हल्द्वानी को लेकर पहले भी हुई थी घोषणा
देहरादून को राज्य की राजधानी बनाए जाने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी और बाद में मुख्यमंत्री रहे विजय बहुगुणा ने भी हल्द्वानी में हाईकोर्ट परिसर विकसित करने की दिशा में पहल की थी। वर्ष 2009 में तत्कालीन केंद्रीय कानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने भी हल्द्वानी में हाईकोर्ट परिसर स्थापित करने का समर्थन किया था। हालांकि विभिन्न कारणों से यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
बार एसोसिएशन ने किया फैसले का स्वागत
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उत्तराखंड हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने स्वागत किया है। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि आधुनिक न्यायिक परिसर बनने से न्यायिक कार्यों में सुविधा मिलेगी, अधिवक्ताओं और वादकारियों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी तथा भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप न्यायिक व्यवस्था को मजबूत किया जा सकेगा।
फैसले का महत्व
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद उत्तराखंड में नए हाईकोर्ट परिसर के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। हल्द्वानी में आधुनिक न्यायिक परिसर बनने से न्यायिक कार्यप्रणाली को गति मिलने, बेहतर बुनियादी सुविधाएं विकसित होने और आम नागरिकों को अधिक सुव्यवस्थित न्यायिक सेवाएं उपलब्ध होने की उम्मीद है। वहीं, राज्य सरकार के लिए अब निर्धारित समय सीमा के भीतर भूमि हस्तांतरण और निर्माण प्रक्रिया शुरू करना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।
