बदरीनाथ धाम के दान-चढ़ावे की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित
बीकेटीसी में अनुशासनहीनता पर बड़ी कार्रवाई
देहरादून, 7 जुलाई। बदरीनाथ धाम में दान-चढ़ावे एवं अन्य अर्पणों के प्रबंधन से जुड़ी कथित अनियमितताओं की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उत्तराखंड सरकार ने मामले की विस्तृत जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट एवं संस्तुतियां शासन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने अनुशासन एवं प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए अध्यक्ष कार्यालय में तैनात व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
पर्यटन सचिव श्री धीराज सिंह गर्ब्याल द्वारा जारी आदेश के अनुसार समिति की अध्यक्षता गढ़वाल मंडल के आयुक्त करेंगे। समिति में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के प्रबंध निदेशक श्री संदीप तिवारी तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक कार्यालय में निदेशक (वित्त) श्री जगत सिंह चौहान को सदस्य नामित किया गया है।
समिति बदरीनाथ धाम में प्राप्त होने वाले दान-चढ़ावे, नकद एवं अन्य अर्पणों के संग्रहण, अभिलेखीकरण, लेखांकन, भंडारण तथा उनके उपयोग से संबंधित सभी पहलुओं की जांच करेगी। जांच के दौरान प्राप्त शिकायतों का परीक्षण करते हुए यह देखा जाएगा कि कहीं निर्धारित नियमों एवं प्रक्रियाओं का उल्लंघन तो नहीं हुआ तथा यदि किसी स्तर पर अनियमितता या प्रशासनिक लापरवाही सामने आती है तो उसके संबंध में स्पष्ट तथ्य शासन के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।
शासनादेश के अनुसार जांच समिति आवश्यकता पड़ने पर किसी भी अधिकारी, विशेषज्ञ, लेखा परीक्षक अथवा संबंधित व्यक्ति का सहयोग एवं परामर्श प्राप्त कर सकेगी। समिति को आवश्यक अभिलेखों, दस्तावेजों एवं अन्य संबंधित सूचनाओं का परीक्षण करने का भी अधिकार दिया गया है, ताकि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यपरक ढंग से पूरी की जा सके।
समिति केवल कथित अनियमितताओं की जांच तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दान-चढ़ावे के संपूर्ण प्रबंधन तंत्र की समीक्षा करते हुए उसे अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाने के लिए भी सुझाव देगी। समिति डिजिटल लेखा-जोखा, दान की निगरानी, ऑडिट व्यवस्था तथा जवाबदेही को मजबूत करने जैसे सुधारात्मक उपायों पर भी अपनी संस्तुतियां शासन को सौंपेगी।
गौरतलब है कि बदरीनाथ धाम देश के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है, जहां प्रत्येक वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा बड़ी मात्रा में नकद दान, स्वर्ण-रजत आभूषण तथा अन्य बहुमूल्य भेंट अर्पित की जाती हैं। ऐसे में दान-चढ़ावे के प्रबंधन में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
सरकार का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था सर्वोपरि है और मंदिरों के प्रशासन तथा दान-चढ़ावे के प्रबंधन में पारदर्शिता बनाए रखना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर यदि कहीं कोई कमी या अनियमितता पाई जाती है तो उसके अनुरूप आवश्यक कार्रवाई की जाएगी तथा भविष्य के लिए मजबूत और पारदर्शी व्यवस्था विकसित की जाएगी।
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व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल तत्काल प्रभाव से निलंबित, निष्पक्ष जांच के लिए समिति गठित
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने अनुशासन एवं प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए अध्यक्ष कार्यालय में तैनात व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
समिति द्वारा जारी आदेश के अनुसार, श्री नौटियाल के विरुद्ध पदीय दायित्वों के निर्वहन में प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आने पर 03 जुलाई 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। साथ ही मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच के लिए चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया।
प्राप्त स्पष्टीकरण एवं जांच समिति की प्रारंभिक आख्या का परीक्षण करने पर आरोप प्रथम दृष्टया पुष्ट पाए गए। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की है। समिति ने यह भी माना कि कर्मचारी को वर्तमान पद पर बनाए रखने से जांच प्रभावित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
इन्हीं तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए जांच की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से श्री प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन-निर्वाह भत्ता देय होगा। साथ ही उन्हें बीकेटीसी कार्यालय, जोशीमठ (जनपद चमोली) से संबद्ध किया गया है। इस अवधि में सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी तथा उन्हें जांच एवं अनुशासनात्मक कार्यवाही में अपेक्षित सहयोग देना अनिवार्य होगा।बीकेटीसी ने स्पष्ट किया है कि समिति प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं अनुशासन सर्वाेच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता के मामलों में नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
